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कूड़ा वहीं पड़ा, AI फोटो भेज बोलते- साफ हो गया... गुरुग्राम नगर निगम के चार 'स्मार्ट' कर्मचारी बर्खास्त

गुरुग्राम नगर निगम ने तकनीक का गलत इस्तेमाल कर अधिकारियों को गुमराह करने वाले चार संविदा कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया. एक कर्मचारी ने AI से फर्जी तस्वीरें बनाकर शिकायतों के निस्तारण का दावा किया, जबकि दूसरे ने GPS स्पूफिंग के जरिए झज्जर में बैठकर गुरुग्राम में हाजिरी लगाई. निगम ने कहा कि डिजिटल निगरानी और फिजिकल वेरिफिकेशन से पूरा फर्जीवाड़ा पकड़ में आया.

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नगर निगम की स्मार्ट निगरानी से पकड़े गए 4 कर्मचारी. (Photo: Screengrab)
नगर निगम की स्मार्ट निगरानी से पकड़े गए 4 कर्मचारी. (Photo: Screengrab)

सरकारी कामकाज में तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है, लेकिन अब तकनीक का गलत इस्तेमाल भी सामने आने लगा है. गुरुग्राम नगर निगम ने ऐसे ही चार संविदा कर्मचारियों का पर्दाफाश किया है, जिन्होंने अपने काम को आसान बनाने और अधिकारियों को गलत जानकारी देने के लिए AI और GPS जैसी तकनीकों का सहारा लिया. हालांकि उनकी यह चाल ज्यादा दिन नहीं चल सकी. नगर निगम की डिजिटल निगरानी व्यवस्था ने पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा कर दिया. जांच के बाद चारों कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया.

नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने बताया कि पकड़े गए कर्मचारियों ने अलग-अलग तरीकों से सरकारी सिस्टम को गुमराह करने की कोशिश की. सबसे चौंकाने वाला मामला स्वच्छता विभाग के कर्मचारी वसीम का सामने आया. आरोप है कि उसे कचरा उठाने और सफाई से जुड़ी शिकायतों का समाधान करना था, लेकिन मौके पर जाने के बजाय उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल किया. उसने AI की मदद से फर्जी तस्वीरें तैयार कीं और उन्हें आधिकारिक पोर्टल पर इस तरह अपलोड कर दिया, जैसे शिकायत का समाधान हो चुका हो. इन तस्वीरों के आधार पर अधिकारियों को काम पूरा होने की जानकारी भेजी गई.

AI से बनाया 'काम पूरा' का फर्जी सबूत
AI से बनाया 'काम पूरा' का फर्जी सबूत

जांच के दौरान नगर निगम की डिजिटल निगरानी व्यवस्था ने इस गड़बड़ी को पकड़ लिया. इसके बाद पूरे मामले की जांच की गई और यह सामने आया कि शिकायत का वास्तविक निस्तारण नहीं हुआ था. दूसरा मामला GPS स्पूफिंग से जुड़ा है. नगर निगम के अनुसार झज्जर निवासी संविदा कर्मचारी सोनू ने GPS स्पूफिंग तकनीक का इस्तेमाल किया. आरोप है कि वह गुरुग्राम में ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहता था, बल्कि झज्जर में बैठकर ही अपनी लोकेशन बदलकर गुरुग्राम में उपस्थिति दर्ज करा देता था. इस तरह वह बिना मौके पर पहुंचे ही अपनी हाजिरी लगा रहा था. डिजिटल सिस्टम ने इस गड़बड़ी को भी पकड़ लिया.

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नगर निगम की स्मार्ट निगरानी में खुला खेल

केवल तकनीक के गलत इस्तेमाल का मामला ही सामने नहीं आया. नगर निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स विभाग के दो अन्य संविदा कर्मचारियों नीरज वशिष्ठ और अंकुर अरोड़ा पर भी कार्रवाई की. दोनों पर आरोप है कि उन्होंने प्रॉपर्टी आईडी से जुड़े मामलों में अनावश्यक आपत्तियां दर्ज कीं और निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी का पालन नहीं किया. जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने के बाद दोनों को भी सेवा से हटा दिया गया.

नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने कहा कि निगम के सॉफ्टवेयर इस तरह तैयार किए गए हैं कि तकनीक के गलत इस्तेमाल की पहचान आसानी से हो जाती है. उन्होंने बताया कि सिर्फ डिजिटल रिपोर्ट के आधार पर काम पूरा मान लेने की व्यवस्था नहीं है. नगर निगम की टीमें समय-समय पर मौके पर जाकर फिजिकल वेरिफिकेशन भी करती हैं. इसी प्रक्रिया के दौरान इन मामलों की सच्चाई सामने आई.

चार कर्मचारियों पर गिरी बर्खास्तगी की गाज

नगर निगम का कहना है कि तकनीक का उद्देश्य काम को आसान, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है. यदि कोई कर्मचारी तकनीक का गलत इस्तेमाल कर सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करने या अधिकारियों को गलत जानकारी देने की कोशिश करता है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा. इस कार्रवाई के बाद नगर निगम के कर्मचारियों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है. AI और GPS जैसी आधुनिक तकनीकों का गलत इस्तेमाल कर सरकारी व्यवस्था को धोखा देने की कोशिश आखिरकार डिजिटल निगरानी के सामने टिक नहीं सकी. नगर निगम का मानना है कि यह कार्रवाई सभी कर्मचारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि तकनीक सुविधा देने के लिए है, उसका दुरुपयोग करने पर नौकरी तक गंवानी पड़ सकती है.

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