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'यूथ को इंटीमेसी से आपत्ति नहीं', फिल्मों में पार हो रही हदें? 'लस्ट स्टोरीज 3' के डायरेक्टर ने तोड़ी चुप्पी

फिल्मों में बोल्ड और इंटीमेट सीन्स दिखाने पर अक्सर मेकर्स और स्टार्स को दर्शकों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ता है. साल 2022 में आई फिल्म 'गहराइयां' में दीपिका पादुकोण और सिद्धांत चतुर्वेदी के हॉट सीन्स पर भी काफी बवाल मचा था. अब 'लस्ट स्टोरीज 3' के डायरेक्टर्स ने फिल्मों में दिखाए जाने वाले बोल्ड सीन्स पर बात की है.

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फिल्मों में पार हो रहीं इंटीमेसी की हदें? (Photo: Screengrab)
फिल्मों में पार हो रहीं इंटीमेसी की हदें? (Photo: Screengrab)

आज के समय में फिल्मों और वेब सीरीज में बोल्ड या इंटीमेट सीन्स होना आम बात हो गई है. लगभग हर दूसरी फिल्म में रोमांटिक या किसिंग सीन्स देखने को मिल ही जाते हैं. हालांकि, कई बार मेकर्स कहानी में इंटीमेट सीन्स की ऐसी भरमार कर देते हैं, जिससे दर्शक उन्हें परिवार के साथ देखने में हिचकने लगते हैं.

हालांकि, पर्दे पर जरूरत से ज्यादा बोल्ड सीन्स दिखाने पर अक्सर मेकर्स और स्टार्स को दर्शकों के तीखे विरोध और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है. इसका एक बड़ा उदाहरण साल 2022 में आई फिल्म 'गहराइयां' है, जिसमें दीपिका पादुकोण और सिद्धांत चतुर्वेदी के बीच कई बोल्ड और इंटीमेट सीन्स दिखाए गए थे.

फिल्म रिलीज के बाद इन सीन्स को लेकर स्टार्स को सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल किया गया था, क्योंकि फिल्म में एक्सट्रामैरिटल अफेयर्स, इंटीमेसी, सेक्सुअल डिजायर दिखाने पर कई लोगों को ठीक नहीं लगा था. 

फिल्मों में इंटीमेट सीन्स दिखाने पर क्या बोले डायरेक्टर?

अब 'न्यूज18' से संग बातचीत में 'लस्ट स्टोरीज 3' के डायरेक्टर्स विक्रमादित्य मोटवानी और शकुन बत्रा ने फिल्मों को मिलने वाले बैकलाश पर खुलकर बात की है. उन्होंने इस पर भी अपनी राय रखी कि क्या भारतीय दर्शकों का एक बड़ा वर्ग आज भी रूढ़िवादी सोच रखता है. 

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'गहराइयां' में सेक्स और बेवफाई दिखाने पर ट्रोलिंग झेलने को लेकर फिल्म के डायरेक्टर सचिन बत्रा बोले-ऐसा नहीं है कि ये सब चीजें भारत में कभी हुई ही नहीं हैं. लोग इन कहानियों से खुद को जोड़ पाते हैं और इसमें खुद को देखते भी हैं. लेकिन हां, क्या नैतिक है, क्या सही है और क्या गलत है.... इस बात का एक बहुत बड़ा बोझ होता है. मुझे लगता है कि हम सालों-साल उन सोच-विचारों को बदलने के लिए तैयार ही नहीं होते. यह ऐसा है जैसे एक ही चीज हमेशा के लिए सही और गलत बना दी गई हो. 

लस्ट-डिजायर पर क्या बोले विक्रमादित्य मोटवानी?

वहीं दूसरी ओर फिल्ममेकर विक्रमादित्य मोटवानी का मानना है कि समस्या दर्शक नहीं, बल्कि खुद को समाज का ठेकेदार मानने वाले लोग हैं. विक्रमादित्य ने कहा- अगर आप उन फिल्मों की परफॉर्मेंस को देखें, तो यह साबित होता है कि कोई भी पीछे हटकर यह नहीं कहेगा कि वो ऐसी चीजें नहीं देखना चाहते. यह तो वो गेटकीपर्स हैं, जो बार-बार कहते रहते हैं कि आप यह नहीं देख सकते या आपको यह नहीं देखना चाहिए, क्योंकि यह हमारी संस्कृति के खिलाफ है और ऐसी ही न जाने कितनी बातें करते हैं. 

सामान्य तौर पर कहें तो मुझे लगता है कि पिछले 20 सालों में हमारे फिल्में देखने का तरीका बदल गया है. हमारी युवा पीढ़ी सेक्स, इंटीमेसी और लस्ट को लेकर काफी हद तक खुले विचारों वाली है और वो जल्दी किसी को जज नहीं करती.

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जिन्हें नहीं पता, उनके लिए बता दें कि 'लस्ट स्टोरीज 3' में मोटवानी की कहानी मिडल एज की शादीशुदा महिलाओं की सेक्स डिजायर पर बेस्ड है, जो अपनी बेदम सेक्स लाइफ में फिर से रोमांच भरने के लिए अपने पतियों की अदला-बदली करने का फैसला करती हैं. 

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