गुजरात के सूरत शहर में साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां एक शातिर ठग ने खुद को सरकारी साइबर फॉरेंसिक विभाग का अधिकारी और ‘फॉरेंसिक साइबर क्राइम स्पेशलिस्ट’ बताकर एक पेट्रोकेमिकल व्यापारी और उसके परिचितों को करोड़ों रुपये का फंड दिलाने का झांसा दिया. आरोपी ने फर्जी सरकारी पहचान पत्र, भारत के राजचिह्न और ‘सत्यमेव जयते’ वाला कार्ड, सरकारी बोर्ड लगी कार और लैपटॉप पर करोड़ों रुपये का बैलेंस दिखाकर पीड़ितों का विश्वास जीता. इसके बाद IP सर्वर, फॉरेंसिक टेस्टिंग, क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजेक्शन और बिटकॉइन रिकवरी के नाम पर करीब 11 महीने तक अलग-अलग बहाने बनाकर कुल 1 करोड़ 29 लाख 25 हजार 100 रुपये वसूल लिए.
इस रकम में से केवल 4 लाख 70 हजार रुपये वापस किए गए, जबकि 1 करोड़ 24 लाख 53 हजार 900 रुपये की राशि अभी भी पीड़ित को वापस मिलना बाकी है. सूरत शहर साइबर क्राइम सेल ने मामले का पर्दाफाश करते हुए मुख्य आरोपी प्रियंक समीरभाई व्यास को मुंबई के मीरा रोड स्थित विनायक धाम अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया है. वहीं, इस पूरे मामले में पीड़ित की पहचान आरोपी से करवाने वाले सूरत के चार्टर्ड अकाउंटेंट रोहन केलावाला की तलाश जारी है.
साइबर क्राइम सेल के मुताबिक, नवंबर 2025 में शिकायतकर्ता बैंक और लोन से संबंधित काम के सिलसिले में सूरत के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से मिला था. इस दौरान चार्टर्ड अकाउंटेंट ने उसे बताया कि वह फॉरेंसिक ट्रेडिंग में लोगों के पैसे निवेश करवाकर अच्छा मुनाफा दिलाता है. उसने यह भी बताया कि उसके संपर्क में प्रियंक समीरभाई व्यास नाम का व्यक्ति है, जो साइबर फॉरेंसिक विभाग का प्रमुख और क्रिप्टोकरेंसी का विशेषज्ञ है. इसके बाद चार्टर्ड अकाउंटेंट ने मुंबई के एक होटल में शिकायतकर्ता की मुलाकात प्रियंक व्यास से करवाई.
लोगों को ऐसे भरोसे में लेता था आरोपी
आरोपी ने खुद को‘डॉ. प्रियंक समीरभाई व्यास – फोरेंसिक साइबर क्राइम विशेषज्ञ, साइबर फोरेंसिक विभाग, मुंबई’ बताया. उसने शिकायतकर्ता को भारत के राजचिह्न और ‘सत्यमेव जयते’ वाला फर्जी पहचान पत्र भी दिखाया. इतना ही नहीं, आरोपी अपनी कार पर सरकारी बोर्ड लगा होने की बात कहकर खुद को सरकारी अधिकारी होने का आभास कराता था. आरोपी ने सरकारी विभाग जैसी दिखने वाली ई-मेल आईडी ‘fslmumbai’ और ‘fslcyberforensic’ नाम की UPI आईडी का भी इस्तेमाल किया, ताकि शिकायतकर्ता को उसकी बातों पर पूरा विश्वास हो जाए.
आरोपी ने शिकायतकर्ता को बताया कि उसके द्वारा तैयार किए गए एक टर्मिनल का IP खरीदने और उसे रिन्यू करवाने के लिए 18 लाख रुपये की जरूरत है. उसने दावा किया कि यदि शिकायतकर्ता 18 लाख रुपये देता है तो 60 दिनों के भीतर उसे 30 लाख रुपये वापस मिल जाएंगे. इसके साथ ही आरोपी ने अपने कारोबार में 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी देने का लालच भी दिया. आरोपी की बातों में आकर 21 जनवरी 2026 को शिकायतकर्ता ने चार्टर्ड अकाउंटेंट के कार्यालय में 18 लाख रुपये नकद भिजवा दिए.
इसके बाद BOTIM एप के ‘Work’ ग्रुप के जरिए आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच बातचीत शुरू हुई. इसमें IP खरीदने, सॉफ्टवेयर अपडेट, क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजेक्शन और प्री-अथॉराइज्ड कार्ड जैसी तकनीकी बातें की जाती थीं. आरोपी ने विश्वास जीतने के लिए USDT ट्रांजेक्शन के स्क्रीनशॉट और विदेशी बैंकों के VISA कार्ड की तस्वीरें भी भेजीं. फरवरी 2026 से अक्टूबर 2026 तक आरोपी ने ठगी का सिलसिला जारी रखा. हर बार वह शिकायतकर्ता को बड़ी रकम मिलने का भरोसा देता और फिर तकनीकी समस्या का बहाना बनाकर नई रकम की मांग करता था.
कभी आरोपी ने 15 करोड़ रुपये का सर्वर फंड मिलने की बात कही, तो कभी अर्जेंटीना के 153 करोड़ रुपये के फंड का दावा किया. इसके अलावा 53 लाख अमेरिकी डॉलर के कार्ड से रकम निकालने और नासिक के एक व्यक्ति के वॉलेट से बिटकॉइन रिकवर करवाने की बात भी कही गई. इन सभी बहानों के जरिए आरोपी ने गैस फीस, ट्रांजेक्शन फीस, निकासी शुल्क, प्रक्रिया शुल्क और उधार के नाम पर नकद, बैंक ट्रांसफर, Google Pay, आंगड़िया और USDT के माध्यम से कुल 1,29,25,100 रुपये वसूल किए.
