कड़ी सुरक्षा के बीच एक बार फिर री-नीट का आयोजन किया गया और 5000 से अधिक केंद्रों पर अब भी परीक्षा चल रही है. 3 मई को पेपर लीक के बाद से NTA ने 21 जून को दोबारा से परीक्षा करवाने का ऐलान किया था. आज परीक्षा का आयोजन दोपहर 2 बजे से शाम 5.15 बजे तक होना है यानी छात्रों को 15 मिनट एक्सट्रा मिलेगा लेकिन सोचिए जरा जिन छात्रों को एक मिनट के देरी की वजह से एंट्री ही नहीं मिली, जिनका सपना चूर हुआ हो, वो इस समय क्या महसूस कर रहे होंगे. ऐसी ही घटना महाराष्ट्र और कर्नाटक से सामने आई है जहां दावा किया जा रहा है कि छात्र 1.30 बजे के बाद पहुंची जिसके बाद उन्हें एंट्री नहीं दी गई.
एक मामला तो ऐसा आया है कि छात्र 1.30 बजे पहुंची लेकिन 1.27 मिनट पर गेट बंद हो गया और वह प्रवेश से वंचित रह गई. इसके बाद से गेट पर फरियाद करते और एंट्री के लिए गिड़गिड़ाते दिखीं और वे छात्राएं रो भी रही थीं.
क्यों नहीं मिला प्रवेश
उम्मीदवारों के मुताबिक, दोपहर 1:29 बजे एक घोषणा की गई कि गेट बंद होने से पहले यह आखिरी मिनट है. ठीक 1:30 बजे NTA के नियम के मुताबिक, मुख्य द्वार बंद कर दिया गया, जो निर्धारित समय के बाद प्रवेश पर रोक लगाता है लेकिन, एग्जाम हॉल का अंदर का गेट भी बंद था और वे अंदर नहीं जा सके.
भोपाल से भी ऐसी खबर आई सामने
इस तरह से भोपाल के दो छात्रों को देर से आने की वजह से नीट परीक्षा में शामिल नहीं होने दिया गया. एक छात्र का तो एग्जाम सेंटर पर आते हुए एक्सीडेंट हो गया जिसके बाद उसे पहले उपचार के लिए लेकर जाया गया और वह परीक्षा केंद्र पर समय से नहीं पहुंच सका. उम्मीदवार के चाचा आमिर कादरी ने कहा कि मैं अपने भतीजे के साथ उसके एग्जाम के लिए यहां आया हूं.

एग्जाम सेंटर जाते समय हमारा एक्सीडेंट हो गया और हमें थोड़ी देर हो गई, क्योंकि मेरे भतीजे को फर्स्ट एड की जरूरत पड़ गई थी. अब जब हम यहां पहुंच गए हैं, तो हमें एंट्री नहीं दी जा रही है. अधिकारी कह रहे हैं कि एग्जाम शुरू हो चुका है और हमें एंट्री नहीं दी जा सकेगी.

आस्था को आहत
इसके अलावा कई उम्मीदवारों ने शिकायत की है कि उन्हें परीक्षा में बैठने नहीं दिया जा रहा है क्योंकि उन्होंने धार्मिक चीजें पहनी हुई है. राजस्थान के अजमेर से बुर्का और हिजाब पहनकर पहुंची छात्रा तो आपत्ति जताई गई. इसके बाद से छात्रा ने कहा कि मैं NEET परीक्षा देने के लिए ब्यावर से आई हूं. जब मैंने 3 मई को परीक्षा दी थी, तब भी मैंने वही कपड़े पहने थे जो अभी पहने हैं- बुर्का और दुपट्टा.
शुरू में उन्होंने कहा कि अंदर जाने के लिए मुझे दुपट्टा हटाना होगा फिर उन्होंने जोर दिया कि मुझे बुर्का भी हटाना होगा. अगर NTA ने हमें इजाजत दी है तो ये लोग हमें रोक नहीं सकते. अगर मुझे परीक्षा देनी है और वे मुझे इन कपड़ों में अंदर नहीं आने देते, तो मैं परीक्षा ही नहीं दूंगी. यह शर्मनाक है कि वे 18 साल के युवाओं के साथ ऐसा कर रहे हैं. परीक्षा मेरे लिए मायने नहीं रखती मेरे लिए मेरा बुर्का और मेरी पहचान मायने रखती है.
काटे गए कलावा
मामला यहीं पर नहीं रुकता है. कई सेंटर्स से यह भी खबर आई है कि छात्रों के हाथ में बंधे कलावे को भी काट दिया गया है. अहमदाबाद के वस्त्रापुर में स्थितपरीक्षा सेंटर के गेट पर सिक्योरिटी कर्मियों के द्वारा कलावा काटकर छात्रों को प्रवेश दिया गया. हालांकि, अभिभावकों के विरोध के बाद में परीक्षा सेंटर को अपनी गलती का एहसास होने पर मुस्लिम छात्राओं को हिजाब के साथ प्रवेश मिला लेकिन जिन छात्र और छात्राओं का कलावा काटा गया था वो वापिस नहीं बांधा जा सका.