
बेंगलुरु की रहने वाली उमा देवी ने पहले अपनी दोनों बच्चियों की जान ली और फिर खुद भी आत्महत्या की कोशिश कि, कुछ महीने पहले उमा देवी ने दो जुड़वा बच्चियों का जन्म दिया था. उमा देवी बच्चों का खूब ध्यान रखती थी, लेकिन कुछ समय बाद ही उन्होंने ध्यान रखना छोड़ दिया. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 सितंबर को उमा के पति जरूरी काम से घर से बाहर गए थे. घर पर उमा, उनकी सास और दो बहनें भी थीं. जब वह तकरीबन 3 बजे लौटे तो पता चला कि उमा ने अपनी दोनों बच्चियों को मार दिया है और खुद भी दुपट्टे से फंदा बना लिया था. ऐसा आरोप है कि वह अपनी दोनों बच्चियों को मारकर खुद भी आत्महत्या करने वाली थी. लेकिन ऐसा करने से पहले ही उसको बचा लिया गया. अब उसका इलाज मानसिक रोग अस्पताल में चल रहा है. हैरानी की बात ये है कि उमा की बच्चियां आईवीएफ से हुई थी. इतनी मुश्किल से बच्चियां होने के बाद भी उसको इनको क्यों मारा ये बड़ा सवाल है..
बेंगलुरु के इस केस की तरह ही अमेरिका का भी एक मामला कोर्ट में चल रहा है. इसमें एक महिला पर अपने तीन बच्चों को जान से मारने का आरोप है. कोर्ट में महिला के वकीलों का कहना है कि इस महिला को पोस्टपार्टम साइकोसिस है. इस वजह से ऐसा हुआ है. बेंगलुरु वाले मामले में भी महिला को इसी तरह की मानसिक समस्या बताई गई है. लेकिन ऐसा क्या हो जाता है कि बच्चे के जन्म के बाद महिला की मानसिक सेहत खराब हो जाती है और वो अपने बच्चों तक की जान ले सकती है. इसको समझने के लिए आपको पोस्टपार्टम डिप्रेशन को जानना होगा.
बच्चे के जन्म के बाद घर में खुशियां आती हैं. रिश्तेदार बधाई देते हैं, पूरा परिवार खुश हो जाता है. महिला के लिए भी ये सबसे बड़ी खुशी है, लेकिन कुछ महिलाएं ना चाहते हुए भी धीरे- धीरे एक अलग लड़ाई भी लड़ रही होती है. एक तरफ उसको अपने बच्चे की सेहत का ध्यान रखना है तो दूसरी तरफ खुद का भी. लेकिन ऐसा हो नहीं पाता. यहीं से महिला का जीवन बदलता है. इसका असर उसकी मेंटल हेल्थ पर पड़ने लगता है. इसकी शुरुआत बेबी ब्लूज़ से होकर पोस्टपार्टम साइकोसिस तक जाती है. जिसकी एक कड़ी पोस्टपार्टम डिप्रेशन है.
पोस्टपार्टम डिप्रेशन को डिलीवरी के बाद होने वाला डिप्रेशन कहते हैं. अगर ये बहुत बढ़े और पोस्टपार्टम साइकोसिस हो जाए तो महिला खुद या अपने बच्चे तक को नुकसान कर सकती है.
आखिर डिलीवरी के बाद मां के साथ क्या बदलता है?
राजस्थान के सवाई मानसिंह हॉस्पिटल के मानसिक रोग विभाग के डॉ. जसवंत जांगड़ा Aajtak.in से बातचीत में बताते हैं कि उनकी ओपीडी में इस तरह के कई केस आते हैं. अधिकतर मामलों का कारण ये होता है कि बच्चे के जन्म के बाद महिला को सही तरीके से मेंटल सपोर्ट नहीं मिलता है और महिला भी अपनी सेहत का ठीक तरीके से ध्यान नहीं रख पाती है.
