फ्रांस में इन दिनों एक ही नजारा देखने को मिल रहा है. सड़कों पर उमड़ी भीड़, हाथों में विरोध के पोस्टर, पुलिस के साथ टकराव और सरकार के खिलाफ गूंजते नारे. जिस देश ने दुनिया को आजादी, समानता और भाईचारे का संदेश दिया, वहां आज लोग सड़कों पर हैं. अमूमन फ्रांस को दुनियाभर में एफिल टावर, फैशन, वाइन और खूबसूरती के लिए जाना जाता है लेकिन क्या आपको पता है कि पूरी दुनिया में फिल्में बनाने और फिल्में देखने का तरीका बदलने में फ्रांस की अहम भूमिका रही है. सिनेमा के शुरुआती विकास से लेकर नई फिल्मी भाषा गढ़ने वाली फ्रेंच न्यू वेव और आधुनिक दौर की कहानियों तक फ्रेंच सिनेमा ने बार-बार साबित किया है कि फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्र कला भी है. ऐसे में आज हम आपको फ्रांस की ऐसी दस फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने वैश्विक सिनेमा पर गहरा असर डाला और हॉलीवुड के फिल्मकारों के लिए भी पाठशाला साबित हुई.
फिर चाहे हम 1930 और 1940 के दशक की क्लासिक फ्रेंच फिल्मों की बात करें जिन्होंने सिनेमा की बुनियाद मजबूत की या जां-ल्यूक गोदार और फ्रांस्वा त्रूफो जैसे फिल्मकारों की उन फिल्मों की जिन्होंने पारंपरिक तौर पर कहानी कहने के नियम तोड़ दिए? फ्रेंच सिनेमा कहते ही जेहन में जो कुछेक फिल्मों के नाम आते हैं. उनमें 1939 की फिल्म The Rules of the Game भी है.
इस फिल्म के निर्देशक जां रेनुआ थे. फ्रेंच सिनेमा की महानतम फिल्मों की चर्चा में इस फिल्म को सबसे मजबूत दावेदारों में गिना जाता है. एक आलीशान महफिल में जुटे अमीरों, उनके प्रेम-संबंधों और उनके घरेलू कर्मचारियों की जिंदगी के जरिए रेनुआ ने फ्रेंच समाज के वर्गभेद, पाखंड और नैतिक खोखलेपन को उजागर किया. फिल्म की असली ताकत यह है कि वह किसी एक खलनायक को दोषी ठहराने के बजाय पूरे सामाजिक ढांचे पर सवाल उठाती है. फिल्म को रिलीज के समय विरोध और प्रतिबंध का सामना करना पड़ा लेकिन बाद में इसे विश्व सिनेमा की महानतम फिल्मों में जगह मिली.

फ्रांस की एक और लोकप्रिय फिल्म 1928 की The Passion of Joan of Arc है. इसके डायरेक्टर कार्ल थियोडोर ड्रेयर हैं. फ्रांस की राष्ट्रीय नायिका जोन ऑफ आर्क के मुकदमे और मौत पर बनी यह फिल्म दिखाती है कि बिना भव्य सेट, तेज रफ्तार एक्शन या भारी-भरकम डायलॉग की भरमार के भी सिनेमा किस हद तक भावनात्मक असर पैदा कर सकता है. अभिनेत्री रेने जीन फाल्कोनेटी के चेहरे के बेहद करीब से लिए गए शॉट्स, आंखों में डर, दृढ़ता और इंटेरोगेशन के सीन की बेचैनी इसे असाधारण बनाती है. फिल्म का जोर ऐतिहासिक घटनाओं के विस्तार से ज्यादा एक इंसान के विश्वास, सत्ता के सामने उसकी बेबसी और मानसिक यातना पर है. साइलेंट सिनेमा की महानतम फिल्मों में इसकी जगह आज भी कायम है.

