गोवर्धन ब्रज का एक ऐतिहासिक शहर है जो भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत से गहराई से जुड़ा है. तीर्थयात्री प्रसिद्ध परिक्रमा मार्ग पर इस पर्वत की परिक्रमा करते हैं. यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित है. यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से हिंदू तीर्थयात्रियों पर निर्भर है जो मथुरा और वृंदावन के बाद यहां आते हैं. यह शहर एक सब-डिविजन लेवल का केंद्र और नगर पंचायत भी है.
गोवर्धन एक सामान्य विधानसभा क्षेत्र है और मथुरा लोकसभा सीट के पांच हिस्सों में से एक है. 1956 के परिसीमन आदेश के तहत बने इस क्षेत्र में पहली बार 1957 में विधानसभा चुनाव हुए थे. 2008 में इसकी सीमाएं फिर से तय की गईं. अब इसमें गोवर्धन, राधाकुंड और सोनख नगर पंचायतों के पूरे इलाके के साथ-साथ गोवर्धन, वृंदावन, कोसी खुर्द, मथुरा और बड़ कानूनगो सर्कल के कई गांव भी शामिल हैं, जिससे इसका स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण हो गया है.
बनने के बाद से गोवर्धन में 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. यहां की चुनावी राजनीति में मुख्य रूप से दो राष्ट्रीय पार्टियों- बीजेपी और कांग्रेस का दबदबा रहा है. अलग-अलग चरणों में बीजेपी ने पांच और कांग्रेस ने चार बार जीत हासिल की है. कांग्रेस के कमजोर होने के बाद बीजेपी का प्रभाव बढ़ा. जनता दल ने यह सीट दो बार जीती है, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार, भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी, जनता पार्टी (सेक्युलर), राष्ट्रीय लोक दल (RLD) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने एक-एक बार यहां जीत हासिल की है.
राजकुमार रावत ने 2012 में BSP को यहां एकमात्र जीत दिलाई थी. उन्होंने RLD के मेघश्याम सिंह को 21,495 वोटों से हराया था. 2017 में बीजेपी, जो पहले तीसरे स्थान पर रही थी, आगे आ गई. तब बीजेपी उम्मीदवार करिंदा सिंह ने BSP के मौजूदा विधायक राजकुमार रावत को 33,009 वोटों से हराया. बाद में मेघश्याम सिंह बीजेपी में शामिल हो गए और 2022 में पार्टी का टिकट हासिल किया. उन्होंने BSP के राजकुमार रावत को फिर से हराकर बीजेपी के लिए यह सीट बरकरार रखी. इस बार जीत का अंतर बढ़कर 42,507 वोट हो गया. गोवर्धन इलाके में लोकसभा चुनावों में भी बीजेपी का दबदबा दिखता है. 2009 में, उसके सहयोगी RLD ने BSP पर 29,258 वोटों की बढ़त बनाई थी. उस गठबंधन के खत्म होने के बाद, बीजेपी ने मथुरा सीट पर अकेले चुनाव लड़ा और गोवर्धन में बड़ी बढ़त हासिल की. 2014 में उसने RLD पर 60,660 वोटों की बढ़त बनाई और 2019 में भी RLD से 36,915 वोट आगे रही. 2024 में, BSP मुख्य चुनौती देने वाली पार्टी बनकर उभरी, लेकिन फिर भी बीजेपी से 30,309 वोट पीछे रही. बीजेपी की हेमा मालिनी को 82,394 वोट मिले और BSP के चौधरी सुरेंद्र सिंह को 52,085 वोट मिले.
गोवर्धन में वोटरों की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 में यहां 2,72,700 रजिस्टर्ड वोटर थे, 2017 में 3,11,396, 2019 में 3,17,899, 2022 में 3,34,234 और 2024 में 3,42,502 वोटर थे. वोटिंग प्रतिशत ज्यादा रहा, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में इसमें 16 प्रतिशत से ज्यादा की भारी गिरावट आई, जिससे पता चलता है कि वोटर शायद कुछ सुस्त हो गए थे या उन्हें लग रहा था कि बीजेपी की जीत तो तय ही है. वोटिंग प्रतिशत 2012 में 67.41%, 2017 में 66.51%, 2019 में 62.13%, 2022 में 66.42% और 2024 में 50.23% रहा.
गोवर्धन मुख्य रूप से हिंदू-बहुल निर्वाचन क्षेत्र है, जहां जाट, ब्राह्मण, ठाकुर और अनुसूचित जातियां इसकी राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं. यहां के वोटर्स में अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी लगभग 23.54 प्रतिशत है, जबकि मुस्लिम आबादी करीब 8 प्रतिशत है. ब्रज क्षेत्र के इस हिस्से में मुस्लिम आबादी आम तौर पर कम है, इसलिए वे यहां चुनाव नतीजों पर कोई बड़ा असर नहीं डालते. यह सीट मुख्य रूप से ग्रामीण है. यहां 85.59 प्रतिशत वोटर गांवों में और 14.41 प्रतिशत शहरी इलाकों में रहते हैं.
