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डॉक्टरों ने पिछले एक साल में यह बीमारी सबसे ज्यादा देखी, जानें क्यों बढ़ रही, किसको है खतरा

पिछले एक साल में भारत में नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर बीमारी के मरीजों की संख्या में तेज़ी आई है, खासकर 25 से 40 वर्ष के युवाओं में ज्यादा केस आ रहे हैं. यह बीमारी शराब न पीने वालों में भी फैली है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज और हार्ट की बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है.

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फैटी लिवर की बीमारी
फैटी लिवर की बीमारी

पिछले एक साल में डॉक्टरों ने जिस बीमारी के मामले सबसे ज्यादा देखे हैं वह नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर की बीमारी है. इसमें लिवर पर जरूरत से अधिक फैट जमा हो जाता है. नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर का मतलब है कि शराब न पीने वालों के लिवर पर भी जरूरत से ज्यादा  फैट जम रहा है. डॉक्टर बताते हैं कि अगर इस बीमारी को कंट्रोल न करें तो यह सेहत के लिए खतरनाक हो सकती है. 

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के मुताबिक,  भारत की लगभग 38% आबादी फैटी लिवर से प्रभावित है. इसके सर्वाधिक मामले 25 से 40 वर्ष के युवाओं में देखे जा रहे हैं. बिना शराब पीने वालों को भी यह बीमारी हो रही है, जिससे अब टाइप-2 डायबिटीज और हार्ट की बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है. 
 
क्या कहते हैं डॉक्टर

बीएलके मैक्स अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन विभाग में एचओडी डॉ. राजिंद्र कुमार सिंघल बताते हैं कि पिछले 1 साल में उनकी ओपीडी में फैटी लिवर के मरीज सबसे ज्यादा आए हैं. उनमें ज्यादा संख्या उनकी है जो शराब नहीं पीते हैं, लेकिन फिर भी उनका लिवर फैटी हो गया है. इसका प्रमुख कारण लगातार 8-10 घंटे का सिटिंग जॉब, प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता चलन, एक्सरसाइज न करना और बढ़ता मोटापा इसका प्रमुख कारण है. चूंकि फैटी लिवर के शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य होते हैं और पता नहीं चलते हैं तो इसलिए अब इसको साइलेंट किलर माना जा रहा है.

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दिल्ली के आरएमएल हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि बताते हैं कि फैटी लिवर एक बहुत बड़ी समस्या बन रही है. डायबिटीज से भी ज्यादा इसके मरीज आ रहे हैं. चिंता की बात यह है कि ये कम उम्र में भी हो रहा है. ग्रेड 1 का फैटी लिवर तो हर दूसरे मरीज में मिल रहा है. इसका सबसे बड़ा कारण खराब खानपान और बिगड़ा हुआ लाइफस्टाइल ही है. पिछले एक साल की बात करें तो ओपीडी में सबसे ज्यादा मरीज फैटी लिवर के आ रहे हैं. हालांकि मौसम बदलने पर अब फ्लू और वायरल के मरीज भी आ रहे हैं, लेकिन आमतौर पर फैटी लिवर के मरीज तो हर दिन आते हैं.

डॉ. सुभाष कहते हैं कि फैटी लिवर की बीमारी ऐसी है कि अगर इसको कंट्रोल न करें तो यह लिवर सिरोसिस बन सकती है, जो खतरनाक स्थिति होती है. ऐसे में इसको कंट्रोल करना जरूरी है. 

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फैटी लिवर से बचाव कैसे करें 

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 लाइफस्टाइल में बदलाव से इसे पूरी तरह रिवर्स (Reverse) किया जा सकता है. अपनी डाइट में रिफाइंड शुगर न लें और सैचुरेटेड फैट भी न लें. रोजाना 30 मिनट का व्यायाम जरूर करें. वजन को कंट्रोल में रखें और स्ट्रीट व फास्ट फूड खाने से परहेज करें.महीने में 1 या दो बार खाने में कोई दिक्कत नहीं, लेकिन इसको आदत में शामिल न करें. 
 

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