लिस्ट में अगला नाम जां रेनुआ की ही 1937 की फिल्म La Grande Illusion का है. युद्ध पर बनी फिल्मों में अक्सर बहादुरी, दुश्मन को हराने और राष्ट्र के गौरव को केंद्र में रखा जाता है लेकिन 'ला ग्रांद इल्यूजियो' प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मन कैद में पहुंचे फ्रांसीसी सैनिकों की कहानी के जरिए युद्ध की बनाई हुई सीमाओं पर सवाल उठाती है. फिल्म में सैनिकों की राष्ट्रीयता से ज्यादा उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि, आपसी रिश्ते और साझा मानवीय अनुभव अहम हो जाते हैं. रेनुआ का नजरिया युद्ध को किसी एक देश के अच्छे और दूसरे देश के बुरे होने की सरल कहानी में नहीं बदलता. यही वजह है कि यह फिल्म अपने दौर की सीमाओं से आगे निकल गई. इसकी मानवीय दृष्टि और युद्ध-विरोधी विचारों ने इसे विश्व सिनेमा की सबसे महत्वपूर्ण युद्ध फिल्मों में शामिल किया.
फ्रांस की चौथी सबसे महानतम फिल्मों में नाम डायरेक्टर मार्सेल कार्ने की 1945 की फिल्म Children of Paradise का है. फ्रांस के सिनेमाई इतिहास में इस फिल्म को उस दौर की बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है, जब देश जर्मन कब्जे और युद्ध की कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था. उन्नीसवीं सदी के पेरिस के थिएटर जगत की पृष्ठभूमि में बनी यह प्रेमकथा एक महिला और उसे चाहने वाले अलग-अलग पुरुषों के रिश्तों को सामने रखती है.

लेकिन फिल्म की दुनिया सिर्फ प्रेम और बिछड़ने तक सीमित नहीं है. इसमें अभिनय, प्रसिद्धि, इच्छा, सामाजिक प्रतिष्ठा और कलाकार की निजी जिंदगी के बीच का तनाव भी मौजूद है.
इस सूची में अगल नाम The 400 Blows का है. निर्देशक फ्रांस्वा त्रूफो की 1959 की यह फिल्म एक बच्चे की शरारतों के पीछे छिपी उसकी भावनात्मक उपेक्षा और अकेलेपन को समझने की कोशिश है, जो इसे साधारण बाल-कहानी से कहीं आगे ले जाती है. एंत्वान दोआनेल नाम का किशोर घर और स्कूल, दोनों जगह खुद को गलत समझे जाने का अनुभव करता है. उसके व्यवहार को सुधारने की कोशिश में बड़े यह देखना भूल जाते हैं कि आखिर वह ऐसा कर क्यों रहा है. त्रूफो ने आत्मकथात्मक अनुभवों से प्रेरित इस फिल्म में बच्चों के मन को बिना भावुकता का अनावश्यक सहारा लिए पर्दे पर उतारा. वास्तविक लोकेशन, सहज अभिनय और स्वतंत्र कैमरा शैली ने फ्रेंच न्यू वेव आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में मदद की. फिल्म का अंतिम दृश्य आज भी सिनेमा के सबसे यादगार अंत में गिना जाता है.

