असम की सियासत में जब भी सत्ता के गलियारों की बात होती है, तो गुवाहाटी की एक पुरानी इमारत की यादें ताजा हो जाती है. चुनावी नतीजों के रुझान बता रहे हैं कि राज्य में एक बार फिर हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी की वापसी हो रही है. लेकिन इस जीत के पीछे सिर्फ वोट की गणित नहीं, बल्कि एक शानदार शैक्षणिक विरासत भी है. शायद ही देश का कोई ऐसा कॉलेज होगा जिसका दबदबा राज्य की सत्ता पर इतना गहरा हो. असम के अब तक के 15 मुख्यमंत्रियों में से 7 मुख्यमंत्री कॉटन यूनिवर्सिटी (पूर्व में कॉटन कॉलेज) की देन हैं.
सरमा इसी ऐतिहासिक संस्थान के सातवें ऐसे पूर्व छात्र हैं, जिन्होंने कॉलेज के गलियारों से निकलकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का सफर तय किया है. यह महज एक संयोग नहीं बल्कि उस मिट्टी की ताकत है जिसने एक सदी से भी ज्यादा समय से असम को उसके नेता दिए हैं. कॉटन यूनिवर्सिटी जिसे पहले कॉटन कॉलेज के नाम से जाना जाता था जिसे साल 2017 में शिक्षा मंत्री रहे हिमंत बिस्व सरमा ने उसे मान्यता दिलवाई थी.
असम को दिए ये मुख्यमंत्री
सरमा से पहले कॉटन कॉलेज से पढ़ाई कर निकले राज्य के पहले मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोरदोलोई समेत महेन्द्र चौधरी, सरत चंद्र सिन्हा, जोगेन्द्र नाथ हजारिका, हितेस्वर सैकिया और भूमिधर बर्मन राज्य के सीएम के तौर पर पदभार संभाल चुके हैं.
कब हुई थी कॉलेज की स्थापना?
असम की राजनीतिक और बौद्धिक चेतना का केंद्र मानी जाने वाली कॉटन यूनिवर्सिटी की स्थापना 1901 को हुई थी. माना जाता है कि कॉटन कॉलेज का आजादी से पहले भी बोल-बाला था. उस दौर में जब असम के मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए मीलों दूर कोलकाता जाना पड़ता था, तब तत्कालीन मुख्य आयुक्त सर हेनरी स्टेडमैन कॉटन के प्रयासों से इस संस्थान की नींव रखी गई.
एक सदी से भी अधिक समय तक कॉटन कॉलेज के रूप में अपनी पहचान बनाए रखने के बाद, इसकी ऐतिहासिक महत्ता और शैक्षणिक योगदान को देखते हुए साल 2017 में असम सरकार ने इसे एक पूर्ण विश्वविद्यालय का दर्जा दे दिया. यह संस्थान सिर्फ एक यूनिवर्सिटी नहीं है बल्कि असम के इतिहास और वहां के नेतृत्व को गढ़ने वाली एक ऐसी पाठशाला है, जिसने राज्य को अब तक 15 में से 7 मुख्यमंत्री दिए हैं.