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बार- बार सिरदर्द कहीं आंखों की बीमारी तो नहीं? डॉक्टर ने बताया कौन से लक्षण दिखने पर कराएं जांच

आंखों की बीमारियां जैसे कैटरेक्ट, ग्लूकोमा और डायबिटिक रेटिनोपैथी धीरे-धीरे नजर कमजोर कर सकती हैं. समय पर जांच और सही इलाज से इन बीमारियों को कंट्रोल किया जा सकता है. डॉ. महिपाल सिंह सचदेव ने इस बारे में बताया है.

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सिरदर्द आंखों की समस्या का भी लक्षण
सिरदर्द आंखों की समस्या का भी लक्षण

आंखों में कई प्रकार की बीमारियां होती है. इनमें कैटरेक्ट, ग्लूकोमा, डायबिटिक आई डिजीज, नजर का नंबर, कॉर्निया, रेटिना से जुड़ी कुछ बीमारियां काफी आम हैं. ये धीरे-धीरे नजर को कमजोर कर सकती हैं. अगर सही समय पर इलाज न हो तो आंखों की रोशनी जाने का भी रिस्क होता है. हालांकि समय पर जांच से इन सभी बीमारियों को आसानी से काबू किया जा सकता है, लेकिन कई मामलों में लोगों को आंखों की बीमारियों के लक्षणों का आसानी से पता नहीं चलता है. वहीं, कुछ मामलों में लक्षण दिखने पर भी लापरवाही की जाती है.

आंखों की कौन सी बीमारियां बहुत आम हैं और किन लक्षणों के दिखने पर टेस्ट जरूर कराना चाहिए. ये जानने के लिए हमने सेंटर फॉर साइट ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. महिपाल सिंह सचदेव से बातचीत की है.

डॉ. महिपाल बताते हैं कि आंखों की बीमारियों में कैटेक्ट भी काफी आम है. कैटरेक्ट दुनिया भर में नजर कमजोर होने के ऐसे प्रमुख कारणों में से एक है, जिसका इलाज संभव है. इसमें आंख का प्राकृतिक लेंस धुंधला होने लगता है, जिससे नजर धुंधली हो सकती है, रात में देखने में परेशानी होती है, तेज रोशनी से दिक्कत हो सकती है और रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगते हैं. हालांकि कैटरेक्ट ज्यादातर उम्र बढ़ने के साथ होता है, लेकिन समय पर इसकी पहचान और आधुनिक सर्जरी से ज्यादातर मरीजों की नजर काफी हद तक बेहतर की जा सकती है.

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ग्लूकोमा और डायबिटिक रेटिनोपैथी के भी बढ़ रहे मामले

कैटरेक्ट के अलावा ग्लूकोमा और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी बीमारियों के भी मामले बढ़ रहे हैं. इनमें भी समय पर पहचान बेहद जरूरी है. ये बीमारियां लंबे समय तक बिना किसी साफ लक्षण के बढ़ सकती हैं. ग्लूकोमा ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाकर नजर को  प्रभावित कर सकता है, वहीं डायबिटीज रेटिना की नसों को नुकसान पहुंचाकर नजर को कमजोर कर सकती है.

बार- बार सिरदर्द को हल्के में न लें 

आंखों की रोशनी बचाने के लिए कुछ आसान लेकिन नियमित आदतें भी जरूरी हैं, वयस्कों को नियमित रूप से आंखों की पूरी जांच करानी चाहिए, भले ही उन्हें किसी तरह की परेशानी महसूस न हो. डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, परिवार में ग्लूकोमा या आंखों से जुड़ी दूसरी बीमारी का इतिहास होने पर ज्यादा नियमित जांच की जरूरत हो सकती है.

अगर बार-बार सिरदर्द होता है तो इसे सिर की परेशानी ही न समझे. इस मामले में आंखों के डॉक्टर से भी सलाह लें. इसके अलावा नजर कमजोर होना, आंखों में हमेशा दर्द रहना और धुंधला दिखना जैसी परेशानियों को हल्के में न लें. ऐसे लक्षणों में भी डॉक्टर से सलाह लें. 

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आंखों की केयर के लिए क्या करें 

डिजिटल स्क्रीन पर हमारी बढ़ती निर्भरता ने आंखों के आराम को भी रोजमर्रा की आई केयर का अहम हिस्सा बना दिया है. 20-20-20 नियम अपनाने से डिजिटल आई स्ट्रेन को कम करने में मदद मिल सकती है. इसका मतलब है कि हर 20 मिनट में करीब 20 फीट दूर किसी चीज को 20 सेकंड तक देखें. पर्याप्त रोशनी, स्क्रीन को आंखों से सही दूरी पर रखना, बार-बार पलकें झपकाना और पूरी नींद लेना भी आंखों को आराम देने में मदद कर सकता है.
 

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