आपने कई डिलीवरी पार्टनर या राइडर्स से सुना होगा कि वो ऑफिस के बाद या फिर पार्ट टाइम ये काम करते हैं. लेकिन क्या ऐसा करने पर किसी तरह का फायदा होता है, क्या डिलीवरी पार्टनर के लिए कुछ ऐसे नियम तो नहीं है कि एक दिन में तय घंटे काम करना ही होता है. अगर आपके मन में भी ऐसे ही कुछ सवाल हैं, तो आपकी सारी शंकाएं हम दूर करते हैं.
पार्ट-टाइम डिलीवरी जॉब या गिग वर्क से कमाई को लेकर प्लेटफॉर्म ने पहले ही अपने नियम तय किए हुए हैं. सबसे बड़ी और ज़रूरी बात तो ये है कि किसी भी प्लेटफॉर्म पर आप अपने हिसाब से ये तय कर सकते हैं कि आप किस वक्त, कितनी देर और किस लोकेशन पर काम करना चाहते हैं. यानी ज़रूरी नहीं कि आपको सातों दिन और 10-12 घंटे की शिफ्ट करनी होगी.
हालांकि, पार्ट टाइम इस काम को करने पर आपकी कमाई पर ज़रूर असर पड़ सकता है क्यूंकि स्विगी, जेप्टो, उबर और स्नैबिट जैसे प्लेटफॉर्म पर कमाई शहर, तय दूरी, समय, डिलीवरी ऑर्डर की संख्या, डिमांड, ट्रैफिक, मौसम और कस्टमर रेटिंग पर निर्भर करती है. इसी के साथ काम के घंटे, भुगतान का तरीका, बीमा, फीस और जरूरी दस्तावेजों की भी जानकारी दी गई है.
आप एक महीने में कितना कमाएंगे इसका कोई तय आंकड़ा नहीं है, लेकिन स्विगी में फुल-टाइम या पार्ट-टाइम काम करके ₹30,000/माह तक कमाने का अवसर मिलता है. वहीं स्नैबिट एक्सपर्ट के रूप में ₹45,000/माह तक की कमाई का उल्लेख है. कंपनियां जैसे स्विगी, जेप्टो और उबर आमतौर पर कमाई का भुगतान साप्ताहिक आधार पर सीधे बैंक खाते में करती हैं.
एक उदाहरण के तौर पर समझते हैं कि रोहित नोएडा की एक कंपनी में काम करता है. शाम 5 बजे उसकी ऑफिस की शिफ्ट ख़त्म होती है. वो ऑफिस के बाद रैपिडो/जेप्टो या ऐसे किसी प्लेटफॉर्म पर एक्स्ट्रा टाइम में काम करना चाहता है, तो वो अपने मोबाइल एप पर टाइमिंग का स्लॉट सेलेक्ट कर सकता है.
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जैसे कि शाम को 6 से 9 बजे तक. अब इन 3 घंटे में उसके पास किसी भी तरह के ऑर्डर आ सकते हैं, इसके बाद नहीं आएंगे. इन 3 घंटों में पूरे किए गए ऑर्डर के हिसाब से ही प्रति हफ्ते कंपनी की ओर से पेआउट मिलता है.