दिल की बीमारी को आमतौर पर बड़ी उम्र की समस्या माना जाता है, लेकिन इसकी शुरुआत बचपन में भी हो सकती है. इंडिया टुडे के हेल्थवेल्थ समिट 2026 में फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट के कार्डियक साइंसेज के चेयरमैन डॉ. अशोक सेठ ने दिल की बीमारी से बचाव के लिए बचपन से ही ध्यान देना जरूरी है. उन्होंने कहा कि हार्ट डिजीज के रिस्क को कम करने के लिए 10 साल की उम्र में ही कोलेस्ट्रॉल का टेस्ट करा लेना बेहतर है.
डॉ. अशोक सेठ ने कहा कि बच्चों में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या जेनेटिक कारणों से भी हो सकती है. इस स्थिति को फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया कहते हैं. इसमें शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL का स्तर जन्म से ही काफी ज्यादा हो सकता है. परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक या बहुत ज्यादा कोलेस्ट्रॉल का इतिहास इसका संकेत हो सकता है. ऐसे में ये 10 साल की उम्र में ही अगर कोलेस्ट्रॉल का टेस्ट करा लें तो इस समस्या के रिस्क को कम किया जा सकता है. अब ये इसलिए भी जरूरी है कि देश में कम उम्र के लोगों में ही दिल की बीमारियां हो रही हैं. ऐसे में इनसे बचाव के लिए समय पर टेस्ट कराना जरूरी है.
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कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का पता कैसे चलेगा?
डॉ. अशोक सेठ ने कहा कि बच्चों में बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल आमतौर पर कोई खास लक्षण शुरुआत में नहीं देता है. ऐसे में शरीर में कोलेस्ट्रॉल की पहचान के लिए लिपिड प्रोफाइल नाम का ब्लड टेस्ट किया जाता है. इसमें कुल कोलेस्ट्रॉल, LDL, HDL और ट्राइग्लिसराइड्स की जांच होती है. कोलेस्ट्रॉल कितना बढ़ा हुआ है उसके हिसाब से तय किया जाता है कि दवाएं शुरू होंगी या फिर लाइफस्टाइल और खानपान से ही इसको कंट्रोल किया जा सकता है.
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बच्चों के दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
बच्चों को शुरुआत से संतुलित भोजन की आदत डालें. उनकी डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और जरूरी पोषक तत्व शामिल करें, ज्यादा तली हुई चीजें बच्चों को देने से बचें. उनको फिजिकल एक्टिविटी कराएं और खेलकूद के लिए घर से बाहर भेजें. इस बात का भी ध्यान रखें कि आप किस तरह के तेल में खाना बना रहे हैं.