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NEET Success Story: बिहार के इस गांव में पहली बार बनेगा डॉक्टर, आयुष ने 710 अंक लाकर रचा इतिहास

NEET UG 2026 में बिहार के नवादा निवासी आयुष भालोटिया ने 720 में से 710 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक (AIR) 4 प्राप्त की है. आयुष अपने गांव के पहले डॉक्टर बनने जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि डेली रिवीजन, नियमित मॉक टेस्ट, NCERT की मजबूत तैयारी और 7-8 घंटे की सेल्फ स्टडी उनकी सफलता का सबसे बड़ा मंत्र रहे. उनकी कहानी अब हजारों मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है.

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आयुष भालोटिया ने NEET में 710 नंबर लाकर AIR रैंक 4 हासिल की (Photo ITG)
आयुष भालोटिया ने NEET में 710 नंबर लाकर AIR रैंक 4 हासिल की (Photo ITG)

NEET UG Result 2026: बिहार के नवादा जिले के छोटे से कस्बे वरीसालीगंज में रात से ही जश्न का माहौल है. वजह है 18 वर्षीय आयुष भालोटिया, जिसने देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 में 720 में से 710 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक (AIR) 4 प्राप्त की है. आयुष की यह सफलता सिर्फ उनके परिवार की नहीं, बल्कि पूरे इलाके की उपलब्धि बन गई है. परिवार का दावा है कि आयुष अपने गांव का पहला डॉक्टर बनने जा रहा है. ऐसे में हर कोई जानना चाहता है कि आखिर इस सफलता के पीछे कौन-सी रणनीति थी.

बिहार के नवादा जिले के वरीसालीगंज निवासी आयुष भालोटिया बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहते थे. उनके लिए यह सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि लोगों की सेवा करने का सपना था. समय के साथ यह सपना और मजबूत होता गया. जब दूसरे छात्र करियर के विकल्प तलाश रहे थे, तब आयुष ने अपना लक्ष्य तय कर लिया था. आज वही लक्ष्य उन्हें देश के टॉप मेडिकल अभ्यर्थियों में खड़ा कर चुका है.

710 अंक और AIR-4, पूरे गांव में जश्न

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की ओर से घोषित NEET UG 2026 के नतीजों में आयुष ने 710 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक-4 प्राप्त की. परिणाम सामने आते ही परिवार, रिश्तेदारों और गांव के लोगों ने उन्हें बधाइयां देना शुरू कर दिया. घर पर मिठाइयां बंटी, शुभकामनाओं का सिलसिला शुरू हुआ और देखते ही देखते आयुष पूरे इलाके के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए.

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10वीं से ही दिखा था हुनर

आयुष पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहे हैं. उन्होंने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 96.2 प्रतिशत और 12वीं में 93.8 प्रतिशत अंक प्राप्त किए. बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्होंने पूरी गंभीरता के साथ मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी शुरू की. जब आयुष से उनकी सफलता का राज पूछा गया तो उन्होंने बिना किसी झिझक के कहा डेली रिवीजन और मॉक टेस्ट मेरी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी रहे. आयुष बताते हैं कि सिर्फ पढ़ना काफी नहीं होता. जितना जरूरी नया सीखना है, उससे कहीं ज्यादा जरूरी है उसे बार-बार दोहराना. उनका कहना है कि हर मॉक टेस्ट के बाद वे अपनी गलतियों की सूची बनाते थे. फिर यह समझते थे कि गलती क्यों हुई और अगली बार उसे कैसे रोका जाए. यही प्रक्रिया उन्हें लगातार बेहतर बनाती गई.

NCERT को बनाया सबसे मजबूत हथियार

आयुष का मानना है कि NEET की तैयारी करने वाले छात्रों को सबसे पहले NCERT पर मजबूत पकड़ बनानी चाहिए. वे कहते हैं कि परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए किताबें बदलने से ज्यादा जरूरी है कि जिस किताब से पढ़ रहे हैं, उसे पूरी गहराई से समझें. उनके मुताबिक, बार-बार रिवीजन और प्रश्नों की प्रैक्टिस ही सफलता की असली कुंजी है.

