
साल 2026 की कांवड़ यात्रा के दौरान 61 लीटर गंगाजल लेकर चलने वाली उत्तर प्रदेश की एक युवा लड़की मानसी राजपूत खूब चर्चा में रही. किसी ने उन्हें कांवड़ गर्ल का खिताब दिया तो किसी ने उनकी स्लेटी आंखों के चलते उनकी तुलना महाकुंभ के दौरान वायरल हुई मोनालिसा से कर दी.
सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने के बाद कई लोगों ने उनका इंटरव्यू भी किया. ऐसे ही एक इंटरव्यू में मानसी ने बताया कि उन्होंने कई सरकारी नौकरियों के लिए परीक्षा दी लेकिन असफलता ही हाथ लगी. उन्होंने अपना सेलेक्शन न होने के लिए आरक्षण को जिम्मेदार ठहराया. इसके बाद उनके नाम पर दसवीं की एक कथित मार्कशीट वायरल हो गई. इसमें उन्हें फेल बताया गया है. लोग सवाल उठाने लगे कि जब वो दसवीं की परीक्षा ही पास नहीं कर पाईं तो भला यूपी पुलिस की परीक्षा में कैसे बैठीं.
एक फेसबुक यूजर ने इस मार्कशीट को शेयर करते हुए लिखा, "ये UP की मानसी राजपूत हैं. इसका मानना है कि मैने UP पुलिस की कई परीक्षाएं दी लेकिन आरक्षण की वजह से सफल नहीं हो पाई. मेरा घर इसके घर से थोड़ा ही दूर हे मैने इसके दोस्तो से पूछा तो उन्होंने बोला भाई UP पुलिस की परीक्षाएं तो तब देगी जब 10 पास हुई हो कभी फिर उन्होंने मुझे यह प्रमाण दिया पूरे सबूत के साथ देख लो दोस्तो क्या हे सच्चाई खुद पढ़ाई नहीं करते ये लोग और आरक्षण को दोष देते हैं."

लेकिन आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि वायरल हो रही दसवीं की मार्कशीट पूरी तरह फर्जी है. मानसी ने आजतक को बताया कि उन्होंने दसवीं की परीक्षा यूपी बोर्ड से नहीं, बल्कि सीबीएसई बोर्ड से दी थीं और वो फर्स्ट डिवीजन के साथ पास हुई थीं.
कैसे पता चली सच्चाई?
वायरल मार्कशीट को ध्यान से देखने पर हमें इसमें कुछ ऐसी गड़बड़ियां दिखीं, जिससे हमें इसके AI से बने होने का अंदेशा हुआ. मिसाल के तौर पर, इसमें 'ग्रेड' की जगह 'प्रेड' तो 'परीक्षा प्रवर्ग' की जगह 'परीक्षा प्रकर' लिखा है. हमने यूपी बोर्ड की हाईस्कूल की एक असली मार्कशीट भी देखी. इसमें 'हाईस्कूल परीक्षा' के साथ हिंदी के अंकों में साल लिखा होता है. वहीं, वायरल मार्कशीट में साल के शुरुआती दो अंक हिंदी में हैं, लेकिन आखिर के दो अंक अंग्रेजी में लिखे हैं.
किसी एआई टूल से इमेज पर कुछ लिखवाने पर ऐसी गलतियां होना आम बात है. साथ ही, असली मार्कशीट में ऐसी गलतियां होने की संभावना बेहद कम होती है.

हमने 'truthscan.com' और 'isfake.ai' नाम के दो AI डिटेक्शन टूल्स से भी इस मार्कशीट की जांच की. इन टूल्स ने भी इसके AI से बने होने की संभावना बताई.

मानसी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस बारे में एक स्पष्टीकरण भी दिया है. इसमें वो बताती हैं कि उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध एक प्राइवेट स्कूल से की है, जबकि ये मार्कशीट यूपी बोर्ड की है. वो ये भी बताती हैं कि इसमें उनके माता-पिता का नाम भी गलत लिखा है. साथ ही, इसमें उनका नाम मानसी लिखा है जबकि उनके सभी ऑफीशियल डॉक्यूमेंट्स में उनका नाम मनीषा है. हालांकि ज्यातर लोग उन्हें मानसी नाम से ही बुलाते हैं.
हमने गौतमबुद्धनगर के रामपुर गांव की रहने वाली मानसी से खुद बात की. उन्होंने बताया कि उन्होंने जेवर के प्रज्ञान पब्लिक स्कूल से साल 2021 में 10वीं की परीक्षा पास की थी जिसमें उनके 66.2 प्रतिशत नंबर आए थे. वहीं 12वीं क्लास की परीक्षा भी उन्होंने 2023 में इसी स्कूल से पास की जिसमें उनके 74.5 प्रतिशत नंबर आए थे. इसके बाद उन्होंने खुर्जा के N.R.E.C कॉलेज से ग्रेजुएशन किया जिसकी फाइनल मार्कशीट अभी नहीं आई है. उन्होंने ग्रेजुएशन के आखिरी सेमेस्टर की मार्कशीट हमें भेजी भी जिससे ये साफ है कि उनके 10वीं पास नहीं होने की बात बेबुनियाद है.
मानसी के मुताबिक, उन्होंने इस साल यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल समेत कई सरकारी नौकरी के एग्जाम दिए, लेकिन सिर्फ कुछ नंबरों से उनका सेलेक्शन होना रह गया.
(इनपुट: अरुण त्यागी)