फ्रांस की छठी महानतम फिल्म 1995 की La Haine है. फिल्म की कहानी पेरिस के बाहरी इलाके में बसे एक गरीब आवासीय इलाके में शुरू होती है. पुलिस की पिटाई से 16 साल का अब्देल गंभीर रूप से घायल हो गया है और उसकी हालत नाजुक है. इसके बाद इलाके में तनाव और पुलिस के खिलाफ गुस्सा बढ़ जाता है. कहानी तीन दोस्तों विंज, हुबर्ट और सईद के इर्द-गिर्द घूमती है. विंज यहूदी पृष्ठभूमि से है, हुबर्ट अश्वेत और सईद अरब मूल का है. तीनों की पहचान अलग है, लेकिन वे उस हाशिए की दुनिया से आते हैं, जहां गरीबी, नस्लीय पूर्वाग्रह और पुलिस के साथ टकराव रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं.
विंज गुस्से और बदले की भावना से भरा है. हुबर्ट हिंसा से बाहर निकलकर बेहतर जिंदगी बनाना चाहता है, जबकि सईद दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है. फिल्म इन तीनों के एक दिन के अनुभवों के जरिए दिखाती है कि व्यवस्था पर भरोसा टूटने के बाद गुस्सा किस तरह और अधिक हिंसा को जन्म दे सकता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मांकन, यथार्थवादी संवाद और बेचैन कर देने वाला माहौल है.
इस सूची में अगला नाम 1962 की फिल्म Cleo from 5 to 7 का है, जिसके डायरेक्टर एग्नेस वार्दा है. यह फिल्म एक गायिका की कहानी है, जिसे मेडिकल जांच के नतीजों का इंतजार है और उसे आशंका है कि उसे कैंसर हो सकता है. फिल्म लगभग दो घंटे की वास्तविक समय-सीमा के भीतर उसके जीवन के उस बेचैन दौर को दर्ज करती है. शुरुआत में क्लेओ अपनी सुंदरता, दूसरों की निगाहों और अपनी सार्वजनिक छवि को लेकर चिंतित दिखाई देती है लेकिन जैसे-जैसे वह पेरिस की गलियों में घूमती है, उसकी नजर दुनिया और खुद पर बदलने लगती है. एग्नेस वार्दा ने स्त्री के अनुभव, बीमारी के भय, अकेलेपन और अपनी पहचान को लेकर उठने वाले सवालों को बेहद अनूठे अंदाज में पेश किया.
फ्रांस की एक और बेहतरीन फिल्म 1967 की Playtime है. यह फिल्म आधुनिक शहर, कांच की इमारतों, एक जैसे दफ्तर और मशीनों की तरह व्यवहार करते लोगों को दिखाती है. पहली नजर में देखने पर यह कॉमेडी लगेगी लेकिन इसके हास्य के पीछे आधुनिक जीवन पर गहरी टिप्पणी छिपी है.

इस लिस्ट में अगला नाम 2001 की फिल्म Amelie का है. जां-पियेर जने की यह फिल्म फ्रांस की सबसे पॉपुलर फिल्मों में से एक है. पेरिस के मोंमार्त्र इलाके में रहने वाली अमेली दूसरों की जिंदगी में छोटे-छोटे सुख लाने की कोशिश करती है, जबकि अपनी भावनाओं और प्रेम का सामना करने से बचती रहती है. ऑड्रे टोतू के सहज अभिनय, चटख रंगों और इसके म्यूजिक ने फिल्म को एक विशिष्ट पहचान दी. फिल्म ने पेरिस की ऐसी सिनेमाई छवि बनाई, जो दुनियाभर के दर्शकों की कल्पना में बस गई.
लिस्ट में आखिरी नाम 2019 की फिल्म Portrait of a Lady on Fire का है. अठारहवीं सदी के फ्रांस में एक महिला चित्रकार को दूसरी महिला का पोर्ट्रेट बनाने की जिम्मेदारी मिलती है. यह पोर्ट्रेट दरअसल शादी की तैयारी है लेकिन धीरे-धीरे चित्रकार और उसकी मॉडल के बीच ऐसा रिश्ता पनपता है, जो प्रेम, स्वतंत्रता, कला और स्त्री की अपनी इच्छा के सवाल उठाता है.
आखिर इन फिल्मों को महान क्या बनाता है?
इन दस फिल्मों को एक साथ रखकर देखें तो फ्रेंच सिनेमा की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता नजर आती है. जां रेनुआ ने समाज और युद्ध को देखने का नया नजरिया दिया है. त्रूफो ने बचपन के अकेलेपन को गंभीरता से उठाया. फ्रांस के कई ऐसे फिल्मकार रहे जिन्होंने बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की परवाह नहीं करते हुए रिस्क लिया और लीक से हटकर विषयों पर फिल्में बनाईं जिन्हें दुनियाभर में सराहा गया.