मनोज बाजपेयी हिंदी सिनेमा के सबसे टैलेंटेड और वर्सेटाइल एक्टर्स में शुमार हैं. वो हर किरदार को अपना बना लेते हैं. मनोज बाजपेयी इन दिनों अपनी हालिया रिलीज फिल्म 'गजब रात' के प्रमोशन में बिजी हैं. इस दौरान उन्होंने बताया कि वो पॉडकास्ट से तंग आ चुके हैं, क्योंकि पॉडकास्ट में अपने अतीत और बचपन की कहानियों को बार-बार दोहराकर वो थक चुके हैं.
बचपन से क्यों होने लगी नफरत?
मुंबई में हुए हालिया 'इंडियन फिल्म प्रोजेक्ट फेस्टिवल' में मनोज बाजपेयी ने पॉडकास्ट से दूरी बनाने पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा- मैं अब पॉडकास्ट नहीं करता, क्योंकि मैं अपने बचपन के बारे में बात करते-करते तंग आ चुका हूं. स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि मुझे अपने बचपन से ही नफरत होने लगी है कि क्यों में गांव में पैदा हुआ? मेरी इतनी लंबी और मुश्किल जर्नी क्यों रही?
एक्टर ने आगे कहा कि आज भले ही हर कोई उनके संघर्षों को इंस्पिरेशन मानता है, लेकिन जब वो उस दौर से गुजर रहे थे, तब उनके लिए इससे निपटना काफी मुश्किल था. मनोज बोले- आप सबको लग सकता है कि मैं कोई ज्ञान बांट रहा हूं, लेकिन मैं कभी ऐसा करने की कोशिश नहीं कर रहा था, क्योंकि मैं भी चाहता था कि मेरा जन्म दिल्ली में होता. कम से कम तब मुझे मुंबई तक जाने के लिए इतनी मशक्कत नहीं करनी पड़ती.
क्यों नर्क लगने लगी थी जिंदगी?
'जब मेरा एक गांव में जन्म हुआ, तो मुंबई पहुंचने के लिए हमें एक बस से दूसरी बस में धक्के खाने पड़ते थे. ऐसा कौन चाहता है? हर कोई इसे एक इंस्पिरेशनल जर्नी कहता है, लेकिन जब आप खुद उस दौर से गुजर रहे होते हैं, तो वो किसी नर्क से कम नहीं होता. बिना पैसों के इस तरह से पांच दिन गुजार कर देखिए, जिंदगी जीने का सारा मजा खत्म हो जाएगा.
मनोज बाजपेयी की बात करें तो वो बिहार के एक छोटे से गांव में एक किसान परिवार में बड़े हुए हैं. बचपन में उन्होंने काफी आर्थिक तंगियों और संघर्षों का सामना किया है. लेकिन आज वो बॉलीवुड इंडस्ट्री का बड़ा नाम हैं और करोड़ों में कमाई करते हैं.