पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) में चल रहा विद्रोह थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस आंदोलन के 24वें दिन, जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेता सरदार अमन खान ने पाकिस्तान सरकार और उसकी सेना को लेकर बड़ा खुलासा किया है.
सरदार अमन खान ने भीड़ को संबोधित करते हुए पाकिस्तानी सेना को कटघरे में खड़ा किया. उन्होंने कहा, 'ये खुद पाकिस्तान की सेना ही थी, जिसने कश्मीरियों के हाथों में बंदूकें थमाई थीं. और आज उनमें इतनी हिम्मत आ गई कि वो हमें ही आतंकवादी कह रहे हैं?'
अमन खान के इस बयान पर ईदगाह में मौजूद 80,000 से ज्यादा लोगों की भीड़ ने तालियां बजाकर उनका जोरदार समर्थन किया.
पाक प्रशासन और आतंकवादी संगठनों के बीच गठजोड़ का खुलासा
अपने भाषण में अमन खान ने पाकिस्तानी प्रशासन और आतंकवादी संगठनों के बीच को लेकर भी बात की. उन्होंने पिछले साल की एक घटना का गवाह के तौर पर जिक्र किया. खान ने बताया कि 5 फरवरी 2025 को रावलकोट के डिप्टी कमिश्नर ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक कार्यक्रम को न सिर्फ हरी झंडी दी थी, बल्कि उन्हें पूरी सुरक्षा भी मुहैया कराई थी.
अमन खान ने बताया कि उस कार्यक्रम के दौरान जैश के हथियारबंद आतंकवादी हाथों में एके-47 राइफलें और तलवारें लहराते हुए पूरे शहर में खुलेआम घूमे थे.
मुजफ्फराबाद कूच की बड़ी चेतावनी
रैली के मंच से JAAC के नेतृत्व ने इस्लामाबाद की पाकिस्तान सरकार को आखिरी और सख्त चेतावनी दी है. आंदोलनकारी नेताओं ने कहा कि पाकिस्तान सरकार या तो बातचीत की मेज पर आए और आंदोलन की सभी 38 मांगों को तुरंत लागू करे, वरना वो पीछे हटने वाले नहीं हैं.
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JAAC ने चेताते हुए कहा है कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आने वाले दिनों में हजारों-लाखों लोग मुजफ्फराबाद की तरफ मार्च करेंगे. नेताओं ने दावा किया कि अगर एक बार ये मुजफ्फराबाद मार्च शुरू हो गया, तो फिर आंदोलन का रुख बदल जाएगा. ऐसे में बात इन 38 मांगों पर नहीं होगी, बल्कि पाकिस्तान के पूरी तरह से PoJK को खाली करने और यहां से वापस जाने की होगी.