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सपा ने 4 तो बीजेपी ने खरीदे 9 पर्चे... आज हो सकता है राज्यसभा कैंडिडेट्स का ऐलान, नामांकन की कल आखिरी तारीख

उत्तर प्रदेश में 2024 के राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं. बीजेपी और सपा दोनों अपनी-अपनी उम्मीदवार सूची अंतिम रूप देने की तैयारी में हैं.

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राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. नामांकन की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है और इससे पहले आज बीजेपी और एनडीए अपने राज्यसभा उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर सकते हैं. वहीं, समाजवादी पार्टी भी अपने तीसरे उम्मीदवार को लेकर पत्ते खोल सकती है.

राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों खेमों की तैयारियों का अंदाजा नामांकन पत्रों की खरीद से भी लगाया जा सकता है. समाजवादी पार्टी ने चार नामांकन पत्र खरीदे हैं, जबकि बीजेपी की तरफ से नौ पर्चे खरीदे गए हैं. ऐसे में अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में उतारे जाने की स्थिति में राज्यसभा चुनाव में मुकाबला देखने को मिल सकता है.

तीसरे उम्मीदवार को लेकर अभी भी स्थिति साफ नहीं

समाजवादी पार्टी पहले ही रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी है और दोनों अपना नामांकन भी दाखिल कर चुके हैं. हालांकि, तीसरे उम्मीदवार को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं हुई है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले कह चुके हैं कि अगर पार्टी पर्याप्त संख्या का इंतजाम कर लेती है तो तीसरा उम्मीदवार भी मैदान में उतारा जाएगा.

तीसरे उम्मीदवार के लिए सपा को अपने मौजूदा संख्याबल से करीब आधा दर्जन अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है. ताजा रिपोर्टों में भी तीसरे उम्मीदवार को लेकर सपा की तैयारियों का जिक्र है.

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दूसरी तरफ बीजेपी ने भी उत्तर प्रदेश से अपने उम्मीदवारों के नामों का अभी ऐलान नहीं किया है. पार्टी की तरफ से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम प्रमुखता से चर्चा में है. पुरी का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल भी समाप्त होने वाला है. उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है.

यह भी पढ़िएः यूपी में राज्यसभा चुनाव 26 और 27 के फेर में फंसा, क्या सपा को फिर चोट देगी बीजेपी?

9 अक्टूबर तक नाम लिए जा सकेंगे वापस

नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है, जबकि 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे. ऐसे में आज बीजेपी के उम्मीदवारों और सपा के संभावित तीसरे प्रत्याशी के नाम सामने आने के बाद यह तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है कि राज्यसभा की अतिरिक्त सीट के लिए सीधा मुकाबला होगा या नहीं.

बता दें कि विधानसभा में विधायकों के मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से बीजेपी सात सीटें आसानी से जीत लेगी और सपा की दो सीटों पर जीत तय मानी जा रही है. असली मुकाबला 10वीं राज्यसभा सीट को लेकर है, जिस पर काबिज होने के लिए सपा और बीजेपी के बीच शह-मात का खेल शुरू हो गया है.

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क्या है सीटों का गुणा-गणित?

यूपी विधानसभा के कुल 403 सदस्यों में से वर्तमान में 397 विधायक हैं. ऐसे में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 38 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत है. बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास कुल 292 विधायक हैं, जबकि सपा गठबंधन के पास 103 विधायक हैं. एनडीए में बीजेपी के 256, अपना दल (एस) के 13, आरएलडी के 9, सुभासपा के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक हैं. दो विधायक राजा भैया की पार्टी के हैं. इन्हें मिलाकर यह आंकड़ा 291 विधायकों का होता है. 

वहीं, सपा और कांग्रेस को मिलाकर कुल 103 विधायक हैं. राज्यसभा की एक सीट के लिए 38 विधायकों की जरूरत के आधार पर बीजेपी को सात सीटें जीतने के लिए 266 विधायक चाहिए होंगे, जिसके बाद उसके पास 26 सरप्लस (अतिरिक्त) वोट बचेंगे. इसके बाद बीजेपी को आठवीं सीट जीतने के लिए 12 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी.

वहीं, राज्यसभा की 2 सीटों को जिताने के लिए सपा को 76 वोटों की जरूरत है, जिसके बाद सपा के पास भी करीब 27 सरप्लस वोट बचते हैं. सपा को तीसरी सीट जीतने के लिए 11 एक्स्ट्रा वोटों की जरूरत है. यही 11-12 वोटों का अंतर इस चुनाव को बेहद दिलचस्प और कांटे की टक्कर बना रहा है. 

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