शिकायतकर्ता को विश्वास में बनाए रखने के लिए आरोपी ने बीच-बीच में 1 लाख, 15 हजार, 5 हजार और 3.50 लाख रुपये जैसी छोटी रकम वापस भी की. इस तरह कुल 4.70 लाख रुपये लौटाकर उसने पीड़ित का भरोसा बनाए रखा, जबकि बाकी रकम वापस नहीं की. इस ठगी का सबसे शातिर तरीका यह था कि आरोपी अपने लैपटॉप पर करोड़ों रुपये का बैलेंस दिखाता था. वह पहले ‘Transaction Success’ का स्क्रीनशॉट भेजता और बाद में उसी ट्रांजेक्शन को ‘Transaction Failed’ बताकर नई समस्या खड़ी कर देता था. इसके बाद वह अलग-अलग तकनीकी बहाने बनाता था, जैसे UTR के पीछे IP ट्रेस होने के कारण बैंक ट्रांजेक्शन फेल हो रहा है, Ethereum का सर्वर डाउन है या बड़े ट्रांजेक्शन के कारण 83,768 ETH लॉक हो गए हैं.
इतना ही नहीं, आरोपी ने वॉलेट ऑडिट में 17 तकनीकी त्रुटियां होने की बात कही, जिनमें 15 येलो और 2 रेड एरर बताए. इन समस्याओं को दूर करने के नाम पर वह बार-बार नई रकम मांगता था. मुंबई के होटलों में शिकायतकर्ता और उसके दोस्तों को बुलाकर आरोपी लैपटॉप पर 1.96 BTC ट्रांसफर का लाइव डेमो भी दिखाता था.
जब शिकायतकर्ता को ठगी का संदेह हुआ और प्राथमिक जांच में आरोपी की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं, तब सूरत शहर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में 30 अक्टूबर 2026 को FIR दर्ज की गई. इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 318(4), 204, 205, 336(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2), 3(5) तथा सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम 2008 की धारा 66(D) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई.
इस मामले में सूरत निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट रोहन केलावाला को भी आरोपी बनाया गया है. उसकी उम्र 35 वर्ष बताई गई है और उसका कार्यालय पाल पॉइंट स्थित माइलस्टोन मेट्रोपोलिस में है. पुलिस के अनुसार, रोहन ने ही शिकायतकर्ता की मुलाकात प्रियंक व्यास से करवाई थी. बैंक और लोन के काम से पहुंचे ग्राहक को उसने फॉरेंसिक ट्रेडिंग में निवेश कर मुनाफा दिलाने का लालच दिया था. उसने 30 दिनों में मुनाफे के साथ रकम वापस दिलाने की जिम्मेदारी लेने का भरोसा भी दिया थाशिकायतकर्ता से शुरुआती 18 लाख रुपये नकद भी उसके कार्यालय में ही लिए गए थे.
ठगी के रुपयों से बना ली थी कई प्रॉपर्टी
पुलिस जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. पुलिस के मुताबिक, प्रियंक व्यास और रोहन केलावाला पहले www.globalswiftpay.com नाम के प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग करते थे. वहां उन्हें बड़ी मात्रा में अमेरिकी डॉलर का बैलेंस दिखाई देता था, लेकिन वह रकम प्लेटफॉर्म के भीतर ही रहती थी और उसे कभी निकाला नहीं जा सकता था. इसी अनुभव के आधार पर दोनों को फर्जी बैलेंस दिखाकर लोगों से अलग-अलग फीस वसूलने का विचार आया. इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर इसी तरीके से लोगों को ठगने की योजना बनाई.
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने मुंबई में करीब 1.50 करोड़ रुपये की संपत्ति खरीदी. BMW कंपनी की लग्जरी कार खरीदी. मुंबई में एक अन्य फ्लैट बुक करवाया और उसके लिए करीब 80 लाख रुपये टोकन मनी के रूप में जमा किए. एक तरफ पीड़ितों को यह कहकर लगातार पैसे देने के लिए मजबूर किया जा रहा था कि बस आखिरी बार फीस जमा करने पर पूरी रकम वापस मिल जाएगी, वहीं दूसरी तरफ आरोपी उसी पैसे से मुंबई में महंगी संपत्ति और लग्जरी गाड़ियां खरीद रहा था.
पुलिस इन संपत्तियों और वाहनों से संबंधित दस्तावेज जुटा रही है, ताकि अपराध से प्राप्त रकम से खरीदी गई संपत्ति साबित होने पर कानूनी रूप से जब्ती की कार्रवाई की जा सके.आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके पास से विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, दस्तावेज और वाहन जब्त किए हैं. 2 मोबाइल फोन कीमत करीब 2 लाख रुपए,2 लैपटॉप कीमत 2 लाख रुपए,हार्ड डिस्क 2,पेन ड्राइव 2,क्रिप्टो वॉलेट कार्ड 3 15 हजार,हगर चिप 1,साइबर फॉरेंसिक विभाग का फर्जी पहचान पत्र 1,क्राइम ग्रीवेंस एंड इंटेलिजेंस काउंसिल कार्ड 1,बैंक चेकबुक 2,बैंक पासबुक 2,मीरा रोड स्थित फ्लैट के दस्तावेज 1 सेट,BMW कार 1 कीमत 3 लाख रुपए, होंडा सिटी कार 1 कीमत 2.50 लाख रुपए सहित कुल 9.65 लाख रुपए का मुद्दामाल सीज किया गया है.