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बच्चों में सिरदर्द कब नॉर्मल और कब चिंता की बात, डॉक्टर ने बताया कौन से टेस्ट कराएं

बच्चों में सिरदर्द आमतौर पर नींद की कमी, डिहाइड्रेशन, तनाव या अधिक स्क्रीन टाइम के कारण होता है और आराम से ठीक हो जाता है, हालांकि बार-बार या तेज सिरदर्द, माइग्रेन, उल्टी, कमजोरी जैसे लक्षण गंभीर हो सकते हैं और डॉक्टर से जांच आवश्यक है.

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बच्चो में सिरदर्द
बच्चो में सिरदर्द

बच्चों में सिरदर्द होना काफी आम बात है, अधिकतर मामलों में, यह नींद पूरी न होने, डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी), खाना न खाने, ज़्यादा देर तक स्क्रीन देखने या तनाव जैसी सामान्य समस्याओं से जुड़ा होता है. यह सिरदर्द आमतौर पर आराम करने से ठीक हो जाते हैं और किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होते. हालांकि, जब सिरदर्द बार-बार हो, बहुत तेज हो या बच्चे की रोजमर्रा की जिदगी पर असर डालने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. लेकिन देखा जाता है कि सिरदर्द को आम समस्या मानकर इग्नोर कर दिया जाता है. 

डॉक्टर बताते हैं कि अधिकतर सिरदर्द सामान्य होते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह किसी अंदरूनी न्यूरोलॉजिकल समस्या का शुरुआती संकेत हो सकता है. इसलिए, यह जानना जरूरी है कि विशेषज्ञ की सलाह कब लेनी चाहिए.

कब सिरदर्द नॉर्मल और कब जांच कराना जरूरी

मैक्स हॉस्पिटल, साकेत में न्यूरोसर्जरी विभाग में डायरेक्टर डॉ कपिल जैन बताते हैं कि अगर किसी बच्चे को कई हफ़्तों या महीनों तक बार-बार सिरदर्द होता है, तो उसकी जांच करवानी चाहिए,अगर सिरदर्द बार-बार हो रहा है, इतना तेज है कि बच्चा स्कूल नहीं जा पा रहा या खेल नहीं पा रहा,या उसे बार-बार दर्द की दवा देनी पड़ रही है, तो न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेने का समय आ गया है, जो सिरदर्द बच्चे की नींद खराब कर दे या सुबह-सुबह ज्यादा तेज हो, उस पर भी तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

डॉ जैन कहते हैं कि बच्चों में बार-बार होने वाले सिरदर्द का एक आम कारण माइग्रेन भी है. बड़ों के उलट, बच्चों में माइग्रेन का दौरा कम समय का हो सकता है और उन्हें जी मिचलाने, उल्टी होने या रोशनी और आवाज़ से परेशानी होने जैसी शिकायतें हो सकती हैं. सही पहचान और इलाज से, माइग्रेन वाले ज़्यादातर बच्चे पूरी तरह से सामान्य जीवन जी सकते हैं.

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इन लक्षणों को ना करें नजरअंदाज

बच्चों में कुछ चेतावनी वाले लक्षणों की तुरंत जांच की ज़रूरत होती है. इनमें बार-बार उल्टी के साथ सिरदर्द, दौरे पड़ना, हाथों या पैरों में कमज़ोरी, चलने में तकलीफ़, नजर में बदलाव, व्यवहार में बदलाव, बहुत ज़्यादा नींद आना या बेहोश हो जाना शामिल हैं. हालांकि ये लक्षण आम नहीं हैं, फिर भी इन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इन मामलों में तुरंत डॉक्टरों से सलाह लें. 

कौन से टेस्ट कराएं

डॉक्टर से सलाह लेने के दौरान, बीमारी का पूरा इतिहास और न्यूरोलॉजिकल जांच अकसर बीमारी का पता लगाने में अहम सुराग देती हैं. सिरदर्द वाले हर बच्चे के लिए ब्रेन इमेजिंग की ज़रूरत नहीं होती. MRI या CT स्कैन की सलाह तभी दी जाती है जब जांच या लक्षणों से किसी अंदरूनी संरचनात्मक समस्या का संकेत मिले.

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किन तरीकों से सिरदर्द की समस्या से बचाव करें 

माता-पिता स्वस्थ आदतों जैसे कि नियमित नींद, शरीर में पानी की सही मात्रा बनाए रखना, संतुलित भोजन, शारीरिक गतिविधि और बिना जरूरत के स्क्रीन टाइम को कम करके सिरदर्द के जोखिम को कम कर सकते हैं, तनाव को मैनेज करना और स्वस्थ दिनचर्या बनाए रखना भी अहम भूमिका निभाता है.

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बच्चों में  सिरदर्द गंभीर नहीं होते, लेकिन लगातार या असामान्य सिरदर्द को कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए. न्यूरोलॉजिस्ट से शुरुआती जांच न केवल कारण का पता लगाने में मदद करती है, बल्कि जरूरत पड़ने पर भरोसा और समय पर इलाज भी देती है. जब कोई संदेह हो, तो लक्षणों के बिगड़ने का इंतज़ार करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना हमेशा बेहतर होता है.
 

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