झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में हुई धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आक्रोश अब देश की सबसे बड़ी अदालत की चौखट तक पहुंच गया है. 'JPSC JSSC REFORM MANCH' ने इस पूरे मामले में सीबीआई (CBI) जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दो हस्तक्षेप याचिकाएं (इंटरवेंशन एप्लीकेशन-IA) दाखिल की हैं.
16 सितंबर को होगी अहम सुनवाई
यह पूरा मामला 'हरिशरण देवगण बनाम झारखंड राज्य' याचिका के तहत सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है. इस मामले की सुनवाई पहले 11 सितंबर 2026 को प्रस्तावित थी. हालांकि, दिल्ली में आयोजित हो रहे ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन के कारण सुरक्षा व प्रशासनिक कारणों से सुनवाई की नई तारीख 16 सितंबर 2026 तय की गई है.
मंच ने इन याचिकाओं के ज़रिए अदालत से हस्तक्षेप की अनुमति मांगी है. अगर सुप्रीम कोर्ट इस आवेदन को स्वीकार कर लेता है, तो देश के शीर्ष वकील छात्रों का पक्ष, पेपर लीक व गड़बड़ियों से जुड़े ठोस साक्ष्य और सीबीआई जांच की अनिवार्यता को सीधे पीठ के सामने रखेंगे.
JPSC JSSC रिफॉर्म मंच ने साफ किया है कि यह कानूनी लड़ाई किसी एक अभ्यर्थी या एक विज्ञापन की नहीं है, बल्कि झारखंड के प्रशासनिक ढांचे की पारदर्शिता और सालों से तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के विश्वास की लड़ाई है. मंच ने छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा है कि शीर्ष अदालत की न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा रखें. छात्रों के हक की आवाज को देश के जाने-माने और प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में पूरी मजबूती के साथ उठाया जाएगा.