डॉ जसवंत कहते हैं कि डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर में कई जरूर हार्मोन का लेवल ठीक नहीं रहता है. दूसरी तरफ जिन महिलाओं का सी सेक्शन होता है उनको भी कई परेशानियां हो जाती हैं.नींद का बिगड़ना भी एक बड़ी समस्या है. नवजात बच्चा रात में कई बार जाग सकता है. मां को बार-बार उठना पड़ता है. इससे नींद पूरी नहीं होती. इससे हार्मोनल, फिजिकल और मेंटल तीनों तरह से शरीर पर असर पड़ता है और ये भी पोस्टपार्टम डिप्रेशन का कारण बनते हैं.अधिकतर मामलों में बेबी ब्लूज से इसकी शुरुआत होती है.

बेबी ब्लूज़ क्या होता है
बच्चे के जन्म के बाद कुछ दिनों तक महिला का मूड बदलना, बिना वजह रोना, चिड़चिड़ापन या हो सकता है. इसे बेबी ब्लूज कहा जाता है और यह आमतौर पर कुछ दिनों में ठीक होने लगता है, लेकिन कुछ परिस्थितियां इन चीजों को काफी बढ़ा देती है, जैसे बच्चा लगातार रोता हो या उसे संभालना मुश्किल हो, बच्चा किसी बीमारी से जूझ रहा हो, पहली बार मां बनी हो, परिवार में तनाव हो, आर्थिक या नौकरी से जुड़ी परेशानी हो या महिला को परिवार से कोई इमोशनल सपोर्ट न मिल रहा हो. ये सब अगर लगातार हो रहा है तो फिर बेबी ब्लूज बढ़ते हैं. इससे महिला धीरे-धीरे पोस्टपार्टम डिप्रेशन में जाने लगती है.
पोस्टपार्टम डिप्रेशन हो गया है इसका पता कैसे चले
डॉ जसवंत बताते हैं कि अगर आपके घर में कोई महिला हमेशा उदास रहे, बहुत ज्यादा चिंता या बेचैनी में हो, उसको नींद आना कम या बंद हो गया हो और बच्चे या खुद को लेकर बार-बार डरावने विचार आने लगे को समझें कि ये पोस्टपार्टम डिप्रेशन हो रहा है.
डॉ. जसवंत बताते हैं कि महिलाओं में सामान्य डिप्रेशन से ज्यादा पोस्टपार्टम डिप्रेशन होता है. लेकिन कई मामलों में परिवार इसपर ध्यान ही नहीं देता है. अगर ये समस्या लंबी चलती रहे तो फिर पोस्टपार्टम साइकोसिस हो सकता है.
पोस्टपार्टम साइकोसिस होता क्या है
पोस्टपार्टम साइकोसिस बहुत खतरनाक होता है. इसमें महिला को कन्फयूजन हो सकता है, उसे ऐसी चीजें सुनाई या दिखाई दे सकती हैं जो वास्तव में मौजूद नहीं हैं. सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब महिला खुद को या बच्चे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे. कुछ मामलों में महिला ऐसा कर भी सकती है, लेकिन इस तरह के केस कम ही आते हैं. डॉ. जसवंत कहते हैं कि अमेरिका में हुई घटना को पोस्टपार्टम साइकोसिस से जोड़कर देखा जा सकता है.
पति और परिवार वाले क्या कर सकते हैं?
इस बारे में दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मनोरोग विभाग में प्रोफेसर डॉ. राम प्रताप बेनिवाल ने बताया है. वह कहते हैं कि हर परिवार को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे की डिलीवरी के बाद मां की सेहत का भी ध्यान रखना बहुत जरूरी है. मां से यह मत कहिए कि सबके बच्चे होते हैं, तुम ही परेशान क्यों हो. पति के लिए ये जरूरी है कि रात में बच्चे की देखभाल वो भी करें , महिला को कुछ घंटे लगातार नींद का मौका दें. परिवार को यह भी समझना होगा कि मां का हर समय ही बच्चे को संभालना जरूरी नहीं है उसे भी आराम, बातचीत और अपना समय चाहिए.
अगर आपको अपने घर में किसी महिला या अपनी पत्नी में पोस्टपार्टम डिप्रेशन जैसे लक्षण दिखने लगे हैं तो इस मामले में तुरंत डॉक्टर से सलाह लें. काउंसलिंग से लेकर दवाओं से इस परेशानी को आसानी से काबू में किया जा सकता है.