देश के लाखों युवाओं के भविष्य और करियर से जुड़ी एक बेहद अहम खबर सामने आ रही है. नीट (NEET), जेईई (JEE Main), सीयूईटी (CUET) और यूजीसी-नेट (UGC-NET) जैसी देश की सबसे बड़ी और संवेदनशील प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने वाली संस्था 'नेशनल टेस्टिंग एजेंसी' (NTA) ने अपने पूरे सिस्टम को नए सिरे से ढालना शुरू कर दिया है.
अक्सर पेपर लीक और धांधली के आरोपों से जूझने वाली NTA ने अब एक ऐसा फुलप्रूफ प्लान तैयार किया है, जिससे पर्चा लीक होने की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी. आइए जानते हैं NTA के इस नए 'मास्टरप्लान' की खास बातें:
5000 से ज्यादा विशेषज्ञों का विशाल पैनल तैयार
NTA ने देश भर के शीर्ष शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, अनुवादकों और विषय विशेषज्ञों का एक बहुत बड़ा पैनल तैयार किया है. सूत्रों के अनुसार, 5,000 से अधिक विशेषज्ञों को विषय-वस्तु तैयार करने, प्रश्न पत्रों की जांच, अनुवाद (AI अनुवाद की समीक्षा) और आंसर-की सत्यापन के लिए एम्पैनल किया गया है.
सबसे खास बात यह है कि इसके लिए आवेदन की कोई अंतिम तिथि तय नहीं की गई है. NTA पूरे साल इस पैनल में नए-नए योग्य विशेषज्ञों को जोड़ता रहेगा ताकि प्रश्न बैंक का दायरा लगातार बढ़ता रहे.
'एग्जाम-अग्नोस्टिक' मॉडल: परीक्षा से चंद मिनट पहले तय होगा पेपर
NTA का मुख्य उद्देश्य इतना विशाल 'क्वेश्चन बैंक' बनाना है कि प्रश्न पत्र तैयार करने या अनुवाद करने वाले विशेषज्ञों को खुद यह पता न हो कि उनके द्वारा तैयार किया गया सवाल किस परीक्षा में और कब पूछा जाएगा.
'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि NTA ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है ताकि परीक्षा शुरू होने से महज कुछ मिनट पहले 'क्वेश्चन बैंक' से रैंडम तरीके से सवालों का चयन करके फाइनल पेपर तैयार किया जा सके. एजेंसी एक ऐसे 'एग्जाम-अग्नोस्टिक' मॉडल पर काम कर रही है, जिससे पूरी परीक्षा प्रणाली किसी एक खास वेंडर, तकनीक या प्लेटफॉर्म पर निर्भर न रहे.
4-लेयर वेरिफिकेशन: कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोगों की नो-एंट्री
NTA के पैनल में जगह पाना इतना आसान नहीं है. विशेषज्ञों को शामिल करने के लिए चार स्तरीय सख्त सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जा रही है.
दस्तावेज़ और योग्यता की जांच: आवेदक की शैक्षणिक पृष्ठभूमि, शोध रिकॉर्ड और अनुभव की पूरी जांच की जाती है.
सब्जेक्ट मैटर कमेटी द्वारा समीक्षा: एक विशेष समिति आवेदक के अकादमिक कद का मूल्यांकन करती है.
बैकग्राउंड चेक (सबसे अहम कदम): यह सुनिश्चित किया जाता है कि पैनल में शामिल होने वाला कोई भी व्यक्ति किसी कोचिंग इंस्टीट्यूट से न जुड़ा हो और न ही उसने छात्रों के लिए कोई अध्ययन सामग्री या क्वेश्चन बैंक तैयार किया हो.
सख्त नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट (NDA): चुने गए विशेषज्ञों को एम्पैनलमेंट के वक्त और हर असाइनमेंट की शुरुआत में एक बेहद कड़े गोपनीयता समझौते पर हस्ताक्षर करने होते हैं.
चाहे ऑनलाइन मोड (CBT) में होने वाले JEE, CUET और NET हों या पेन-पेपर मोड वाला NEET—NTA का यह नया 5,000 विशेषज्ञों का पैनल और 'लास्ट मिनट क्वेश्चन पेपर जनरेशन' वाला सिस्टम देश के करोड़ों परीक्षार्थियों के विश्वास को फिर से बहाल करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है.