'सदी के महानायक' अमिताभ बच्चन अपने गेमिंग रियलिटी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' से कई लोगों की जिंदगी बदल चुके हैं. उनके शो पर आम आदमी ने अपने ज्ञान से कई पैसे जीते, और फिर अपनी जिंदगी में आईं मुश्किलों को हल किया. केबीसी के हालिया एपिसोड में एक टीचर की एंट्री हुई, जिन्होंने अपनी लाइफ में बड़ी परेशानियां देखीं.
छत्तीसगढ़ के टीचर का मुश्किल दौर
केबीसी 18 में छत्तीसगढ़ के दुर्ग क्षेत्र से टीचर-किसान दुर्गा प्रसाद साहू आए थे, जिन्होंने अपनी जिंदगी में आई एक मुश्किल कहानी शेयर की. शो में उन्होंने बताया कि कैसे क्रिकेट में सट्टा लगाने की आदत ने उन्हें करीब 10 लाख रुपये के कर्ज में डुबो दिया. दुर्गा प्रसाद ने बताया कि शुरुआत में वो दोस्तों के साथ क्रिकेट के स्कोर पर सिर्फ 10-20 रुपये का दांव लगाते थे.
धीरे-धीरे ये आदत सट्टेबाजी और फिर जुए की लत में बदल गई. कर्ज चुकाने के लिए वो दूसरों से बड़ी रकम उधार लेने लगे. देखते ही देखते उनका 10-20 रुपये का दांव 10 लाख रुपये के कर्ज में बदल गया. अमिताभ बच्चन के सामने उन्होंने माना कि उन्होंने जिंदगी में एक शॉर्टकट अपनाने की कोशिश की, जिसका उन्हें बाद में बहुत पछतावा हुआ.
उन्हें खुद पर शर्म भी आती थी, क्योंकि वो अपने स्टूडेंट्स के लिए गलत उदाहरण बन रहे थे. दुर्गा प्रसाद शो में बताते हैं कि 2020 में उन्होंने इस आदत को छोड़ने का फैसला किया. परिवार और दोस्तों की मदद से उन्होंने सट्टेबाजी से बाहर निकलने की कोशिश की. KBC में आने का उनका मकसद भी अपने कर्ज को चुकाना था.
केबीसी में कितने पैसे जीतकर गए दुर्गा प्रसाद?
शो में दुर्गा प्रसाद ने काफी अच्छी शुरुआत करने के साथ लगातार सही जवाब देते हुए 12.5 लाख रुपये जीते. उनके पास 25 लाख रुपये जीतने का भी मौका था, मगर वो उस सवाल का जवाब नहीं दे पाए. उनसे पूछा गया सवाल था कि इनमें से किस सरीसृप की ज्यादातर प्रजातियां अंडे देने के बजाय सीधे बच्चों को जन्म देती हैं? उन्हें अमिताभ बच्चन ने ऑप्शन दिए थे—कोमोडो ड्रैगन, एनाकोंडा, घड़ियाल और गैलापागोस कछुआ.
दुर्गा प्रसाद को जवाब नहीं पता था, इसलिए उन्होंने रिस्क लेने के बजाय 12.5 लाख रुपये लेकर शो छोड़ने का फैसला किया. बाद में जब उनसे जवाब का अनुमान लगाने को कहा गया, तो उन्होंने घड़ियाल कहा, लेकिन ये गलत था. सही जवाब एनाकोंडा था. शो से जाते हुए अमिताभ बच्चन ने उन्हें सलाह देते हुए कहा- अब इस पैसे पर सट्टा मत लगाना. दुर्गा प्रसाद ने भी उन्हें भरोसा दिलाया कि वो अब सट्टेबाजी की उस जिंदगी को पीछे छोड़ चुके हैं.