पंजाब का हर जिला अपनी एक पहचान लेकर चलता है. ऐसे ही मालवा क्षेत्र का बरनाला जिला अपनी ऐतिहासिक विरासत, राजनीतिक चेतना और खेती पर आधारित संस्कृति के लिए जाना जाता है. पंजाब के सबसे युवा जिलों में शामिल बरनाला राज्य के राजनीतिक और सामाजिक ढांचे में भी अहम भूमिका रखता है.
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिहाज से जिले की 3 विधानसभा सीटें राजनीतिक दलों के लिए अहम हैं. वैसे तो इस जिले का इतिहास पटियाला रियासत से जुड़ा है, जबकि इसकी अर्थव्यवस्था में खेती और उद्योग की प्रमुख भूमिका है.
बरनाला का इतिहास
सबसे पहले इस जिले की हिस्ट्री की बात करते हैं. बरनाला कभी पटियाला रियासत की राजधानी हुआ करता था. पटियाला को प्रमुख रियासत के रूप में स्थापित किए जाने के बाद बरनाला को उसका जिला मुख्यालय घोषित किया गया था. उस समय बठिंडा और मानसा जैसे क्षेत्र इसकी तहसीलों में शामिल थे.
वैसे बरनाला लंबे समय तक संगरूर जिले का प्रमुख हिस्सा रहा. प्रशासनिक सुविधा और स्थानीय विकास की जरूरतों को देखते हुए 19 नवंबर 2006 को इसे पंजाब का स्वतंत्र जिला घोषित किया गया. सिख इतिहास और परंपराओं में इस क्षेत्र का खास स्थान रहा है. यहां के लोग अपनी क्रांतिकारी सोच और जुझारू स्वभाव के लिए जाने जाते हैं.
विधानसभा सीटें और राजनीतिक समीकरण
पंजाब विधानसभा में बरनाला जिले की कुल 3 सीटें हैं. इन सीटों पर राजनीतिक गतिविधियां सक्रिय रही हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव और उसके बाद के राजनीतिक घटनाक्रमों के मुताबिक, इन सीटों के समीकरण अलग-अलग रहे हैं.
बरनाला सीट संख्या 103 जिले की सबसे महत्वपूर्ण सीट है. 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां आम आदमी पार्टी के टिकट पर गुरमीत सिंह मीत हेयर ने जीत दर्ज की थी. बाद के राजनीतिक बदलावों और नवंबर 2024 के उपचुनाव जैसे घटनाक्रमों के कारण इस सीट के समीकरण लगातार बदलते रहे. यहां कांग्रेस और दूसरे दलों ने भी कड़ी टक्कर दी, अभी कांग्रेस के कुलदीप सिंह ढिल्लों यहां से विधायक हैं.
भदौर सीट संख्या 102 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. 2022 के चुनाव में इस चर्चित सीट से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार लाभ सिंह उगोके ने जीत हासिल की थी.
महला कलां सीट संख्या 104 भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. 2022 के चुनाव में यहां आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार कुलवंत सिंह पंडोरी विजयी रहे थे.
विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए बरनाला की तीनों सीटों पर आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा समेत सभी प्रमुख दलों की नजर है. यहां के मतदाता विकास, बेरोजगारी, स्थानीय बुनियादी ढांचे और खेती से जुड़े मुद्दों के आधार पर मतदान करते आए हैं.
प्रशासनिक और भौगोलिक ढांचा
क्षेत्रफल के हिसाब से बरनाला पंजाब के छोटे जिलों में शामिल है. जिले का मुख्यालय बरनाला है. यहां 2 उपमंडल बरनाला और तपा हैं. तपा, भदौर और धनौला इसकी तहसील और उपतहसील हैं. जिले में बरनाला, सेहना और महला कलां नाम के 3 विकास खंड हैं. इसके तहत कुल 5 नगर निकाय और कौंसिलें आती हैं.
बरनाला चारों ओर से पंजाब के दूसरे प्रमुख जिलों से घिरा है. इसकी सीमाएं संगरूर, बठिंडा और लुधियाना जैसे जिलों से मिलती हैं. जिले की ज्यादातर जमीन समतल और उपजाऊ है, जो खेती और उससे जुड़े कारोबार के लिए अनुकूल है.
2011 की जनगणना के आंकड़े
भारत की 2011 की जनगणना के मुताबिक, बरनाला की कुल आबादी 5,96,294 थी. यह पंजाब के सबसे कम आबादी वाले जिलों में शामिल है. जिले का जनसंख्या घनत्व 419 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था. यहां प्रति 1000 पुरुषों पर 876 महिलाएं थीं और साक्षरता दर 68.9% थी.
जिले में सिख और हिंदू समुदाय के लोग बहुसंख्यक हैं, जबकि दूसरे समुदायों के लोग भी यहां सौहार्द के साथ रहते हैं. पंजाबी यहां की मुख्य भाषा है और आम बोलचाल, साहित्य तथा संस्कृति में इसका प्रमुखता से इस्तेमाल होता है.
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खेती, उद्योग और खान-पान
बरनाला जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती पर आधारित है. गेहूं और धान यहां की प्रमुख फसलें हैं. जिले ने औद्योगिक क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई है. धनौला में स्थित ट्राइडेंट ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज इस क्षेत्र का प्रमुख औद्योगिक केंद्र है, जो बड़े स्तर पर रोजगार और आर्थिक विकास में योगदान देता है.
यहां के खान-पान में पारंपरिक पंजाबी संस्कृति की झलक मिलती है. मक्की की रोटी, सरसों का साग, दाल मखनी और शुद्ध देसी घी से बने पकवान लोगों के भोजन का मुख्य हिस्सा हैं. सुबह की शुरुआत ताजी लस्सी और परांठों के साथ होती है. मेहमानों की खातिरदारी यहां की संस्कृति की प्रमुख खासियत है.
धार्मिक स्थल, मेले और संस्कृति
बरनाला और आसपास के इलाकों में कई स्थल इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को दिखाते हैं. जिले में कई प्राचीन गुरुद्वारे, मंदिर और ऐतिहासिक इमारतें हैं, जो पटियाला रियासत के समय की इमारतों की बनावट की याद दिलाती हैं. बैसाखी, लोहड़ी और माघी जैसे त्योहार यहां धूमधाम से मनाए जाते हैं. लोक संगीत के साथ भंगड़ा और गिद्धा जैसे लोक नृत्य यहां के जनजीवन का अहम हिस्सा हैं.
बरनाला आकार में छोटा जिला है, लेकिन इसका इतिहास, औद्योगिक विकास और राजनीतिक जागरूकता इसे खास बनाते हैं. पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर इसकी 3 सीटें राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई हैं, जबकि यहां के लोग विकास और अपने अधिकारों को लेकर सजग हैं.