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कौन हैं BJP के हितेंद्र नाथ गोस्वामी, जिन्होंने असम के जोरहाट में गौरव गोगोई को चटाई धूल

असम के जोरहाट में बीजेपी नेता हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई को 23 हजार वोटों से हराकर बड़ी जीत दर्ज की. साढ़े तीन दशक के अनुभव के दम पर गोस्वामी छठी बार विधायक बने. शांत और जमीनी अभियान उनकी जीत की खास वजह रहा. पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे सांसद गौरव गोगोई को हार मिली. कुल मिलाकर अनुभव ने युवा चुनौती पर बाजी मार ली.

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हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने गौरव गोगोई को 23 हजार वोटों से हराया. Photo Social Media
हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने गौरव गोगोई को 23 हजार वोटों से हराया. Photo Social Media

असम के जोरहाट में इस बार बीजेपी के दिग्गज नेता हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने बड़ी जीत दर्ज की है. उन्होंने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई को करीब 23 हजार वोटों से हराकर साफ संदेश दे दिया कि जमीनी पकड़ आज भी उनके साथ है.

करीब साढ़े तीन दशक से राजनीति में सक्रिय गोस्वामी ने इस जीत के साथ विधानसभा में अपनी छठी पारी पक्की कर ली. खास बात यह रही कि उन्होंने बिना ज्यादा शोर-शराबे के, शांत और जमीनी स्तर पर अभियान चलाकर यह जीत हासिल की.

जोरहाट से लोकसभा सांसद हैं गौरव गोगोई
वहीं गौरव गोगोई के लिए यह चुनाव खास था, क्योंकि वह पहली बार विधानसभा में एंट्री करने की कोशिश कर रहे थे. फिलहाल वह जोरहाट से लोकसभा सांसद हैं, लेकिन इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

67 साल के गोस्वामी ने अपनी राजनीतिक शुरुआत असम आंदोलन के दौरान छात्र नेता के रूप में की थी. बाद में वह असम गण परिषद से जुड़े और 1991 से लगातार तीन बार जोरहाट से विधायक बने. 1996 से 2001 तक वह राज्य सरकार में मंत्री भी रहे.

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बीजेपी सरकार में विधानसभा अध्यक्ष रहे
2014 में एजीपी से अलग होकर बीजेपी में शामिल हुए गोस्वामी ने 2016 में जोरहाट सीट जीती और उसके बाद लगातार अपनी पकड़ बनाए रखी. बीजेपी सरकार में वह विधानसभा अध्यक्ष भी रह चुके हैं.
कुल मिलाकर, इस बार जोरहाट में अनुभव और जमीनी जुड़ाव ने युवा चुनौती पर भारी पड़ते हुए बीजेपी को बड़ी जीत दिला दी.

असम में इस बार बीजेपी का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा. सुबह 8 बजे से राज्य के 35 जिलों में बने 40 मतगणना केंद्रों पर वोटों की गिनती शुरू हुई. सबसे पहले डाक मतपत्रों की गिनती हुई, इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के राउंड शुरू हुए. इस चुनाव में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में थे, जिससे यह मुकाबला सत्तारूढ़ एनडीए और कांग्रेस नेतृत्व वाले विपक्ष दोनों के लिए अहम बन गया.

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