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पीएम मोदी ने गालियां देने वाले बच्चों को किया माफ, सुनील लहरी बोले- हम भाग्यशाली हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर लाइव आकर युवाओं से संवाद किया और उन्हें माफ करने का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि बचपन में गलतियां होती हैं और उन्हें सुधारने का मौका देना चाहिए.

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पीएम मोदी के मैसेज पर बोले सुनील लहरी (Photo: Social Media)
पीएम मोदी के मैसेज पर बोले सुनील लहरी (Photo: Social Media)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंस्टाग्राम पर एक्टिव हो चुके हैं. वो इंस्टाग्राम के जरिए देश के युवाओं से अपने मन की बात कह रहे हैं. शुक्रवार देर रात एक बार फिर उन्होंने बड़ा मैसेज दिया. रात तकरीबन 11 बजे के बाद पीएम मोदी इंस्टाग्राम पर लाइव आए और Gen-Z को संबोधित किया. पीएम ने कहा- मैं मुझे और मेरी मां को गालियां देने वाले बच्चों को माफ करना चाहता हूं. पीएम मोदी के मैसेज पर 'रामायण' के लक्ष्मण यानी सुनील लहरी ने रिएक्ट किया है. आइए जानते हैं कि सुनील लहरी ने क्या कहा. 

क्या बोले सुनील लहरी?
इंस्टाग्राम वीडियो शेयर करते हुए सुनील लहरी ने कहा- हमारे मानयीय प्रधानमंत्री जी का कितना बड़ा दिल है. 20 तारीख के आनंदोल में उन्हें, उनकी स्वर्गीय माता जी को और देश की सेना को लोगों ने उन्हें कितना भला बुरा बोला. उसके बावजूद भी उन्होंने सबको माफ कर दिया. अगर उनकी जगह कोई और होता, तो कड़ी से कड़ी सजा देता. ये उनका बड़प्पन है. वो कहते हैं कि ऐसे प्रधानमंत्री को मेरा कोटि-कोटि नमन. 

सुनील लहरी ने आगे कहा कि हम भाग्यशाली हैं, जो हमें ऐसे प्रधानमंत्री मिले. वो दुनिया के लिए टफ मास्टर हैं और अपने देश-देशवासियों के लिए एक मोम की तरह हैं. हो सकता है कि मेरी ये बात कई लोगों को पसंद ना आए. पर मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है. आप लोग खुश रहिए, सुखी रहिए और स्वस्थ रहिए. जय श्रीराम.

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क्या बोले प्रधानमंत्री?
पीएम ने इंस्टाग्राम पर लाइव आकर कहा-  फ्रेंड्स. आज तो मन करता है बस आपसे ही बातें करूं. जंतर मंतर पर जो कुछ भी हुआ देश और दुनिया ने देखा है. कुछ शरारती बच्चों ने भद्दी भद्दी गालियां बोलीं, किसी भी सभ्य समाज को शोभा ना दे. ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया, मुझे तो गालियां दी गईं, मेरी स्वर्गीय माता को भी गालियां दी गईं. न जाने कितना भद्दा स्वरूप था. लेकिन मैं आज बात करना चाहता हूं कि बचपन में गलतियां होती हैं. बचपन में गलतियों से सुधरने का अवसर भी होता है और यही तो बचपना है. इसलिए मैं समाज के अंदर जो आक्रोश है उसको भली भांति समझ सकता हूं. एक कल्चरल शॉक है की हमारी बेटियां इस प्रकार की भाषा कैसे बोल सकती हैं?

प्रधानमंत्री ने कहा कि समय है इन बच्चों को गले लगा कर के राह दिखाने का. ये गुमराह बच्चे हैं उनको राह दिखाना हमारा काम है.  

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