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एजेंडा आजतक 2012

नई पीढी़ का साहित्य से नाता टूट रहा है: जावेद अख्‍तर

नई पीढी़ का साहित्य से नाता टूट रहा है: जावेद अख्‍तर
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'एजेंडा आजतक' के सत्र 'अपनी भाषाएं हैं जरूरी' में गीतकार जावेद अख्‍तर, कवि अशोक वाजपेयी व लेखक अनुजा चौहान के बीच चर्चा बेहद सार्थक रही.
नई पीढी़ का साहित्य से नाता टूट रहा है: जावेद अख्‍तर
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अशोक बाजपेयी ने कहा, ‘भाषाएं मौलवी और पंडित नहीं बनाते हैं, बल्कि आम नागरिक अपनी सुविधा के मुताबिक भाषा बनाते हैं. हम संसार के सबसे बड़े बहुभाषी देश हैं, जहां 22 संविधान की मान्यता प्राप्त भाषाएं हैं और हिन्दी की 46 बोलियां हैं.
नई पीढी़ का साहित्य से नाता टूट रहा है: जावेद अख्‍तर
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अनुजा चौहान ने कहा कि भाषाएं अगर बीमार हैं, तो उन्हें खिचड़ी देने की जरूरत है, यानी सरलीकरण की जरूरत है.
नई पीढी़ का साहित्य से नाता टूट रहा है: जावेद अख्‍तर
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अशोक बाजपेयी ने कहा, भाषा का गणित भी कुछ हद तक जातीय समीकरण जैसा हो गया है, जो अंग्रेजी जाने वह ब्राह्मण और जो ना जाने वह शुद्र’. अंग्रेजी जानना अच्छा है, लेकिन अंतर्ध्‍वनि आपको अपनी भाषा में ही मिलेगी, जिसमें आप सपने देखते हैं. अंग्रेजी के रौब के पीछे नकली सच्‍चाई है.
नई पीढी़ का साहित्य से नाता टूट रहा है: जावेद अख्‍तर
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अनुजा चौहान ने कहा कि कि भाषा ऐसी होनी चाहिए, जो हम समझ सकें. उन्‍होंने कहा कि आजकल हम हिंग्लिश का इस्तेमाल कर रहे हैं.
नई पीढी़ का साहित्य से नाता टूट रहा है: जावेद अख्‍तर
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जावेद अख्‍तर ने फिल्मों में भाषा के स्तर पर गिरावट को स्वीकार करते हुए कहा, ‘फिल्म वाले इसी समाज का हिस्सा हैं, जहां अब साहित्य पर घर में चर्चा होनी लगभग खत्म हो चुकी है.
नई पीढी़ का साहित्य से नाता टूट रहा है: जावेद अख्‍तर
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कबीर को होमर से बड़ा शायर बताते हुए गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने कहा कि हिन्दी और अंग्रेजी जानने वाले एक-दूसरे की भाषा से नफरत करते हैं और फिल्मों में जबान की गिरावट का कारण समाज है.
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अशोक बाजपेयी ने कहा, भाषा की हदें खुली होनी चाहिए और अंग्रेजी केवल कुछ प्रतिशत लोगों की भाषा है. उन्होंने कहा, ‘न अंग्रेजी को, न हिन्दी को किसी को किसी भाषा को अपदस्थ करने का कोई हक नहीं है.
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एजेंडा आजतकसम्मेलन में भाषायी सत्र में जावेद अख्तर ने कहा, ‘जबान जड़ हैं, हिन्दी तना है और अंग्रेजी शाखायें है, जिसके जरिये पूरी दुनिया तक पहुंचा जा सकता है. मगर नई पीढ़ी में भाषा के प्रति रुझान कम हुआ है.
नई पीढी़ का साहित्य से नाता टूट रहा है: जावेद अख्‍तर
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अनुजा चौहान ने कहा कि जब आप किताब लिखते हैं, तब स्वाभाविक भाषा के इस्तेमाल पर जोर होता है.
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जावेद साहब ने कहा, 'उर्दू और हिन्दी में नहीं बल्कि हम हिन्दुस्तानी में लिखते हैं. कभी भी किसी भाषा को शुद्ध करने की कोशिश से उस भाषा को ही नुकसान होता है.'