सोचिए, आप किसी के प्यार में पागल हैं और उस इंसान के साथ अपनी पूरी जिंदगी बिताने की ठान चुके हैं. लेकिन बात शादी तक नहीं पहुंच रही. रिश्तेदार आपके कान खा-खाकर आपको पका चुके हैं. इसलिए आप उनसे दूर भागने के लिए विदेश निकल जाते हो. वहां आपकी मुलाकात एक तीसरे से होती है, जो बाद में जाकर आपकी लव-लाइफ में भसड़ मचा देता है. तब आप क्या करेंगे? आप उस रिश्ते को किस तरह संभालेंगे? कुछ ऐसे ही आइडिया के साथ मैडॉक फिल्म्स अपनी नई फिल्म 'कॉकटेल 2' लेकर आई है.
कॉकटेल फ्रेंचायजी साल 2012 में सैफ अली खान, दीपिका पादुकोण और डायना पेंटी से शुरू हुई थी. प्यार, दोस्ती और सिचुएशनशिप वाले मसले को हमारे सामने कॉमिक अंदाज में पेश किया गया. ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट हुई. अब 14 साल बाद इसका स्पिरिचुअल सीक्वल लाया गया, जिसमें शाहिद कपूर-रश्मिका मंदाना और कृति सेनन की तिगड़ी दिखाई है. कैसी है ये रॉम-कॉम फिल्म? आइए, आपको बताते हैं.
कॉकटेल 2 की असली स्टोरी
फिल्म की कहानी दिल्ली के एक सक्सेसफुल शेफ कुणाल (शाहिद कपूर) की है, जो अपनी गर्लफ्रेंड दिया (रश्मिका मंदाना) के साथ काफी खुश है. दोनों अपने स्पेस में कंफर्टेबल हैं, इसलिए शादी के बारे में उनका कोई प्लान नहीं है. लेकिन एक दिन दिया को डर सताता है कि कहीं उसका 'गुड बॉय' कुणाल बाकी लड़कों जैसा दिलफेंक आशिक तो नहीं. ऐसे में इस कंफ्यूजन से दूर भागने के लिए दिया, कुणाल को लेकर इटली के शहर सिसिली पहुंच जाती है जहां वो अपनी यूनिवर्सिटी फ्रेंड एली (कृति सेनन) से मिलती है.
एली दुनिया घूमने में विश्वास रखती है. उसका कोई साथी नहीं है. दिया और कुणाल उसके साथ शहर घूमने निकल पड़ते हैं. एक दिन दिया के मन में ख्याल आता है कि क्यों ना वो कुणाल की वफादारी टेस्ट करे, जिसके लिए उसे अपनी दोस्त एली की जरूरत पड़ती है. एली अपनी हॉटनेस और फ्लर्टिंग स्किल्स से कुणाल को फंसाने की खूब कोशिश करती है. इसी चक्कर में एली को कुणाल से प्यार हो जाता है.
अब सिचुएशन ऐसी है कि कुणाल और दिया एक-दूसरे से प्यार करते हैं. मगर उनके बीच एली भी अब एक लव-ट्रायंगल की तरह शामिल हो गई है. दिया और एली, दोनों को कुणाल का प्यार चाहिए. ऐसे में दोनों लड़कियों में से कुणाल किसको चुनता है? यही आपको फिल्म में देखने मिलेगा.
रोमांस की भरमार, मगर गायब दिखी कॉमेडी
कॉकटेल फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यही थी कि वो समय के साथ-साथ सीरियस होती जाती है. सैफ-दीपिका-डायना ने उस फिल्म में जो किरदार निभाए, उनके बीच जो केमिस्ट्री थी वो बतौर ऑडियंस हमें भी फील हुई. इसके अलावा उसमें अच्छी-खासी कॉमेडी थी. लेकिन कॉकटेल 2 में जिसकी कमी खली, वो थी इसकी कॉमेडी. शाहिद ने पूरी कोशिश की कि उनके डायलॉग सुनकर हंसी आए, मगर वैसा बहुत कम मोमेंट्स पर हो पाता है.
फिल्म का फर्स्ट हाल्फ ठीक-ठाक है, जिसमें स्टोरी और लव-ट्रायंगल को सेटअप किया गया है. डायरेक्टर होमी अडजानिया ने खूबसूरत लोकेशन्स पर इसे शूट किया है. लेकिन इसमें आपको सीट से बांधे रखने का दम नहीं है. कुछ ऐसा ही हाल सेकेंड हाल्फ का भी है, जहां चीजें अंत तक आते-आते थोड़ी बहुत ठीक तो हो जाती है. मगर तबतक काफी देर हो चुकी होती है.
जो कमाल पहले पार्ट में इम्तियाज अली की राइटिंग में था, वो लव रंजन और तरुण जैन की राइटिंग में नहीं नजर आया. कॉकटेल 2 का स्क्रीनप्ले काफी धीमा है, कई मौकों पर बोरियत सी महसूस होने लगती है. फिल्म में गिनती के कुछ मोमेंट्स हैं जिन्हें देखकर आपको अच्छा लगेगा. लेकिन ये एक परफेक्ट सीक्वल नहीं, जिसकी उम्मीद फैंस ने की होगी.
स्टोरी ने किया निराश लेकिन एक्टर्स ने संभाली कमान
कॉकटेल 2 फिल्म की अगर किसी डिपार्टमेंट में तारीफ होगी, तो वो है इसकी कास्टिंग. तीनों एक्टर्स- शाहिद कपूर, रश्मिका मंदाना और कृति सेनन ने अपना-अपना रोल बखूबी निभाया है. शाहिद काफी समय बाद स्क्रीन पर स्टाइलिश नजर आए हैं. चाहे डांस हो या एक्टिंग, एक्टर ने हर चीज काफी सही की है. उनकी और रश्मिका मंदाना के बीच की केमिस्ट्री भी स्क्रीन पर ठीक-ठाक लगती है. अगर शाहिद के साथ कृति सेनन होतीं, तो शायद स्क्रीन पर आग लग जाती.
क्योंकि कृति सेनन इस फिल्म में काफी ग्लैमरस और हॉट अवतार में नजर आई हैं. वो जब भी स्क्रीन पर आईं, अपनी प्रेजेंस से छाने वाला काम किया. एक्टिंग भी एक्ट्रेस की लाजवाब रही. लेकिन अफसोस कृति का एली वाला रोल, दीपिका पादुकोण के वेरोनिका जैसा आइकॉनिक नहीं बन सका.
गाने फिल्म में ओवरऑल देखा जाए, तो इसकी फील के हिसाब से अच्छे हैं. अगर कोई है जो आपको याद रह जाए, तो बंधू 2.0 ही एकमात्र ऑप्शन बनता है क्योंकि ये गाना कई पुरानी यादें ताजा करता है. अगर आप फ्रेंचायजी वैल्यू के भरोसे इसे देखने का प्लान कर रहे हैं, तो फिल्म को एक मौका दे सकते हैं. बाकी इसमें ऐसा कुछ नहीं है जो बाद में याद बनकर रह जाए.