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'हर गली-मोहल्ले में दिखाएंगे 25 लावारिस लाशों का पता लगाने वाले खालड़ा की कहानी', सिख संगठन का ऐलान

दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को ZEE5 से हटाए जाने के बाद विवाद और बढ़ गया है. अब DSGMC ने फिल्म का समर्थन करते हुए पब्लिक स्क्रीनिंग और जसवंत सिंह खालड़ा पर सेमिनार कराने का ऐलान किया है.

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'खालड़ा की कहानी नहीं दबेगी', सिख संगठन का बड़ा ऐलान (Photo: Screengrab)
'खालड़ा की कहानी नहीं दबेगी', सिख संगठन का बड़ा ऐलान (Photo: Screengrab)

दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को ZEE5 से हटाए जाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. अब इस विवाद में दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (DSGMC) भी खुलकर मैदान में उतर आई है. कमेटी ने फिल्म हटाने पर कड़ी नाराजगी जताई है और ऐलान किया है कि वह खुद लोगों को ये फिल्म दिखाएगी. इसके साथ ही जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर स्कूलों और कॉलेजों में सेमिनार भी आयोजित किए जाएंगे.

'सच्चाई को दबाना गलत है'

मंगलवार को DSGMC के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने कहा कि 'सतलुज' मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी पर आधारित फिल्म है. इसमें दिखाया गया है कि कैसे उन्होंने पंजाब में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को दुनिया के सामने लाने की कोशिश की थी.

कालका ने कहा- जसवंत सिंह खालड़ा ने 25 हजार ऐसे शवों के सबूत जुटाए थे, जिनका अंतिम संस्कार 'लावारिस' बताकर किया गया था. उन्होंने इस मुद्दे को सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया. ऐसे दौर की सच्चाई लोगों तक पहुंचने से रोकना बिल्कुल गलत है. इससे पूरी सिख कम्युनिटी में नाराजगी है.

अब होगी पब्लिक स्क्रीनिंग

DSGMC ने साफ कहा है कि वह फिल्म को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएगी. इसके लिए सभी गुरुद्वारा कमेटी सदस्यों से अपने-अपने इलाकों में फिल्म डाउनलोड कर स्क्रीनिंग करने को कहा गया है.

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इतना ही नहीं, कमेटी जल्द ही अपने स्कूलों और कॉलेजों के चेयरपर्सन के साथ बैठक करेगी. हर कॉलेज में जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके काम पर सेमिनार आयोजित किए जाएंगे ताकि नई पीढ़ी उनके योगदान के बारे में जान सके.

कालका ने कहा- अगर एक सामाजिक कार्यकर्ता इतना बड़ा बदलाव ला सकता है, तो हम सब मिलकर समाज के लिए और भी बहुत कुछ कर सकते हैं.

क्या है 'सतलुज' की कहानी?

हनी त्रेहान के डायरेक्शन में बनी 'सतलुज' में दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालड़ा का किरदार निभाया है. फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक बैंक क्लर्क से मानवाधिकार कार्यकर्ता बने खालड़ा ने 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में कथित अवैध हत्याओं और गुप्त अंतिम संस्कारों का मामला उजागर किया.

साल 1995 में जसवंत सिंह खालड़ा रहस्यमय तरीके से लापता हो गए थे. करीब 10 साल बाद पंजाब पुलिस के चार कर्मियों को उनके अपहरण, यातना और कथित हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया. हालांकि आज तक उनका शव बरामद नहीं हो सका.

आखिर क्यों विवादों में है फिल्म?

'सतलुज' का नाम पहले 'पंजाब 95' था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म की रिलीज से पहले CBFC ने इसमें 120 से ज्यादा कट लगाने की मांग की थी. मेकर्स ने इन बदलावों को स्वीकार नहीं किया और फिल्म लंबे समय तक रिलीज नहीं हो सकी.

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हाल ही में फिल्म को बिना किसी कट के नए नाम 'सतलुज' के साथ ZEE5 पर रिलीज किया गया था. लेकिन रिलीज के महज दो दिन बाद ही इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया. ZEE5 ने सिर्फ इतना कहा कि कुछ 'ताजा घटनाक्रम' की वजह से फिल्म हटाई गई है. वहीं, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि फिल्म को आईटी नियमों के कथित उल्लंघन के कारण हटाया गया.

फिल्म में दिलजीत दोसांझ के अलावा अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान भी अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं.

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