छत्तीसगढ़ पुलिस ने एक अंतर-राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है. यह गिरोह कई राज्यों में लोगों को केमिकल का इस्तेमाल करके काले और खराब नोटों को नए नोटों में बदलने और रकम को दोगुना करने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करता था. एक एजेंसी के मुताबिक पुलिस ने महाराष्ट्र से 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
2025 से कर रहे थे ठगी
अधिकारी ने बताया कि नागपुर में पहले गिरफ्तार की गई दो महिला सहयोगियों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने इस हफ्ते की शुरुआत में पुणे जिले के खंडाला में एक रिसॉर्ट पर छापा मारा. वहां आरोपी वाराणसी के एक निवासी को ठगने की कोशिश करते हुए रंगे हाथों पकड़े गए. वह व्यक्ति अपनी रकम को दोगुना करवाने के लिए करोड़ों रुपये लेकर आया था. पुलिस ने गिरोह के पास से 4 करोड़ रुपये से ज़्यादा नकद, 17 मोबाइल फोन, नोट के आकार में कटे हुए काले कागज, कांच की प्लेटें और अन्य सामान बरामद किया.
इस गिरोह ने 2005 से छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और दिल्ली में 100 से ज़्यादा लोगों को ठगा था. अधिकारी ने बताया कि आरोपी लोगों को यह कहकर ठगते थे कि वे केमिकल का इस्तेमाल करके काले और खराब नोटों को नए नोटों में बदल सकते हैं और इस प्रक्रिया में उनके पैसे को दोगुना भी कर सकते हैं. तेलीबांधा पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) और 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया गया.
पुलिस ने ऐसे किया गैंग का पर्दाफाश
अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने पहले नागपुर में एक मामले के सिलसिले में कनीज़ फातिमा उर्फ़ भावना पांडे (24) और दीपिका पालीवाल (24) को गिरफ्तार किया था. डिजिटल सबूतों और उन दोनों से मिली जानकारी का इस्तेमाल करके पुलिस ने गिरोह का पता पुणे में लगाया. उन्होंने बताया कि पुलिस की एक टीम लगभग एक हफ़्ते तक पुणे में रही और संदिग्धों का पता खंडाला के एक रिसॉर्ट में लगाया.
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ़ योगी (46), प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ़ कैप्टन, शेट्टी या रेड्डी (52), मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ़ बड़े सर (55), विवेक सिंह (48), शुभम पांडे (37), योगेंद्र चौहान (48) और बालमुकुंद दीक्षित (40) - को ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया गया. पुलिस के अनुसार ज्ञान प्रकाश, प्रवीण कुमार और मनोज कुमार श्रीवास्तव इस गिरोह के कथित सरगना हैं.
मामले में 9 की हुई गिरफ्तारी
बताया जाता है कि प्रवीण कुमार "कैप्टन" नाम से काम करता था, जबकि मनोज कुमार को "बड़े सर" के नाम से जाना जाता था. आरोपी होटलों और दूसरी जगहों पर मीटिंग करते थे और असली नोटों व केमिकल का इस्तेमाल करके लोगों को यकीन दिलाते थे कि काले पड़ चुके और खराब नोटों को नए नोटों में बदला जा सकता है. पुलिस ने बताया कि लोगों का भरोसा जीतने के बाद, आरोपी केमिकल मंगाने, टेस्ट करने, सरकारी मंज़ूरी लेने और दूसरी औपचारिकताएं पूरी करने के बहाने किश्तों में पैसे इकट्ठा करते थे.
जांच करने वालों ने बताया कि गैंग के कुछ सदस्य पहले भी मुंबई और वाराणसी में जेल जा चुके हैं. अधिकारी ने बताया कि अब तक कुल 9 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है और गैंग के बाकी सदस्यों का पता लगाने की कोशिशें जारी हैं.