तमिलनाडु की अन्ना यूनिवर्सिटी में 20 साल के छात्र की स्क्रब टाइफस से मौत हो गई. इस छात्र को करीब चार दिन से तेज बुखार था. इतने दिन बुखार में रहने के बाद उसको हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया. अस्पताल में भर्ती होने से पहले ही छात्र की हालत काफी बिगड़ गई थी. डॉक्टरों के मुताबिक अस्पताल पहुंचने पर उसे अल्टर्ड सेंसरियम की समस्या थी, यानी वह भ्रम में थी, ठीक से बोल नहीं पा रहा था. सांस लेने में भी परेशानी थी. ऐसे में डेंगू का टेस्ट किया गया. डेंगू की रिपोर्ट निगेटिव मिली. ऐसा लगा की कोई गंभीर इंफेक्शन नहीं है, लेकिन इसके बाद स्क्रब टाइफस की जांच की गई जो पॉजिटिव आई. बाद में इस संक्रमण के कारण छात्र की मौत हो गई.
डॉक्टरों के मुताबिक, तेज बुखार को कई लोग मौसम बदलने या सामान्य वायरल इंफेक्शन से जोड़कर देखते हैं. कुछ मामलों में इसको सीजनल फ्लू भी मान लेते हैं और घर पर ही दवा खाते रहते हैं, लेकिन ऐसा करने सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है. अगर बुखार लगातार बना रहे और मरीज की हालत में सुधार न हो, तो ऐसे मामलों में तुरंत अस्पताल जाना चाहिए. इस मामले में लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है.
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क्या है स्क्रब टाइफस?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, स्क्रब टाइफस एक ऐसा इंफेक्शन है जो Orientia tsutsugamushi नाम के बैक्टीरिया से होता है. यह संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित चिगर माइट जो एक प्रकार का कीड़ा होता है उसके काटने से फैलता है. ये कीड़ा घास और झाडियों में होता है. इससे काटने के बाद कुछ लक्षण दिखते हैं जिसकी शुरुआत तेज बुखार से होती है.
कैसे होते हैं लक्षण
अचानक बुखार
सिरदर्द
शरीर में दर्द
कमजोरी
स्किन पर दाने निकलना
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कब गंभीर हो सकती है बीमारी?
समय पर पहचान और इलाज होने पर स्क्रब टाइफस का इलाज संभव है, लेकिन इलाज में देरी होने पर कुछ मरीजों में फेफड़े, किडनी, लीवर, दिमाग या हृदय जैसे अंग प्रभावित हो सकते हैं। गंभीर मामलों में सांस लेने में परेशानी, भ्रम या बेहोशी, लो ब्लड प्रेशर और मल्टी-ऑर्गन डिसफंक्शन जैसी जटिलताएं हो सकती हैं. इसलिए तेज बुखार के साथ अगर मरीज की हालत लगातार बिगड़ रही हो, बहुत ज्यादा उनींदापन या भ्रम हो, सांस लेने में परेशानी हो या पेशाब कम हो रहा हो, तो तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है.