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'मियां' पॉलिटिक्स-पहचान की जंग, बुलडोजर एक्शन और लोगों का दर्द... असम के धुबरी से ग्राउंड रिपोर्ट

भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित असम के धुबरी जिले में 'मिया' पहचान को लेकर राजनीति गरमाई हुई है. लखीमारी से लेकर संतोषपुर तक, बेदखली और नागरिकता के आरोपों के बीच स्थानीय लोग अपने दशकों पुराने दस्तावेज दिखाकर भारतीय होने का प्रमाण दे रहे हैं, जबकि सियासतदानों के बीच जुबानी जंग जारी है.

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असम के धुबरी से ग्राउंड रिपोर्ट. (photo: ITG)
असम के धुबरी से ग्राउंड रिपोर्ट. (photo: ITG)

असम के धुबरी एक ऐसा जिला है, जहां मुसलमानों की आबादी 75 प्रतिशत से अधिक है. ये जिला बार-बार अवैध आप्रवासन से जुड़े आरोपों का केंद्र रहा है, लेकिन जमीन पर हकीकत ज्यादा जटिल, भावनात्मक और गहरी राजनीतिक है. जैसे ही हम संकरी सड़कों से होते हुए और स्थानीय लोगों से रास्ता पूछते हुए लखीमारी गांव की ओर बढ़ते हैं, जीवन सामान्य सा प्रतीत होता है... किसान सीमा की बाड़ के ठीक बगल में खेतों में काम कर रहे हैं, बच्चे खेल रहे हैं और परिवार अपने दिनचर्या में व्यस्त हैं.

अंतरराष्ट्रीय सीमा, बीएसएफ पोस्ट और ऊंची फेंसिंग के बगल में मौजूद स्थानीय, यूनुस अली दरबारी ने बताया, 'सीमा पार करना आसान नहीं है… यहां एक व्यवस्थित कार्ड सिस्टम है. आप केवल दस्तावेजों के साथ ही सीमा पार कर सकते हैं. मैं बांग्लादेशी नहीं हूं. ये सब महज आरोप हैं… सरकार ने एक भी मुसलमान को निर्वासित नहीं किया है. ‘मियां’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल समाज को बांटने के लिए किया जा रहा है.'

यहां कई लोग दशकों पुराने डॉक्यूमेंट्स दिखा रहे हैं. उनका कहना है कि उनके पास दशकों पुराने दस्तावेज हैं- जमीन के कागजात, विरासत के आंकड़े, पहचान के प्रमाण- ये सभी इस बात को साबित करते हैं कि वो भारतीय नागरिक हैं.

मेरे पास हैं 1921 के डॉक्यूमेंट्स

सेवानिवृत्त शिक्षक शेख मोहीउद्दीन ने कहा, 'मेरे पास 1921 तक के दस्तावेज हैं. मुझे बांग्लादेशी कैसे कहा जा सकता है? हम यहां शांति से रहते हैं… लेकिन ‘मियां’ कहकर पुकारा जाना दुखद है. हम जन्म से भारतीय हैं.'

वो हमे बाहर नहीं निकाल सकते

एक अन्य स्थानीय अयूब शेख का कहना है, 'भले ही मुख्यमंत्री के पास मेरे जितने दस्तावेज न हों… फिर भी वो हमें बाहर नहीं निकाल सकते, ये उत्पीड़न है. मैंने ऐसी राजनीति पहले कभी नहीं देखी… सिर्फ हिंदू-मुस्लिम राजनीति ही देखी है.'

लेकिन यहां पहचान की राजनीति सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि भौतिक रूप भी ले चुकी है. धुबरी के ही संतोषपुर में कई घरों को सरकारी अभियान में अतिक्रमण बताकर ढहा दिया गया.

बुलडोजर एक्शन

अब्दुल राशिद शेख ने बताया कि मेरा घर 2025 और 2026 में दो बार बुलडोजर से गिरा दिया गया. हम यहां 75 वर्षों से रह  रहे हैं. ब्रह्मपुत्र नदी के कटाव के बाद हम यहां आए थे. अगर हम बांग्लादेशी हैं तो हमें मुआवजा क्यों दिया जा रहा है? अब वो हमें नदी के बीचोबीच स्थित जमीन पर जाने के लिए कह रहे हैं.

सरकार की कार्रवाई के बाद अब ढहे हुए मकानों के मलबे के बीच दीवारों के टुकड़े और ईंटें बिखरी पड़ी हैं. कई परिवार अब भी इन खंडहरों की रखवाली कर रहे हैं और उम्मीद लगाए बैठे हैं कि एक दिन वे फिर से घर बनाएंगे.

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'ये हमारा देश...'

शाहनुआलम ने बताया, 'हमें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है ताकि हम देश छोड़ दें… लेकिन हम नहीं छोड़ेंगे. ये हमारा देश है. हमारे पूर्वज यहीं के हैं.'

वहीं, घर ढहने के बाद कई परिवार अस्थायी शिविरों में रहने को मजबूर हो गए हैं. महिलाएं खुले में खाना बना रही हैं और परिवार अस्तित्व और अनिश्चितता के बीच जीवन बिता रहे हैं.

बदरुद्दीन ने सीएम पर साधा निशाना

उधर, असम के AIUDF प्रमुख और सांसद बदरुद्दीन अजमल ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि हिमंता बिस्वा सरमा मुस्लिम समुदाय का दुश्मन है... भला कोई किसी धर्म से नफरत कैसे कर सकता है?

AIUDF प्रमुख  ने दावा किया कि उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लिए कोई काम नहीं किया है. आप हमें मियां कहकर बुलाते हैं, हम आदरणीय लोगों को मियां कहकर संबोधित करते हैं.

असम में मियां को राजनीतिक रूप से तोड़ा नहीं जा सकता, हिमंता जो कह रहे हैं वह पूरी तरह संविधान के खिलाफ है. 2014 से केंद्र में आपकी सरकार है... क्या आपने असम में एक भी बांग्लादेशी की पहचान की है? नहीं... इसके बजाय आप सीएए के जरिए हिंदुओं के लिए सीमाएं खोल रहे हैं. क्या इससे यहां की आबादी नहीं बढ़ेगी?

उन्होंने कहा कि हां, असम में मिया लोग हैं, लेकिन वो बांग्लादेशी नहीं हैं... वो असम के मूल निवासी हैं... यहीं पैदा हुए और पले-बढ़े हैं. क्या वो यहां एक भी बांग्लादेशी मुस्लिम की पहचान नहीं कर पाए? मैंने खुद संसद में कहा था कि अगर एक भी बांग्लादेशी दिखे तो उसे गोली मार दो, लेकिन उन्होंने एक को भी नहीं मारा... क्योंकि असम में कोई बांग्लादेशी मुस्लिम है ही नहीं.

AIUDF चीफ ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर अवैध घुसपैठ हो रही है तो ये सरकार की विफलता है. मिया को कोई डरा नहीं सकता... मिया को भगवान के सिवा किसी से डर नहीं लगता.

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