एक्टर दानिश पंडोर पिछले 6 महीने में दो बार बड़े पर्दे पर एक हिंसक पाकिस्तानी किरदार के रोल में नजर आ चुके हैं. ब्लॉकबस्टर धुरंधर 2 में दानिश ने गैंगस्टर उजैर बलोच का किरदार निभाया था. इस समय जनता की फेवरेट बन चुकी मैं वापस आऊंगा में उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बंटवारे में दंगाइयों की एक टोली के नेता, अफजल का रोल किया है. इम्तियाज अली की फिल्म में हिंसा का लेवल धुरंधर जैसा तो हरगिज नहीं है, मगर उनकी कहानी के छोटे से रोल में दानिश के हुनर का एक अलग हिस्सा नजर आया.
अब दानिश ने किरदारों को लेकर अपनी चॉइस पर बात की है. दानिश ने बताया कि उन्हें स्क्रीन टाइम से ज्यादा, किरदार के असर की परवाह रहती है. उन्हें फिल्म की किसी भी चीज से ज्यादा इस बात की चिंता रहती है कि उनका किरदार लोगों को याद रहेगा या नहीं.
वैरायटी इंडिया से खास बातचीत में उन्होंने कहा, 'मैं हमेशा मैं वापस आऊंगा जैसी अच्छी स्क्रिप्ट्स का हिस्सा बनना चाहूंगा. मेरे लिए यही सबसे ज्यादा जरूरी है. स्क्रीन टाइम कितना है, उससे ज्यादा मायने यह रखता है कि आपका किरदार दर्शकों तक क्या पहुंचाता है.'
उन्होंने आगे कहा, 'मैं स्क्रीन टाइम को लेकर बिल्कुल टेंशन नहीं लेता. कई कलाकार फिल्मों में लंबे समय तक नजर आते हैं, लेकिन दर्शकों पर कोई असर नहीं छोड़ पाते. उनका किरदार कुछ कह ही नहीं रहा होता.'
दानिश का कहना है कि उनके लिए सबसे बड़ी सफलता यही है कि दर्शक सिनेमाघर से बाहर निकलते समय उनके किरदार और एक्टिंग के बारे में सोचें. दानिश ने कहा कि मैं वापस आऊंगा में उनके किरदार की अपनी अहमियत थी और उनके लिए यही बात सबसे ज्यादा मायने रखती है.
दानिश को धुरंधर के बाद से ही लोग पहचानने लगे थे, लेकिन उन्होंने बताया कि वह मैं वापस आऊंगा पहले शूट कर चुके थे. धुरंधर और मैं वापस आऊंगा जैसी फिल्मों ने उन्हें इस साल जनता का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाले एक्टर्स में खड़ा कर दिया है. दानिश ने कहा कि इस बात का क्रेडिट भी उनके रोल सेलेक्शन को जाता है.
उन्होंने आगे कहा, 'अगर आप किसी सीन में कुछ खास कर ही नहीं रहे हैं, तो उस सीन का कोई महत्व नहीं रह जाता. इसलिए मेरे लिए जरूरी यह है कि मेरा किरदार किसी दृश्य को बना सके या बदल सके, न कि सिर्फ लंबे समय तक स्क्रीन पर दिखाई दे.'