उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मीयां तेज हो गई है. सत्तारूढ़ बीजेपी और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी अभी से अपनी-अपनी तैयारियों में जुट गई हैं. जहां बीजेपी अपने संगठन को बूथ स्तर पर परख रही है, वहीं समाजवादी पार्टी टिकट वितरण के लिए आंकड़ों और डेटा पर खास ध्यान दे रही है.
बीजेपी इस बार बूथ सम्मेलनों के जरिए अपनी चुनावी तैयारियों को मजबूत कर रही है. पार्टी ने प्रदेश, क्षेत्रीय और जिला स्तर के पदाधिकारियों को कई पहलुओं पर काम करने के निर्देश दिए हैं.
बूथ सम्मेलनों के लिए क्षेत्र और जिला स्तर पर एक संयोजक और दो सह-संयोजकों की नियुक्ति की जाएगी. हर सम्मेलन के लिए चीफ गेस्ट का नाम प्रदेश संगठन और क्षेत्रीय अध्यक्ष आपसी चर्चा के बाद तय करेंगे.
बीजेपी विधानसभा स्तर पर एक कार्यक्रम संयोजक बनाएगी. ये संयोजक स्थानीय विधायक या साल 2022 के बीजेपी प्रत्याशी के साथ तालमेल बिठाकर रणनीति तैयार करेगा. इन सम्मेलनों के आयोजन की पूरी जिम्मेदारी वर्तमान विधायक, पूर्व प्रत्याशी और जिलाध्यक्ष के तय किए गए जनप्रतिनिधियों पर होगी.
कमजोर सीटों की पहचान और नेताओं का आकलन
बीजेपी ने सभी विधानसभा क्षेत्रों में 2022 का चुनाव लड़ चुके उम्मीदवारों की लिस्ट तैयार करने के लिए कहा है. इसके जरिए मौजूदा विधायकों की सांगठनिक और राजनीतिक स्थिति का बारीकी से आकलन किया जाएगा. जिन विधायकों का प्रदर्शन कमजोर रहा है और जो सीटें पार्टी के लिए चुनौती से भरी हैं, उनकी एक अलग लिस्ट बनाई जा रही है.
पार्टी न सिर्फ अपनी कमजोरियों को ढूंढ रही है, बल्कि विपक्ष के मजबूत और संभावित उम्मीदवारों की लिस्ट भी तैयार कर रही है. बीजेपी पहले ही तीन चरणों का सर्वे पूरा कर चुकी है. अब इन बूथ सम्मेलनों के जरिए सीटों का जमीनी फीडबैक लिया जाएगा. इन सम्मेलनों को नए जिलाध्यक्षों की कार्यक्षमता और संगठनात्मक क्षमता की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है.
समाजवादी पार्टी का जातिगत आंकड़ों पर जोर
दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी ने 2027 के चुनाव में टिकट बांटने के लिए बिल्कुल नया तरीका अपनाया है. सपा इस बार 'डेटा-संचालित' टिकट वितरण की रणनीति पर काम कर रही है. पार्टी नेतृत्व ने टिकट के दावेदारों और संभावित प्रत्याशियों को जमीनी स्तर पर काम सौंप दिया है.
संभावित उम्मीदवारों को अपने-अपने क्षेत्रों के जातिगत आंकड़े जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है. उन्हें क्षेत्रवार जातीय आबादी का एक विस्तृत ब्यौरा तैयार करना होगा. इसके अलावा, उम्मीदवारों को पिछले चुनावों के वोटिंग ट्रेंड का गहराई से विश्लेषण करने को भी कहा गया है.
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समाजवादी पार्टी का फोकस इस बात पर है कि स्थानीय स्तर पर कौन-सी बिरादरियां सबसे ज्यादा प्रभावशाली हैं और उनका राजनीतिक झुकाव किस तरफ है. इन स्थानीय प्रभावशाली जातियों को तवज्जो दी जाएगी. पार्टी का मानना है कि इन आंकड़ों के आधार पर टिकट बांटने से उनकी जीत की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी.