अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने अंपायरों के फैसले की विवादास्पद समीक्षा प्रणाली (डीआरएस) को अनिवार्य करने के अपने पुराने फैसले को पलटते हुए इसका इस्तेमाल श्रृंखला में हिस्सा ले रहे बोर्ड की सहमति पर छोड़ दिया है. आईसीसी के इस फैसले को बीसीसीआई की जीत माना जा रहा है.
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आईसीसी ने अपने कार्यकारी बोर्ड की बैठक के दौरान यह फैसला किया. यह फैसला क्रिकेट की वैश्विक संस्था और इसके सदस्य बोडरें के बीच हांगकांग में वाषिर्क सम्मेलन के दौरान हुए करार के उलट है जिसमें हाट स्पाट को इसके उपलब्ध होने पर अनिवार्य किया गया था. ‘बाल ट्रैकिंग’ तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला श्रृंखला में हिस्सा लेने वाले बोर्ड पर छोड़ दिया गया था.
आईसीसी ने कहा कि वह अपनी जून से पूर्व की स्थिति में वापस लौट रहा है जिससे प्रतिस्पर्धी देशों को यह फैसला करने का हक मिलेगा कि वे डीआरएस का इस्तेमाल करना चाहते हैं या नहीं.
यह बीसीसीआई की बड़ी जीत है जो डीआरएस का विरोध करता रहा है क्योंकि उसका मानना है कि यह तकनीक विश्वसनीय नहीं है.
आईसीसी ने कार्यकारी बोर्ड की चौथी और अंतिम बैठक के बाद कहा, ‘हाल के अनुभव और हाटस्पाट की प्रभावकारिता के नतीजे पर चिंता के कारण आईसीसी कार्यकारी बोर्ड अपनी पुरानी स्थिति में लौटने का फैसला किया है जिसमें प्रतिस्पर्धी देशों को यह फैसला करने की स्वीकृति होगी कि वे डीआरएस का इस्तेमाल करना चाहते हैं या नहीं.’
बयान के अनुसार, ‘आईसीसी के कार्यकारी बोर्ड ने हालांकि प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल का समर्थन किया है और कुछ सदस्यों ने उत्साह बढ़ाया है जो प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने और इसमें सुधार की दिशा में काम करने के इच्छुक हैं.’
आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हारून लोर्गट ने स्वीकार किया कि डीआरएस की विश्वसनीयता पर सवाल उठाये गये हैं.