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'धुरंधर 2' पर राम गोपाल वर्मा का पोस्ट, फिल्ममेकर्स और एक्टर्स पर साधा निशाना

फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने 'धुरंधर 2: द रिवेंज' को एक 'सिनेमैटिक डिसरप्टर' बताया है, जो दर्शकों की पसंद में आए एक साफ बदलाव को दिखाता है. इसके अलावा उन्होंने फिल्ममेकर्स को सलाह भी दी है.

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'धुरंधर 2' पर बोलें राम गोपाल वर्मा (Photo: Screengrab)
'धुरंधर 2' पर बोलें राम गोपाल वर्मा (Photo: Screengrab)

फिल्म 'धुरंधर' पर डायरेक्टर आदित्य धर से ज्यादा अगर किसी ने ध्यान दिया है, तो वो कोई और नहीं बल्कि दिग्गज फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने की है. 'धुरंधर: द रिवेंज' को रिलीज हुए अभी बस एक दिन बीता है और राम गोपाल वर्मा ने बड़ी बात कह दी है.

अपने लंब-चौड़े पोस्ट में राम गोपाल वर्मा ने कई बड़े फिल्ममेकर्स पर ना सिर्फ निशाना साधा है बल्कि इस बार तो उन्होंने एक्टर्स को भी नहीं छोड़ा. इसके अलावा उन्होंने अपकमिंग फिल्मों को लेकर भी बड़ी बात कह दी है.

राम गोपाल वर्मा ने किया पोस्ट
अपने X अकाउंट पर राम गोपाल वर्मा ने लिखा, 'धुरंधर 2' एक डरावनी फिल्म है. यह उन सभी फिल्म मेकर्स के लिए एक डरावनी फिल्म है, जिन्होंने घटिया और अतिरंजित (बढ़ा-चढ़ा कर) सिनेमा पर अपना करियर और दौलत बनाई. वह सिनेमा जो दिमाग को घर पर छोड़ने की मांग करता था. वो सिनेमा जो शोर-शराबे और मसाले से भरा हुआ हमारे गले में जबरदस्ती उतारा गया था, अब जल्द ही वेंटिलेटर पर सांस लेने के लिए संघर्ष करता हुआ नजर आएगा.'

फिल्ममेकर ने आगे लिखा, 'धुरंधर 2 उन सभी फिल्म मेकर्स को बुरी तरह डरा देगा जो आज भी ईश्वरीय नायक की पूजा करते हैं. धुरंधर 2 में रणवीर सिंह ने उन सभी नायकों को मार डाला है जो कभी खून नहीं बहाते, कभी दर्द महसूस नहीं करते, और फिर उन पुराने जमाने के नायकों की लाशों पर एक सच्चे, वास्तविक नायक को जन्म दिया है, जो खामियों से भरा है, फिर भी खतरनाक और अप्रत्याशित है, और उसकी वीरता उसके कार्यों से झलकती है, न कि कान फाड़ देने वाले  म्यूजिक से.'

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'इस नए तरह के हीरो के सामने, ईश्वरीय हीरो अचानक हास्यास्पद लगने लगेंगे, लगभग सर्कस के जोकरों की तरह और फिर उनके अंधभक्त फिल्मों के कलेक्शन सुनकर खुद को नंगा, बेनकाब और डरा हुआ महसूस करेंगे.'

राम गोपाल वर्मा ने आगे लिखा, 'धुरंधर 2 उन लोगों को डरा देगा जिन्होंने अपना करियर एक्शन सीन्स पर बनाया है, जहां फिजिक्स एक मजाक है और गुरुत्वाकर्षण का कोई अस्तित्व नहीं है. वो दृश्य, जिनमें पुरुषों को पचास फीट हवा में उछाला जाता है, रबर की गेंदों की तरह जमीन से टकराकर वापस आते हैं, शहरों को राख कर देने वाले विस्फोटों से बच जाते हैं, और फिर भी कंधे झाड़ते हुए दमदार डायलॉग बोलते हैं, नए ऑडियंस द्वारा खूब पसंद किए जाएंगे और उनकी आलोचना की जाएगी.'

'यह उन अखिल भारतीय डायरेक्टरों को भी अपनी कुर्सियों पर थरथरा देगा, जो अब भी मानते हैं कि पात्रों का निर्माण उनके आंतरिक मनोवैज्ञानिक गहराई के बजाय हेयर स्टाइल, वेशभूषा, फोटोशॉप किए गए सिक्स पैक और डिजाइनर कपड़ों से होता है. जब धुरंधर 2 के दर्शकों ने एक ऐसे नायक को देखा जिसकी शक्ति उसके दिमाग से आती है, न कि उसकी मांसपेशियों से, तो सिनेमा का हेयर स्टाइल और वेशभूषा वाला स्कूल बच्चों के खेल जैसा लगेगा.'

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'धुरंधर 2 सिर्फ एक फिल्म नहीं है. यह एक फैसला है. धुरंधर 2 के साथ आदित्य धर ने उस तरह के सिनेमा का सिर काट दिया है—वह सिनेमा जिसने दर्शकों की समझ का अपमान किया, जिसने कहानियों की जगह भड़कीले और दिखावटी विज़ुअल्स को रख दिया, जिसने हीरो को भगवान और दर्शकों को भेड़ बना दिया. Dhurandhar2 का कलेक्शन अब उन पुराने फिल्ममेकर्स की सोच को इतनी गहरी कब्र में दफनाने की तैयारी में है कि उनके भूत भी बाहर नहीं निकल पाएंगे.'

फिल्म मेकर्स को सलाह
अगर उस तरह की फिल्मों के मेकर्स—जो अभी बन रही हैं या जिनकी शूटिंग शुरू होने वाली है—वापस जाकर अपनी स्क्रिप्ट पर दोबारा काम नहीं करते और  धुरंधर को बार-बार देखकर खुद को उस बुरे असर से आजाद नहीं करते, तो भगवान भी उनकी आत्माओं को नहीं बचा पाएंगे. लेकिन दिक्कत यह है कि, अगर वे ऐसा करना भी चाहें, तो उनके पास भले ही ढेर सारा पैसा हो, लेकिन उन्हें आदित्य धर जैसा दिमाग कहां से मिलेगा?

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