गोवर्धन का इतिहास भगवान कृष्ण और गिरिराज पर्वत से जुड़ा है. माना जाता है कि उन्होंने भारी बारिश से ग्रामीणों को बचाने के लिए इस पर्वत को अपनी उंगली पर उठाया था. इस घटना को 'गोवर्धन लीला' के रूप में याद किया जाता है. गोवर्धन पर्वत की बलुआ पत्थर की पहाड़ी और उसके चारों ओर बना 21 किलोमीटर लंबा परिक्रमा मार्ग यहां के लोगों की धार्मिक जिंदगी का अहम हिस्सा है. मानसी गंगा, कुसुम सरोवर, राधा कुंड, श्याम कुंड और दान घाटी मंदिर जैसी पवित्र जगहों पर साल भर श्रद्धालु आते रहते हैं. इस शहर का औपचारिक इतिहास मथुरा और ब्रज के व्यापक इतिहास का हिस्सा है, लेकिन वैष्णव परंपरा में इसकी आध्यात्मिक पहचान खास है.
भौगोलिक दृष्टि से, गोवर्धन ब्रज के जलोढ़ मैदान में बसा है. यहां की पहाड़ी और आस-पास की झीलें इस इलाके को एक खास भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान देती हैं. खेती और तीर्थयात्रा दोनों ही यहां की अर्थव्यवस्था को सहारा देते हैं. आस-पास के गांवों के किसान अनाज और डेयरी उत्पाद सप्लाई करते हैं, जबकि दुकानें, लॉज, खाने-पीने की जगहें और ट्रांसपोर्ट सर्विस परिक्रमा करने वाले और आस-पास के मंदिरों में आने वाले तीर्थयात्रियों की जरूरतें पूरी करती हैं. शहर का प्रशासनिक ढांचा छोटा है, लेकिन एक धार्मिक केंद्र होने के नाते इसका महत्व इसके आकार से कहीं ज्यादा है.
गोवर्धन एक सिंगल-लाइन लोकल रेल सर्विस के जरिए मथुरा से जुड़ा है. गोवर्धन स्टेशन और मथुरा जंक्शन के बीच लगभग 26 किलोमीटर की दूरी तक ट्रेनें चलती हैं. मथुरा जंक्शन इस इलाके में आगे की यात्रा के लिए मुख्य रेलवे स्टेशन का काम करता है, जबकि बसें, शेयर्ड गाड़ियां और प्राइवेट ट्रांसपोर्ट तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों की ज्यादातर आवाजाही को संभालते हैं. सड़क मार्ग से गोवर्धन, मथुरा, वृंदावन और कोसी कलां से जुड़ा हुआ है, और आगे आगरा तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आस-पास के राज्यों के अन्य केंद्रों तक भी जाता है. मथुरा लगभग 26 किमी, वृंदावन लगभग 22 से 24 किमी, कोसी कलां सड़क मार्ग से लगभग 40 किमी, आगरा लगभग 65 से 70 किमी, हरियाणा में फरीदाबाद और पलवल क्रमशः लगभग 90 से 100 किमी और 55 से 60 किमी, दिल्ली लगभग 150 किमी और राज्य की राजधानी लखनऊ सड़क मार्ग से लगभग 350 किमी दूर है.
2014 के बाद से यहां हुए पिछले पांच चुनावों में जीत या बढ़त के मजबूत रिकॉर्ड को देखते हुए, बीजेपी को गोवर्धन में कोई खास खतरा महसूस नहीं हो रहा है. RLD की NDA में वापसी ने गठबंधन को जाट मतदाताओं के लिए और अधिक आकर्षक बनाकर तथा बीजेपी के आधार को मजबूत करके उसकी स्थिति को और बेहतर किया है. कांग्रेस के कमजोर होने और समाजवादी पार्टी के ब्रज के इस हिस्से में अपनी पकड़ बनाने के लिए संघर्ष करने के कारण, BSP फिर से मुख्य चुनौती देने वाली पार्टी के रूप में उभर सकती है, लेकिन बीजेपी की मौजूदा बढ़त को गंभीरता से चुनौती देने के लिए उसे अपने मुख्य SC मतदाताओं से आगे बढ़कर कहीं अधिक मजबूत लामबंदी की आवश्यकता होगी.
(अजय झा)
Rajkumar Rawat
BSP
Preetam Singh
RLD
Deepak Chaudhary
INC
Nota
NOTA
Sharma Vipul
IND
Meghshyam
IND
Annat Koshik
AAAP
Sanjay Singh
IND
Prem Singh
ASPKR
Peetam
IND
Pradeep Kumar
IND
Bhuri
RSOSP
Ashok
RSVP
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