देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश का रास्ता माने जाने वाले जेईई एडवांस्ड 2026 के परिणामों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कोटा सिर्फ कोचिंग हब नहीं, बल्कि देश के तकनीकी भविष्य को आकार देने वाला केंद्र बन चुका है. इस साल ऑल इंडिया टॉप-50 में 29 छात्र अकेले कोटा से हैं. यही वजह है कि देश की सबसे प्रतिष्ठित शाखा मानी जाने वाली कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (सीएसई) में भी कोटा के छात्रों का दबदबा देखने को मिलेगा.
सबसे दिलचस्प बात ये है कि देश की नंबर-1 पसंद मानी जाने वाली आईआईटी बॉम्बे की कंप्यूटर साइंस ब्रांच आमतौर पर ऑल इंडिया रैंक 61 तक क्लोज हो जाती है. इस बार टॉप-50 में 29 छात्र कोटा से होने के कारण अनुमान है कि ओपन कैटेगरी की लगभग आधी सीटों पर कोटा के विद्यार्थी प्रवेश प्राप्त करेंगे. इसी तरह आईआईटी दिल्ली की कंप्यूटर साइंस ब्रांच में भी बड़ी संख्या में कोटा के छात्र दाखिला लेंगे, क्योंकि टॉप-500 में 258 छात्र कोटा से हैं.
AIR-1 और AIR-2 भी कोटा से
इस साल जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक-1 पर शुभम कुमार और ऑल इंडिया रैंक-2 पर कबीर छिल्लर रहे हैं. दोनों ने कोटा में रहकर तैयारी की. टॉप रैंकर्स की यह मौजूदगी बताती है कि देशभर के मेधावी छात्र आज भी अपने सपनों को साकार करने के लिए कोटा को सबसे भरोसेमंद गंतव्य मानते हैं.
सिर्फ बॉम्बे-दिल्ली नहीं, सभी शीर्ष IIT में मजबूत मौजूदगी
आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी दिल्ली के अलावा कानपुर, मद्रास, खड़गपुर, रुड़की, गुवाहाटी और हैदराबाद जैसी शीर्ष आईआईटी में भी बड़ी संख्या में कोटा के छात्र प्रवेश लेने के लिए तैयार हैं. विशेषज्ञों के अनुसार ऑल इंडिया रैंक 2500 तक के विद्यार्थियों को कंप्यूटर साइंस या उससे जुड़े प्रीमियम कोर्सेज में प्रवेश मिल जाता है. इस साल टॉप रैंकों में कोटा के छात्रों की मजबूत उपस्थिति को देखते हुए इन सीटों में भी उनकी हिस्सेदारी उल्लेखनीय रहने की संभावना है.
5 हजार के पार पहुंच सकता है IIT चयन का आंकड़ा
पिछले साल देश की 23 आईआईटी में कुल 18,160 सीटें थीं, जिनमें से करीब 4,500 से अधिक सीटों पर कोटा में तैयारी करने वाले विद्यार्थियों का सिलेक्शन हुआ था. इस बार सीटों में बढ़ोतरी और बेहतर परिणामों के कारण यह आंकड़ा 5,000 के पार पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. शिक्षा विशेषज्ञ संजय पाटनी के अनुसार इस साल आईआईटी में कुल 791 नई सीटें जोड़ी गई हैं. वहीं, कंप्यूटर साइंस और संबंधित क्षेत्रों में 54 सीटों की बढ़ोतरी के बाद इनकी कुल संख्या 2,183 हो गई है. सीटों में हुई यह वृद्धि कोटा के विद्यार्थियों के लिए और अधिक अवसर लेकर आई है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बना नई पीढ़ी का पसंदीदा विकल्प
कंप्यूटर साइंस के बाद अब छात्रों की दूसरी सबसे बड़ी पसंद डेटा साइंस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बनकर उभरी है. वर्तमान में यह कोर्स आईआईटी मंडी, रुड़की, गुवाहाटी और भिलाई में चल रहे हैं, जहां पर कुल 204 सीटें मौजूद हैं. इसके अलावा मैथमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसकी विभिन्न आईआईटी में 636 सीटें हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस के बढ़ते प्रभाव के कारण इन नए कोर्सेज की मांग लगातार बढ़ रही है और टॉप रैंकर्स भी इन्हें प्राथमिकता दे रहे हैं.
क्यों कायम है कोटा का दबदबा?
शिक्षा से जुड़े एक्सपर्ट का मानना है कि कोटा की सफलता का सबसे बड़ा कारण यहां विकसित हुआ प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक माहौल, अनुभवी फैकल्टी, टेस्ट-आधारित तैयारी प्रणाली और देशभर से आने वाली प्रतिभाएं हैं. यही वजह है कि हर साल जेईई एडवांस्ड के नतीजों में कोटा की मौजूदगी सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि गुणवत्ता के रूप में भी दिखाई देती है. जेईई एडवांस्ड 2026 के परिणामों ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि देश की शीर्ष आईआईटी में प्रवेश लेने वाले छात्रों की नई पीढ़ी में कोटा का प्रभाव पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुका है. आने वाले कुछ सालों में आईआईटी बॉम्बे, दिल्ली, कानपुर और मद्रास के कैंपसों में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र दिखाई देंगे, जिन्होंने अपने सपनों की उड़ान कोटा की धरती से शुरू की थी.