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क्लास के बाद 7 से 8 घंटे सेल्फ स्टडी

आयुष पिछले दो वर्षों से एलन करियर इंस्टीट्यूट के नियमित क्लासरूम छात्र रहे. वे बताते हैं कि क्लासरूम में पढ़ाई के बाद रोजाना 7 से 8 घंटे सेल्फ स्टडी करते थे. हालांकि वे यह भी कहते हैं कि पढ़ाई के घंटे नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता ज्यादा महत्वपूर्ण होती है. उनका पूरा फोकस रोज तय किए गए लक्ष्य को पूरा करने पर रहता था.

मेंटल प्रेशर आया, लेकिन हार नहीं मानी

NEET जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी आसान नहीं होती. आयुष स्वीकार करते हैं कि तैयारी के दौरान कई बार मानसिक दबाव महसूस हुआ. कभी सिलेबस का बोझ, कभी टेस्ट के अंक और कभी खुद से अपेक्षाएं उन्हें परेशान करती थीं. लेकिन ऐसे समय में परिवार और शिक्षकों ने उनका हौसला बढ़ाया. वे कहते हैं कि जब भी मन कमजोर पड़ता था, परिवार उन्हें याद दिलाता था कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती. आयुष अपनी सफलता का श्रेय अपने बड़े भाई अर्पित भालोटिया को भी देते हैं. अर्पित आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई कर चुके हैं और फिलहाल अमेरिका में पीएचडी कर रहे हैं. आयुष बताते हैं कि भाई ने उन्हें सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि समय प्रबंधन, अनुशासन और परीक्षा के दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखने के तरीके भी सिखाए.

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माता-पिता ने हर कदम पर दिया साथ

आयुष के पिता सुनील कुमार भालोटिया सीमेंट और स्टील के कारोबारी हैं. उन्होंने बेटे की पढ़ाई के लिए हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराई. वहीं उनकी मां किरण देवी लगातार उनका मनोबल बढ़ाती रहीं. आयुष कहते हैं कि यह सफलता सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि पूरे परिवार की मेहनत का परिणाम है.

शतरंज से मिलता था दिमाग को आराम

लगातार पढ़ाई के बीच आयुष खुद को तरोताजा रखने के लिए शतरंज खेलते थे. उनका मानना है कि लंबे समय तक पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए किसी न किसी हॉबी का होना जरूरी है. इससे तनाव कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है. आयुष का कहना है कि छोटे शहर या गांव में रहना कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनता. अगर लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदारी से की जाए और सही मार्गदर्शन मिले तो देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में भी सफलता हासिल की जा सकती है. वे कहते हैं कि छात्रों को दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी तैयारी पर ध्यान देना चाहिए.

एलन के छात्रों का रहा शानदार प्रदर्शन

इस बार NEET UG 2026 में एलन करियर इंस्टीट्यूट के छात्रों ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया. जारी परिणामों के अनुसार, आर्यन गुप्ता और पंशुल बंसल ने 715 अंक प्राप्त किए. टाई-ब्रेकर नियम के आधार पर आर्यन गुप्ता को ऑल इंडिया रैंक-1 और पंशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक-2 मिली. वहीं आयुष भालोटिया ने 710 अंक के साथ AIR-4 हासिल की, जबकि एलन के ही छात्र गौरव सिंह ने ऑल इंडिया रैंक-9 प्राप्त की. संस्थान के अनुसार, अब तक उपलब्ध परिणामों में टॉप-10 में एलन के चार और टॉप-100 में 43 छात्र शामिल हैं. एनटीए की 690 या उससे अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों की सूची में भी एलन के 59 छात्र शामिल हैं.

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