आने वाले कुछ दिनों में दिल्ली- एनसीआर समेत देश के कई राज्यों में हवा के प्रदूषित होने का खतरा है. इस दौरान लोगों में खांसी, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी की शिकायत बढ़ने लगती है. कुछ मामलों में तो खांसी बहुत ज्यादा होती है और रात में सोते समय काफी बढ़ जाती है.लेकिन ऐसा होता क्यों है? ये कितना खतरनाक है और इससे बचे कैसे? इस बारे में डॉक्टर से जानते हैं.
साकेत के मैक्स हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट में हेड डॉ. विवेक नांगिया ने इस बारे में Aajtak.in को बताया है. वह कहते हैं कि कई लोगों को प्रदूषण के समय खांसी की समस्या काफी बढ़ जाती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रदूषण में मौजूद बारीक प्रदूषक कण सांस के साथ शरीर के अंदर जाते हैं.ये फेफड़ों के अंदर तक पहुंच सकते हैं. इससे रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट में दर्द और सूजन बढ़ जाती है. शरीर इन प्रदूषित कणों को बाहर निकालने के लिए प्रेशर डालता है. जिससे खांसी आती है, लेकिन जब ये कण ज्यादा होते हैं तो खांसी आती रहती है.
रात में खांसी क्यों बढ़ जाती है?
डॉ. विवेक ने बताया कि रात में खांसी सोते समय ज्यादा बढ़ती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सोते समय हम लेट जाते हैं तो इससे नाक और गले से निकलने वाला म्यूकस पीछे की ओर जा सकता है, जिससे खांसी की समस्या बढ़ सकती है. कुछ लोगों को लोटने के दौरान एसिड रिफ्लक्स होता है यानी पेट का एसिड ऊपर आ जाता है. इससे भी खांसी होने लगती है. यानी रात की खांसी का कारण सिर्फ प्रदूषण नहीं होता, लेकिन खराब हवा पहले से मौजूद सांस की समस्या को और बढ़ा सकती है.
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किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?
जिन लोगों को अस्थमा, एलर्जी, सीओपीडी या पहले से सांस की बीमारी है, उनके लिए प्रदूषण ज्यादा परेशानी पैदा कर सकता है. बच्चों और बुजुर्गों को भी खराब एयर क्वालिटी में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. इन लोगों में अगर खांसी लंबे समय तक बनी रहे तो ये खतरनाक भी हो सकता है. इन लोगों को बदलते मौसस में खास सावधानी बरतने की जरूरत है. लक्षण दिखते ही इलाज भी कराएं, जो दवाएं चल रही है उनको समय से लें, इस मामले में लापरवाही बिलकुल न करें.
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प्रदूषण के दिनों में क्या करें?
आउटडोर एक्टिविटी कम करें
घर में धूल-धुआं कम रखें
बाहर मास्क लगाकर जाएं
अपनी दवाएं समय पर लें