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'मिर्जापुर' में गूंज रही 'सांसों की माला'! नुसरत फतेह अली खान की इस कव्वाली की कहानी क्या है?

मिर्जापुर: द मूवी में नुसरत फतेह अली खान के सदाबहार गाने 'सांसों की माला' का नया वर्जन शामिल है. इंटरनेट पर ये काफी ट्रेंड कर रहा है. जानें इस गाने का क्या इतिहास रहा है.

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मिर्जापुर में रीक्रिएट हुए नुसरत फतेह अली खान का सॉन्ग (Photo: Social Media)
मिर्जापुर में रीक्रिएट हुए नुसरत फतेह अली खान का सॉन्ग (Photo: Social Media)

फिल्म 'मिर्जापुर: द मूवी' का बॉक्स ऑफिस पर भौकाल टाइट है. मूवी ने पांच दिन में 120 करोड़ का कलेक्शन कर लिया है. फिल्म की स्टारकास्ट, एक्शन और इंटीमेट सीन्स के अलावा इसके एक गाने की काफी चर्चा हो रही है. तमाम गानों में से एक गाना 'सांसों की माला पे' सबसे खास है. ये पहली बार इस फ्रेंचाइजी में सुनने को मिला है. मूवी में 'सांसों की माला' का वर्जन आज के दौर के म्यूजिक ट्रीटमेंट के हिसाब से क्रिएट किया गया है. इसे मधुर शर्मा और वैभव पानी ने बनाया है.

उस्ताद नुसरत फतेह अली खान का ये सदाबहार सॉन्ग फिल्म के मिड-क्रेडिट सीक्वेंस में सुनने को मिलता है. इसे सुनकर फैंस नॉस्टैल्जिया फील कर रहे हैं. इंटरनेट पर ये गाना ट्रेंड कर रहा है. मिर्जापुर से पहले ये सॉन्ग कई फिल्मों की शान बना है. दशक बीत गए लेकिन इस गाने का क्रेज आज भी लोगों में जिंदा है. नुसरत साहब का ये गाना कभी कव्वाली की महफिलों में सजा तो कभी हिंदी फिल्मों के जरिए लोगों के दिलों में बसा. लेकिन क्या आप जानते हैं नुसरत फतेह अली खान के गाने 'सांसों की माला' के बनने का इतिहास मजेदार है. 

'सांसों की माला पे' कैसे बना?

ये बात 1979 की है. नुसरत फतेह अली खान पहली बार भारत आए थे. उन्हें राज कपूर ने अपने बेटे ऋषि कपूर की शादी में परफॉर्म करने के लिए बुलाया था. वहां सिंगर ने इस गाने को ऐसा गाया कि ये एवरग्रीन बन गया. फिर इस हिट गाने को कमर्शियल रिलीज के लिए तैयार किया गया. 1982 में आई नुसरत की एल्बम सुप्रीम कलेक्शन वॉल्यूम 12 में इसे रिलीज किया गया. नुसरत साहब ने गाने को सूफियाना और कव्वाली का अवतार दिया. 1983 में बर्मिंघम में हुए एक लाइव कॉंसर्ट में नुसरत फतेह अली खान ने इसे गाया था, जिसके बाद ये सॉन्ग ग्लोबली सबकी जुबान पर चढ़ा.

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गाने को लेकर हुआ विवाद

अब गाना इतना बड़ा हो तो उसके क्रेडिट को लेकर जंग भी होनी ही थी. इसे किसी ने मीरा बाई और तो किसी ने तुफैल होशियारपुरी की रचना बताया. गाने को मीरा बाई की कृष्ण भक्ति से जोड़ा जाता है. जो गाने के भाव में साफ झलकते हैं. इसमें श्याम, मोहन, वृंदावन और गोकुल जैसे शब्दों का इस्तेमाल हुआ है, जो जाहिर तौर पर कृष्ण भक्ति का इशारा देते हैं. लेकिन सूफीनामा के अनुसार, इस गाने की रचना कवि तुफैल होशियारपुरी ने की थी. वो 1914 में जन्मे थे. 1993 में उन्होंने अंतिम सांस ली थी.

