गुजरात के भावनगर में नकली विदेशी शराब बनाने वाली एक और अवैध यूनिट का भंडाफोड़ हुआ है. लोकल क्राइम ब्रांच (LCB) को सूचना मिली थी कि शहर की रेलवे कॉलोनी स्थित एक कर्मचारी क्वार्टर में नकली 'रॉयल स्टैग' की छोटी बोतलें तैयार की जा रही हैं. इसके बाद टीम ने मौके पर छापा मारकर तीन लोगों को गिरफ्तार किया. कार्रवाई के दौरान शराब की बोतलें, लेबल, पैकेजिंग का सामान, मशीनरी और कच्चा माल बरामद किया गया.
दरअसल, यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब भावनगर में हाल ही में हुई जहरीली शराब की त्रासदी को एक महीना भी नहीं बीता है. उस घटना में मेथनॉल मिली अवैध शराब पीने से 14 लोगों की मौत हुई थी. मामले में एक पुलिस कॉन्स्टेबल समेत 40 आरोपियों को जेल भेजा गया था. इसके बावजूद शराब तस्करों के बेखौफ होने का मामला सामने आया है.
इस मामले में बोरतालाव पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज की गई है. पुलिस के मुताबिक, छापेमारी के दौरान तीन आरोपियों को पकड़ा गया, जबकि अपराध से जुड़े सात अन्य लोगों की पहचान हुई है. ये सभी फिलहाल फरार हैं और पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है.
रेलवे कर्मचारी निकला मुख्य आरोपी
मामले का मुख्य आरोपी अक्षयराज गोडिल भावनगर में रेलवे कर्मचारी है. पुलिस जांच के मुताबिक, उसके जीजा और मोरबी निवासी रामदेवसिंह झाला ने उसे एक ऐसे व्यक्ति के बारे में जानकारी दी थी, जो नकली शराब बनाने का काम करता था. इसके बाद राजस्थान के अजीतसिंह उर्फ बन्ना राठौड़ ने जरूरी उपकरण और सामग्री पार्सल के जरिए भावनगर भेजी.
पुलिस के अनुसार, राजस्थान का ही सूर्यप्रतापसिंह राठौड़ अवैध शराब तैयार करने के लिए भावनगर आया था. पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी विजय उर्फ मयंक मकवाना की भूमिका भी सामने आई. उस पर तैयार माल को बिक्री के लिए शक्तिसिंह रायजादा, भावेश सोलंकी और शरद लिंबा चावड़ा तक पहुंचाने का आरोप है.
शक्तिसिंह खांतडी गांव का शराब तस्कर बताया गया है, जबकि भावेश सोलंकी मंत्रेश कॉम्प्लेक्स के पास रहता है और शरद लिंबा चावड़ा चित्रा इलाके का निवासी है. पुलिस के मुताबिक, जितेंद्र खावड़िया फैक्ट्री का कामकाज संभालता था. उसकी जिम्मेदारी अंग्रेजी शैली की शराब तैयार कराने के साथ उपकरण और कच्चे माल का प्रबंधन करना भी था.
17 बोतलें और मशीनरी बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस को सीग्राम्स क्वालिटी रॉयल स्टैग बैरल सेलेक्ट प्रीमियम व्हिस्की की 180 एमएल की सील-पैक नकली शराब से भरी 17 बोतलें मिलीं. इसके अलावा सीग्राम्स इंपीरियल ब्लू रिजर्व ग्रेन व्हिस्की के 231 स्टिकर और बोतल के ढक्कनों के लिए 151 सील स्टिकर बरामद किए गए.
टीम ने 50 लीटर क्षमता वाले दो खाली जेरीकेन, बोतल के ढक्कन, 'AMIRI' मार्क वाली लोहे की सीलिंग मशीन और ढक्कन लगाने वाली प्रेशर मशीन भी जब्त की. अलग-अलग ब्रांड के पांच मोबाइल फोन भी पुलिस के हाथ लगे. बरामद किए गए पूरे सामान की कुल कीमत 1 लाख 940 रुपये बताई गई है.
पुलिस ने इस मामले में राजस्थान, मोरबी और भावनगर शहर व जिले से जुड़े कुल 10 लोगों को आरोपी बनाया है. इनमें रेलवे कर्मचारी अक्षयराज गोडिल, विजय उर्फ मयंक मकवाना और जितेंद्र खावड़िया को गिरफ्तार किया गया है. वहीं रामदेवसिंह झाला, शक्तिसिंह रायजादा, अर्जुनसिंह सोढ़ा, सूर्यप्रतापसिंह राठौड़, अजीतसिंह उर्फ बन्ना राठौड़, भावेश सोलंकी और शरद चावड़ा फरार हैं.
सात आरोपियों की तलाश में पुलिस
LCB टीम ने रेलवे कर्मचारी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार करने के बाद पूरे नेटवर्क की जांच तेज कर दी है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नकली शराब तैयार करने के लिए सामान कहां से मंगाया जाता था, तैयार बोतलों की सप्लाई किन जगहों पर होती थी और इस गिरोह से और कौन लोग जुड़े हैं.
पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है. जांच में सामने आए नामों और भूमिकाओं के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है. जहरीली शराब से 14 लोगों की मौत वाली पिछली घटना के बावजूद ऐसी यूनिट का सामने आना पुलिस की सतर्कता और शराब तस्करी पर कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े करता है.
फिलहाल LCB नकली शराब के इस रैकेट की आगे की कड़ियां जोड़ने में जुटी है. पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और जब्त सामान की जांच के आधार पर फरार लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है. मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना है.