
हिंदी सिनेमा ने अपने एक ऐसे फिल्ममेकर को खो दिया है, जिनका नाम शायद कैमरे के सामने नजर आने वाले सितारों की तरह हमेशा सुर्खियों में नहीं रहा, लेकिन पर्दे के पीछे उनका योगदान बेहद अहम था. फिल्ममेकर कुकू कोहली का 77 साल की उम्र में निधन हो गया. मंगलवार को मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली. दिल का दौरा उनकी जिंदगी को अचानक अपने साथ ले गया.
कुकू कोहली का फिल्मी सफर तीन दशक से भी ज्यादा लंबा रहा. इस दौरान उन्होंने सिर्फ फिल्में ही नहीं बनाईं, बल्कि कई ऐसे कलाकारों के करियर का अहम हिस्सा बने, जिनका नाम आज हिंदी सिनेमा के इतिहास में दर्ज है. खास बात यह रही कि सिनेमा की बारीकियां उन्होंने किसी फिल्म स्कूल में नहीं, बल्कि दिग्गज फिल्ममेकर राज कपूर के साथ लंबे समय तक काम करके सीखीं.
पेशावर में जन्में अवतार उर्फ कुकू कोहली न सिर्फ एक डायरेक्टर थे, बल्कि एक राइटर, एडिटर और स्क्रीन राइटर भी थे. वो फिलहाल इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर असोसिएशन (IFTDA) के जनरल सेक्रेटरी थे.
राज कपूर के साथ सीखा सिनेमा का हुनर
कुकू कोहली के शुरुआती करियर की सबसे खास बात उनका राज कपूर के साथ काम करना रहा. उन्होंने कई वर्षों तक राज कपूर के साथ काम किया और इसी दौरान फिल्म निर्माण की बारीकियों को करीब से समझा.
कैमरे के पीछे रहकर कहानी को पर्दे पर उतारने का हुनर उन्होंने इसी दौर में सीखा. यही अनुभव आगे चलकर उनके निर्देशन के सफर की नींव बना. तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर में कुकू कोहली ने हिंदी सिनेमा के बदलते दौर को करीब से देखा. उन्होंने उस समय काम शुरू किया, जब फिल्म बनाना सिर्फ सितारों को पर्दे पर उतारना नहीं, बल्कि दर्शकों की नब्ज समझने की कला भी थी.
'बेताब' से शुरू हुआ सितारों को तराशने का सिलसिला
कुकू कोहली के करियर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव फिल्म 'बेताब' रही. वह इस फिल्म में सेकेंड यूनिट डायरेक्टर के तौर पर जुड़े थे. सनी देओल और अमृता सिंह की लॉन्चिंग वाली यह फिल्म बड़ी हिट साबित हुई और गोल्डन जुबली का दर्जा हासिल किया. 'बेताब' ने जहां सनी देओल और अमृता सिंह को रातोंरात स्टार बना दिया, वहीं कुकू कोहली के लिए यह फिल्म इंडस्ट्री में अपने हुनर को आगे बढ़ाने का एक अहम मौका बनी.
इसके बाद उन्होंने 'अर्जुन' में भी काम किया, जिसमें सनी देओल और डिंपल कपाड़िया नजर आए थे. यह फिल्म भी सिल्वर जुबली साबित हुई. यानी निर्देशक की कुर्सी संभालने से पहले ही कुकू कोहली कई सफल फिल्मों का हिस्सा बन चुके थे और इंडस्ट्री की कार्यशैली को अच्छी तरह समझ चुके थे.
'फूल और कांटे' ने बदल दी अजय देवगन की किस्मत
फिर आया साल 1991 और कुकू कोहली के करियर की सबसे बड़ी फिल्म-'फूल और कांटे'. यह सिर्फ कुकू कोहली के लिए एक बड़ी सफलता नहीं थी, बल्कि हिंदी सिनेमा को एक नए सितारे से मिलवाने वाली फिल्म भी थी. फिल्म से अजय देवगन ने बॉलीवुड में कदम रखा.
फिल्म ने डायमंड जुबली का दर्जा हासिल किया और अजय देवगन की पहचान को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई. आज अजय देवगन हिंदी सिनेमा के सबसे स्थापित एक्टर्स में गिने जाते हैं, लेकिन उनके फिल्मी सफर की शुरुआत का एक सिरा हमेशा कुकू कोहली से जुड़ा रहेगा.
एक नए चेहरे पर भरोसा करके उसे मुख्य भूमिका में पेश करना और फिर उस फिल्म का बड़ी सफलता हासिल करना कुकू कोहली की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रहा.

'सुहाग' से लेकर 'हकीकत' तक जारी रहा सफर
'फूल और कांटे' की सफलता के बाद कुकू कोहली ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने 'कोहराम' जैसी फिल्म का निर्देशन किया और इसके बाद आई 'सुहाग', जिसमें अजय देवगन, अक्षय कुमार, करिश्मा कपूर और नगमा जैसे सितारे थे. 'सुहाग' भी बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और गोल्डन जुबली फिल्म बनी.