नुसरत का ये गाना जब पहली बार कमर्शियली रिलीज हुआ था, उसमें गीतकार के नाम की जगह ट्रैडिशनल (पारंपरिक) लिखा हुआ था. हालांकि बाद में तुफैल होशियारपुरी को इसका क्रेडिट दिया गया. वहीं कविता में मौजूद भक्ति शब्दों की वजह से मीराबाई से इसे ज्यादा जोड़ा गया. शायद यही बात इस गाने की खासियत भी है. ये गाना किसी एक धर्म, संगीत या प्रेम की सीमा में कभी नहीं बंधा. गाने में इंसानी प्यार और आध्यात्मिक प्रेम, दोनों साथ में को-रिलेट करते हैं.

बॉलीवुड की किन फिल्मों में रीक्रिएट हुआ ये गाना

'सांसों की माला' सॉन्ग मिर्जापुर से पहले भी बॉलीवुड का हिस्सा रहा है. 1996 में आई फिल्म 'जीत' में इसका वर्जन दिखा. फिर 1997 की फिल्म 'कोयला' में भी इसका इस्तेमाल हुआ. गाने को शाहरुख खान और माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया था. इस गाने को राजेश रोशन ने कंपोज किया था और कविता कृष्णमूर्ति ने अपनी आवाज दी थी. डायरेक्टर माइकल विंटरबॉटम ने 2011 की फिल्म तृष्णा में नुसरत फतेह अली खान द्वारा गाए गए ओरिजनल सॉन्ग का इस्तेमाल किया था.

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राहत फतेह अली खान का वर्जन सुना?

नुसरत साहब की आवाज में 'सांसों की माला' हिट रहा. लेकिन क्या आपको मालूम हैं फेमस पाकिस्तानी सिंगर राहत फतेह अली खान ने भी इसे गाया था. नुसरत के बाद उनके परिवार से ही आए राहत ने इस गीत को पीढ़ियों तक पहुंचाया. 2020 में राहत ने इस गाने को अपने अंदाज में रिकॉर्ड किया था. ये गाना रीक्रिट कर उन्होंने अपने चाचा और गुरु नुसरत फतेह अली खान को श्रद्धांजलि थी. उन्होंने इस गाने को अपने पिता फर्रुख फतेह अली खान को भी डेडिकेट किया था. 

'सांसों की माला' हर सिंगर की पहली पसंद 

'सांसों की माला' को लेकर लोगों का प्यार यूट्यूब पर भी दिखा. इसकी लोकप्रियता सिर्फ फिल्मों और ऑफिशियल म्यूजिक रिलीज तक सीमित नहीं रही. यूट्यूब और दूसरे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने भी इस गाने को रीक्रिएट किया. फेमस पाकिस्तानी इंस्ट्रूमेंटल जोड़ी लियो ट्विन्स ने इसका एक वर्जन बनाया. गाने को वायलिन और गिटार का इस्तेमाल कर बनाया गया. ये वर्जन हिट हुआ. लियो ट्विन्स ये सॉन्ग अपने कॉन्सर्ट में भी गाते हैं.

2022 में पुर्तगाली गिटारिस्ट Andre Antunes ने इस गाने के साथ एक्सपेरिमेंट किया. उन्होंने नुसरत फतेह की आवाज के नीचे हेवी मेटल गिटार रिफ्स जोड़ दिए. ये एक्सपेरमिंट लोगों को दमदार लगा. म्यूजिक लवर्स के बीच ये वर्जन भी हिट रहा. क्योंकि इस गाने में भक्ति भाव है. इसलिए कई भक्ति संगीतों में इस गाने के म्यूजिक को रखकर नए लिरिक्स के साथ सॉन्ग बने हैं. 

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सासों की माला सॉन्ग को हर सिंगर अपने स्टाइल में रीक्रिट करना चाहता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि ये गाना हर म्यूजिक स्टाइल में फिट हो जाता है. इसका कोर बेहद स्ट्रॉन्ग है. तभी तो सांसों की माला की जर्नी नुसरत फतेह अली खान से शुरू होकर कविता कृष्णमूर्ति, राहत फतेह अली खान, इंस्ट्रूमेंटल आर्टिस्ट्स, मेटल गिटारिस्टों और भक्ति सिंगर्स से होकर 'मिर्जापुर: द मूवी' तक पहुंच गई. ये गाना हर दौर की पीढ़ी के बीच दोबारा से जन्म लेता है. देखना होगा मिर्जापुर के बाद ये गाना किस नए सिंगर और फिल्म में सुनने को मिलेगा.

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