आज के समय में फुल बॉडी चेकअप में लोग KFT यानी किडनी फंक्शन टेस्ट भी कराते हैं. इसमें कुछ लोगों कि रिपोर्ट में सोडियम का लेवल कम या ज्यादा आता है. क्या इसका बढ़ना या घटने का मतलब है कि किडनी खराब हो रही है? इस बारे में एक्सपर्ट से जानेंगे. पहले ये जान लेते हैं कि सोडियम क्या होता है.
सोडियम शरीर का एक जरूरी इलेक्ट्रोलाइट है. यह शरीर में पानी की मात्रा को बैलेंस रखने के साथ सभी जरूरी फंक्शन करता है. कई ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से शरीर में सोडियम का लेवल कम या ज्यादा हो सकता है. ये किडनी के फंक्शन से ही जुड़ा तो होता है, लेकिन ये देखना जरूरी होता है कि ये तय पैरामीटर से कितना कम और ज्यादा है.
सोडियम कम आने का क्या मतलब है?
सफदरजंग अस्पताल में नेफ्रोलॉजी विभाग में प्रोफेसर डॉ. हिमांशु वर्मा बताते हैं कि केएफटी की रिपोर्ट में सोडियम का है तो इसको हाइपोनेट्रेमिया कहते हैं.यह शरीर में जरूरत से ज्यादा पानी होने, हार्मोन से जुड़ी समस्याओं की वजह से हो सकता है. सोडियम अगर हल्का सा ही कम है तो कुछ चिंता की बात नहीं होती है.
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सोडियम ज्यादा आने का क्या मतलब है?
अगर किसी के शरीर में सोडियम कम है तो इसको हाइपरनेट्रेमिया कहते हैं. ये शरीर में पानी की कमी से हो जाता है. अगर किसी को ज्यादा पसीना आया या उल्टी दस्त हुआ तो ये समस्या हो सकती है. अगर आपने किसी दिन कम पानी पिया और KFT करा लिया तो शरीर में सोडियम का लेवल कम हो सकता है.
क्या KFT में सोडियम कम या ज्यादा होने का मतलब किडनी खराब है?
डॉ हिमांशु कहते हैं कि ऐसा जरूरी नहीं है.सिर्फ सोडियम कम या ज्यादा होने का ये मतलब नहीं है कि किडनी खराब हो गई है. इसके लिए क्रिएटिनिन और ईजीएफआर जैसे टेस्ट भी किए जाते हैं. इस बात का भी ध्यान रखें कि अगर सोडियम ज्यादा है तो खुद से नमक खाना कम न करें और कम है तो अधिक नमक न खाएं.
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शरीर में कितना होना चाहिए सोडियम का लेवल
शरीर में र सोडियम का नॉर्मल लेवल 135 से 145 मिलीइक्विवेलेंट प्रति लीटर (mEq/L) के बीच होना चाहिए. अगर ये 200 से अधिक या 90 से कम है तो इस मामले में आपको डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत है.