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'धर्म साथ लेकर आए थे', हिंदू-मुसलमान विवाद पर जब नाना पाटेकर ने कर दी बोलती बंद

अभिनेता नाना पाटेकर का निधन सभी के लिए एक बड़ी क्षति है. नाना ने अपने करियर में यादगार किरदार निभाए और इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म माना. जानते हैं कि धर्म को लेकर वो क्या कहते थे.

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नाना की मौत से जुड़ा ये किस्सा (Photo: ITGD)
नाना की मौत से जुड़ा ये किस्सा (Photo: ITGD)

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का अचानक दुनिया से चले जाना हर किसी को खल रहा है. नाना को उनके यादगार किरदारों और नेक कामों के लिए हमेशा याद किया जाएगा. नाना के लिए इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म था. कई मौकों पर उन्होंने  धर्म, जाति और इंसानियत की अहमियत पर खुलकर बात की थी. नाना ने ये भी कहा था कि वो धार्मिक पहचान में यकीन नहीं करते हैं. खुद को सबसे पहले एक इंसान मानते हैं. 

नाना ने 2016 में महाराष्ट्र के एक स्कूल कार्यक्रम में कहा था कि भारतीयों को धर्म या जाति के आधार पर बांटा नहीं जाना चाहिए. लोगों को हिंदू, मुस्लिम या ईसाई के रूप में पहचानने की जरूरत पर सवाल उठाया था. 

इंसानियत सबसे बड़ा धर्म

2016 में महाराष्ट्र के एक स्कूल इवेंट में नाना ने धर्म पर खुलकर अपने विचार शेयर किए. उन्होंने कहा- हम जाति में विश्वास नहीं करते. मैं धर्म में भी विश्वास नहीं करता. हम भारतीय हैं और यही हमारा धर्म है. फिर हमें हिंदू धर्म, इस्लाम और ईसाई धर्म जैसे धर्मों की जरूरत क्यों है? जब हम इस दुनिया में आए थे, तो क्या हम अपने साथ अपना धर्म लेकर आए थे?

नाना ने ऑफिशियल फॉर्म पर जाति और धर्म का जिक्र करने की प्रथा पर भी सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था- अगर आप कहते हैं कि हमारा देश भारत धर्मनिरपेक्ष है, तो फिर हर फॉर्म से जाति और धर्म वाले कॉलम क्यों नहीं हटाते?

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उस इवेंट में नाना स्कूल के सभी छात्रों को यही समझाया कि सभी धर्मों की शिक्षाएं एक ही संदेश देती हैं. उन्होंने छात्रों से कहा कि इंसानियत को महत्व दें और उसे अपना धर्म समझें. 

एक्टर का कहना था कि हर धर्म कहता है, इंसान में भगवान को तलाशो. हर किसी के भीतर एक हीरो और एक विलेन होता है. तो यह आप पर निर्भर है कि आप हीरो बनें या विलेन. अगर आप इंसानियत दिखाएंगे, तो आपको संतोष मिलेगा. 

इंडिया टीवी के एक शो पर भी उन्होंने धर्म को लेकर अपनी राय रखी थी. उन्होंने कहा था कि मैंने कभी किसी खास धर्म या संप्रदाय का पालन नहीं किया. मेरा मानना है कि मैं एक इंसान हूं. मुझे तो यह भी नहीं पता कि हिंदू और मुस्लिम में क्या फर्क है. मुझे दोनों में कोई फर्क नहीं दिखता है. ये बातें सुनकर ही पता चलता है कि वो कितने बेहतरीन और शानदार इंसान थे. 

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