scorecardresearch
 

'राहुल गांधी के पास मेरा परमानेंट इस्तीफा...', DUSU हार के बाद हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष का बयान

DUSU चुनाव में NSUI की हार के बाद कांग्रेस के भीतर उठ रहे सवालों के बीच जितेंद्र भारद्वाज ने अपने पद को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा राहुल गांधी के पास है और संगठन किसी एक व्यक्ति की बपौती नहीं है.

Advertisement
X
जितेंद्र भारद्वाज ने दिल्ली विश्वविद्यालय चुनाव पर उठाए सवाल. (Photo: ITG)
जितेंद्र भारद्वाज ने दिल्ली विश्वविद्यालय चुनाव पर उठाए सवाल. (Photo: ITG)

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव में NSUI की हार के बाद कांग्रेस के भीतर सवाल उठ रहे हैं. इसी बीच हरियाणा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जितेंद्र भारद्वाज का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि 'मुख्यमंत्री और प्रधान आते-जाते रहेंगे, मेरा इस्तीफा राहुल गांधी के पास परमानेंट है'. भारद्वाज ने यह भी कहा कि किसी की चिट्ठी से उन्हें न बनाया जा सकता है, न हटाया जा सकता है.

DUSU के चार केंद्रीय पदों में NSUI को एक भी सीट नहीं मिली. ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद जीते, जबकि उपाध्यक्ष पद निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन के खाते में गया. इसी नतीजे के बाद पार्टी की छात्र इकाई की रणनीति, उम्मीदवारों के चयन और संगठन के कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

'किसी की चिट्ठी से न बना हूं, न हटूंगा'

जितेंद्र भारद्वाज ने अपने खिलाफ पद से हटाने के लिए चिट्ठियां लिखे जाने की चर्चा पर साफ कहा कि वह किसी की सिफारिश से कार्यकारी अध्यक्ष नहीं बने हैं. उनके मुताबिक, यह जिम्मेदारी उन्हें राहुल गांधी ने दी थी. इसी वजह से उनका इस्तीफा भी राहुल गांधी के पास ही रहेगा. बयान में उन्होंने संगठन के भीतर परिवारवाद और निजी हितों को लेकर भी निशाना साधा. उनका कहना था कि पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन संगठन के लिए काम करने वाला कार्यकर्ता बना रहता है. उन्होंने खुद को सड़क की तरह लगातार काम करने वाला कार्यकर्ता बताते हुए संगठन को आगे बढ़ाने की बात कही.

Advertisement

DUSU में उम्मीदवार चयन पर भी मानी कमी

DUSU चुनाव के नतीजों पर बात करते हुए भारद्वाज ने उम्मीदवारों के चयन को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने माना कि अगर मजबूत और योग्य चेहरों को आगे किया जाता तो नतीजे अलग हो सकते थे. यानी हार के लिए सिर्फ बाहर की वजहों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय पार्टी के भीतर भी सोचने की जरूरत है. उन्होंने भाजपा पर चुनावी गड़बड़ियों के आरोप लगाए, लेकिन साथ ही अपनी पार्टी को आत्ममंथन की सलाह भी दी.

'संगठन किसी की बपौती नहीं'

भारद्वाज का बयान ऐसे समय आया है, जब DUSU नतीजों के बाद कांग्रेस की छात्र राजनीति पर चर्चा तेज है. NSUI इस बार चारों केंद्रीय पदों में खाली हाथ रही. दूसरी तरफ एक पूर्व NSUI उम्मीदवार निर्दलीय उतरकर उपाध्यक्ष पद जीत गया. ऐसे में भारद्वाज ने अपने बयान के जरिए दो बातें साफ करने की कोशिश की. पहली, वह अपने पद को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं. दूसरी, संगठन में फैसले किसी एक व्यक्ति की मर्जी से नहीं चलने चाहिए.

उनका कहना था कि मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष या दूसरे पदों पर बैठे लोग बदलते रहेंगे, लेकिन संगठन के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता की भूमिका बनी रहती है. DUSU की हार के बाद आया यह बयान अब हरियाणा कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान के बीच चर्चा में है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement