हरियाणा के प्रशासनिक हलकों में एक बड़े भ्रष्टाचार मामले के खुलासे से हड़कंप मच गया है. 1995 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डी. सुरेश के 31 अगस्त को रिटायर होने से महज 5 दिन पहले, एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धोखाधड़ी की संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है.
मुख्य सचिव से मंजूरी मिलने के बाद 26 अगस्त को दर्ज इस मुकदमे में खुलासा हुआ है कि गुरुग्राम के पॉश सेक्टर-23 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के जिस 500 गज के प्लॉट की बाजार कीमत करीब ₹3.5 करोड़ (कलेक्टर रेट ₹1.75 करोड़) थी, उसका मालिकाना हक महज ₹6.71 लाख में थमा दिया गया.
एफआईआर के मुताबिक जानकारी
इस महाघोटाले की जड़ें साल 1988 के एक डिफॉल्ट प्लॉट से जुड़ी हैं, जिसे बकाया भुगतान न करने पर HSVP ने 2002 में जब्त कर लिया था. करीब 7 साल चली विजिलेंस जांच में सामने आया कि अधिकारियों और बाबुओं ने एक दूसरे प्लॉट के बहाल होने के अदालती आदेश की आड़ लेकर फर्जी नोटशीट तैयार की. मार्च 2019 में तत्कालीन चीफ एडमिनिस्ट्रेटर रहे डी. सुरेश ने नियमों को ताक पर रखते हुए न सिर्फ उस डिफॉल्ट प्लॉट की जब्ती रद्द की, बल्कि कौड़ियों के भाव कन्वेयंस डीड करवाकर सरकारी खजाने को करोड़ों का सीधा चूना लगाया. मामले में तत्कालीन संपदा अधिकारी मुकेश कुमार सहित कुल 9 लोगों को आरोपी बनाया गया है.
मामले में दिलचस्प मोड़ तब आया जब पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने डी. सुरेश को अंतरिम राहत देते हुए आदेश दिया कि हिरासत में लेने से पहले उन्हें कम से कम 7 दिन का नोटिस देना अनिवार्य होगा. अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को मुकर्रर है.
गौरतलब है कि डी. सुरेश हाल ही में आईपीएस वाई पूरन कुमार के बहुचर्चित सुसाइड केस में खुलकर सामने आए थे और तत्कालीन डीजीपी सहित 15 अफसरों पर सवाल उठाते हुए पीड़ित परिवार के हक में आवाज बुलंद की थी. ऐसे में उनके रिटायरमेंट की दहलीज पर हुई इस तेज कानूनी कार्रवाई और डीएसपी स्तर की जांच से पूरे महकमे में जबरदस्त खलबली मची हुई है.