इसके बाद कुकू कोहली ने 'हकीकत' का निर्देशन किया. फिल्म में अजय देवगन और तब्बू मुख्य भूमिकाओं में थे. इस फिल्म को फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में सात कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला, जिसमें कुकू कोहली का नाम बेस्ट डायरेक्टर की कैटेगरी में भी शामिल था.
इसी फिल्म के लिए उन्हें स्क्रीन अवॉर्ड्स में भी बेस्ट डायरेक्टर ऑफ द ईयर के लिए नॉमिनेशन मिला. यह उनके निर्देशन की स्वीकार्यता और उनके काम की गंभीरता का प्रमाण था.
अक्षय कुमार और गोविंदा के साथ भी बनाया सिनेमा
कुकू कोहली ने सिर्फ अजय देवगन के साथ ही काम नहीं किया. उन्होंने अक्षय कुमार और ट्विंकल खन्ना स्टारर 'जुल्मी' का निर्देशन किया. फिल्म ने भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया और कई जगहों पर सफल रन किया.
इसके बाद उन्होंने गोविंदा को डबल रोल में लेकर 'अनाड़ी नंबर 1' बनाई. गोविंदा की कॉमिक टाइमिंग और मसाला मनोरंजन के दौर में यह फिल्म भी दर्शकों के बीच चर्चा में रही.
कुकू कोहली की खासियत यही थी कि उन्होंने अपने करियर में अलग-अलग तरह के कलाकारों और कहानियों के साथ काम किया. एक तरफ अजय देवगन और अक्षय कुमार जैसे एक्शन स्टार्स थे, तो दूसरी तरफ गोविंदा का कॉमिक अंदाज.
'ये दिल आशिकाना' और संगीत की वापसी
कुकू कोहली की फिल्मों में संगीत का भी अहम स्थान रहा. उनकी फिल्म 'ये दिल आशिकाना' इस लिहाज से खास रही क्योंकि इसी फिल्म के साथ मशहूर संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण ने इंडस्ट्री में वापसी की थी.
फिल्म ने कुकू कोहली के निर्देशन सफर के एक और दौर को सामने रखा. 90 के दशक की उनकी फिल्मों से लेकर इस दौर तक उनका सिनेमा लगातार बदलते समय के साथ आगे बढ़ता रहा. उनकी आखिरी निर्देशित फिल्म 'वो तेरा नाम था' थी, जिसमें अर्जन बाजवा और कांची कौल नजर आए थे. इसके साथ उनका निर्देशन का सफर एक पड़ाव पर आकर थम गया.
निजी जिंदगी में भी फिल्मी दुनिया से रहा रिश्ता
कुकू कोहली की निजी जिंदगी भी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी रही. उन्होंने एक्ट्रेस अरुणा ईरानी से शादी की थी. उनकी पिछली शादी से दो बेटियां हैं. हालांकि, कुकू कोहली ने अपनी निजी जिंदगी को हमेशा ज्यादा सुर्खियों में नहीं रखा. वह उन फिल्ममेकर्स में रहे, जिन्होंने अपनी पहचान को अपनी फिल्मों के जरिए सामने आने दिया.
कुकू कोहली की मौत भी उतनी ही अचानक हुई, जितनी शायद किसी ने कल्पना नहीं की थी. अरुणा के भाई बलराज ईरानी के मुताबिक कुकू की तबीयत कुछ दिन पहले खराब हुई थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जांच में दिल में ब्लॉकेज मिला था और उनके स्टेंट डाला गया. परिवार के मुताबिक इसके बाद वह बिल्कुल ठीक थे. लेकिन बुधवार शाम अचानक उन्हें बड़ा हार्ट अटैक आया. वह परिवार से बात कर रहे थे और अचानक गिर पड़े.
एक ऐसा इंसान, जिसने जिंदगी के तीन दशक से ज्यादा वक्त सिनेमा के उतार-चढ़ाव को देखते हुए गुजारा, आखिरी वक्त में अपने परिवार से बात कर रहा था. और फिर एक पल में सब खत्म हो गया.
आज कुकू कोहली हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जब भी 'फूल और कांटे' का नाम लिया जाएगा, अजय देवगन के शुरुआती दिनों की कहानी कही जाएगी और 90 के दशक के उस सिनेमा को याद किया जाएगा- कुकू कोहली का नाम भी उसी कहानी का एक जरूरी हिस्सा रहेगा.
उनका सफर खत्म हुआ है, लेकिन उनके कैमरे के पीछे छोड़ी गई कहानी अभी खत्म नहीं हुई.
RIP कुकू कोहली!