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12 लाख का पानी, 20 लाख का लंच... 3 दिन के डिमोलिशन ड्राइव पर अधिकारियों का ₹46 लाख का 'खर्चापानी'

गुजरात के राजकोट में मेगा डिमोलिशन अभियान के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों के चाय-नाश्ते व खाने पर लाखों रुपये खर्च होने का मामला विवादों में आ गया है. स्टैंडिंग कमेटी ने बिल पर रोक लगाकर अधिकारियों से जवाब मांगा है, जबकि कांग्रेस ने इसे जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी और भ्रष्टाचार करार देते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.

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नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि अभियान में हजारों कर्मचारी लगातार कई दिनों तक ड्यूटी पर तैनात रहे. (Photo- ITG)
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि अभियान में हजारों कर्मचारी लगातार कई दिनों तक ड्यूटी पर तैनात रहे. (Photo- ITG)

गुजरात के राजकोट में नगर निगम के मेगा डिमोलिशन अभियान के बाद अब एक नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. जंगलेश्वर इलाके में अवैध निर्माणों को ढहाने के बाद जहां अधिकारियों ने खूब वाहवाही बटोरी थी, वहीं अब इस कार्रवाई के दौरान हुए चाय, नाश्ते और खाने-पीने के भारी-भरकम बिल ने नगर निगम के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है.

कारण, अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के लिए दो से तीन दिनों के भीतर सिर्फ चाय-नाश्ते और लंच पर ₹27.20 लाख का खर्च दिखाया गया है, जिस पर नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी ने रोक लगा दी है. इसके साथ ही कमेटी ने इस खर्च के बिल को लेकर अधिकारियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है.

दरअसल, यह मेगा डिमोलिशन अभियान फरवरी में राजकोट के पूर्वी जोन के वार्ड नंबर-16 स्थित जंगलेश्वर इलाके में चलाया गया था. आजी नदी के किनारे और टीपी रोड पर हुए अतिक्रमण हटाने के लिए नगर निगम ने बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए करीब 1,400 अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया था. अभियान में नगर निगम, पुलिस और अन्य सरकारी विभागों के 4,800 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी तैनात थे.

चाय, नाश्ता और लंच पर लाखों का खर्च

नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार अभियान के दौरान कर्मचारियों के लिए चाय, कॉफी, नाश्ता और भोजन की व्यवस्था की गई थी. खर्च का विवरण इस प्रकार है
-21,310 कप चाय-बिस्कुट
-50 प्लेट गांठिया-जलेबी
-पोहा
-360 प्लेट नाश्ता
-लंच

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इन सभी पर 6,30,946 रुपये खर्च हुए.

इसके अलावा 21 से 27 फरवरी के बीच 13,390 स्पेशल लंच पैकेट, मसाला छाछ और 4,000 नींबू-अदरक शरबत की बोतलें मंगाई गईं. इन पर 20,68,500 रुपये खर्च किए गए. दोनों खर्चों को मिलाकर कुल 27,20,946 रुपये का बिल तैयार किया गया.

भोजन के 27.20 लाख रुपये के बिल के अलावा अब अन्य खर्च भी चर्चा में हैं. जानकारी के अनुसार मिनरल वॉटर पर 12,40,028 रुपये, मंडप सर्विस पर 6,70,678 रुपये का खर्च भी सामने आया है. इन दोनों खर्चों को जोड़ने पर मेगा डिमोलिशन अभियान का कुल खर्च करीब 46.31 लाख रुपये तक पहुंच जाता है.

स्टैंडिंग कमेटी ने रोका बिल

यह प्रस्ताव जब स्टैंडिंग कमेटी के सामने मंजूरी के लिए रखा गया तो सदस्यों ने इतने बड़े खर्च पर सवाल उठा दिए. कमेटी का कहना है कि तोड़फोड़ जैसी कार्रवाई के दौरान चाय-नाश्ते और भोजन पर इतना बड़ा खर्च कैसे हो सकता है. इसी वजह से बिल पर फिलहाल रोक लगा दी गई है और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है.

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि अभियान बेहद संवेदनशील था और हजारों अधिकारी, पुलिसकर्मी तथा मजदूर लगातार मौके पर मौजूद थे. काम बाधित न हो, इसलिए सभी के लिए भोजन और चाय-नाश्ते की व्यवस्था करनी पड़ी.

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कांग्रेस ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

कांग्रेस ने पूरे मामले को भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाए हैं. कांग्रेस के राजकोट जिलाध्यक्ष राजदीपसिंह जाडेजा ने कहा कि यह बेहद दुखद और शर्मनाक है. एक तरफ गरीबों के आशियाने तोड़े जा रहे थे, लोग रो रहे थे और दूसरी तरफ अधिकारी जनता के टैक्स के पैसे पर तरह-तरह के व्यंजनों और जलेबी-गांठिया का आनंद ले रहे थे. इस पूरे मामले में साफ तौर पर भ्रष्टाचार हुआ है. जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

सबसे ज्यादा सवाल मिनरल वॉटर के खर्च को लेकर उठ रहे हैं. यदि एक 200 एमएल पानी की बोतल औसतन 5 रुपये की मानी जाए, तो 12.40 लाख रुपये में करीब 2.40 लाख बोतलें खरीदी जा सकती थीं. इसे लेकर भी विपक्ष और स्थानीय लोगों ने खर्च की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं.

नगर निगम का पक्ष

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि अभियान में हजारों कर्मचारी लगातार कई दिनों तक ड्यूटी पर तैनात रहे. ऐसे में भोजन, चाय, नाश्ता और पेयजल की व्यवस्था करना प्रशासनिक आवश्यकता थी ताकि किसी कर्मचारी को कार्यस्थल छोड़कर बाहर न जाना पड़े. हालांकि अब पूरे खर्च की जांच और स्पष्टीकरण के बाद ही बिल को मंजूरी दिए जाने पर फैसला होगा.

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