इस साल की शुरुआत में ओटीटी प्लेटफॉर्म ने अपना 2026 कंटेंट लाइनअप पेश किया था जिसमें मनोज बाजपेयी की फिल्म घूसखोर पंडत भी शामिल थी. इस टाइटल पर सोशल मीडिया यूजर्स, कई संगठनों और नेताओं तक ने ऐसी आपत्ति जताई कि मामला बड़े विवाद में बदलकर सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा.
कोर्ट के आदेश अनुसार मेकर्स ने फिल्म का टाइटल भी बदल दिया, लेकिन फिल्म की रिलीज पर अभी तक कोई अपडेट नहीं है. इस बीच मनोज बाजपेयी की नई फिल्म गवर्नर 12 जून को रिलीज के लिए तैयार है. मनोज ने इसके प्रमोशन के सिलसिले में बताया है कि 'घूसखोर विवाद' से उनका परिवार तक घबरा गया था.
PTI से एक बातचीत में मनोज बाजपेयी ने कहा कि उन्हें और फिल्म की टीम को टाइटल पर ऐसा विवाद छिड़ने की उम्मीद नहीं थी. हालांकि, आपत्तियां सामने आते ही मेकर्स ने तुरंत कदम उठाया और टाइटल बदलने में कोई हिचक नहीं दिखाई.
उन्होंने कहा, 'हमें इसकी उम्मीद नहीं थी. लेकिन जब ऐसा हुआ तो दो दिन के भीतर हमने माफी जारी कर दी. अगर किसी चीज से इतने बड़े स्तर पर लोगों की भावनाएं आहत हो रही हैं, तो हम क्रिएटिव लोग हमेशा अपनी गलती सुधारने और खुद को ठीक करने के लिए तैयार रहते हैं.' मनोज ने कहा कि टाइटल बदलना फिल्ममेकर्स के लिए कभी बड़ा मुद्दा नहीं था. 'मुझे व्यक्तिगत तौर पर लगता है कि टाइटल बदलना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है. हम क्रिएटिव लोग हैं, दस नए टाइटल सोच सकते हैं और वो भी उतने ही एक्साइटिंग होंगे.'
तगड़े विवाद का असर थोड़े समय के लिए पूरी टीम पर जरूर हुआ लेकिन उनका कहना है कि माफी जारी करने तक उनकी टीम चिंता में थी. उसके बाद टीम के लोग बिना परेशान हुए हालात पर नजर रखे हुए थे. मनोज ने यह भी खुलासा किया कि विवाद के दौरान उन्हें धमकियां और ऑनलाइन गालियां भी मिलीं.
उन्होंने कहा, 'लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूं कि जब मुझे धमकियां मिल रही थीं, तब भी मैं लगातार यात्रा कर रहा था और मुझे कोई डर नहीं था. जब लोग आपको ट्रोल करते हैं, गालियां देते हैं और आपके परिवार को भी इसमें घसीट लेते हैं, तो मुझे उनके लिए सहानुभूति महसूस होती है.'
मनोज बाजपेयी ने मुद्दों को पूरी तरह समझे बिना राय बना लेने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि फिल्म के विषय को जाने बिना उसके बारे में धारणाएं बनाना इस विवाद की बड़ी वजह थी. वो ऐसे लोगों से बहस करना पसंद नहीं करते जो जल्दबाजी में निष्कर्ष निकाल लेते हैं.
उन्होंने कहा, 'मैं चीजों को समझने की इच्छा रखने वाला आदमी हूं, पढ़ा-लिखा इंसान हूं. मेरे पास उन लोगों से बहस करने की न एनर्जी है और न समय, जो राय बनाने की इतनी जल्दी में हैं कि चीजों को समझना भी नहीं चाहते. ऐसे लोगों से बहस क्यों की जाए?'