देश की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियों, पेपर लीक और तकनीकी खामियों के बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने बड़ा दांव खेला है. अभाविप ने देश की परीक्षा व्यवस्था को फुलप्रूफ और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित हाई पावर्ड टास्क फोर्स के अध्यक्ष नंदन नीलेकणि को एक विस्तृत रोडमैप सौंपा है.
अभाविप का सबसे बड़ा सुझाव NEET समेत प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं को दो चरणों में आयोजित करने और NEET की परीक्षा साल में दो बार कराने की संभावना तलाशने को लेकर है.
देशभर में राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस के बाद तैयार हुआ 'सुझाव पत्र'
एबीवीपी ने यह सुझाव पत्र बंद कमरों में नहीं, बल्कि देशभर के छात्रों और विशेषज्ञों की राय के बाद तैयार किया है. संगठन ने पुणे, नागपुर, भोपाल, दिल्ली, चंडीगढ़ और दक्षिण बिहार में राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित कर स्टूडेंट्स और एजुकेशन एक्सपर्ट्स से सीधे संवाद किया.
इन चर्चाओं के आधार पर परीक्षा सुधारों को तीन हिस्सों यानी तत्काल, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक बदलावों में बांटा गया है.
ABVP की 5 प्रमुख सिफारिशें
पहले चरण में शॉर्टलिस्टिंग के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट हो और दूसरे चरण में अंतिम चयन के लिए मुख्य परीक्षा ली जाए. इससे एक ही दिन की परीक्षा पर छात्रों की निर्भरता और तनाव कम होगा. JEE Main की तर्ज पर NEET को भी साल में दो बार आयोजित करने की संभावना तलाशी जाए, जिससे छात्रों को अपने बेस्ट स्कोर का उपयोग करने का अवसर मिले.
परीक्षा को अधिक से अधिक कंप्यूटर बेस्ड (CBT) बनाने, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा मजबूत करने और देशभर के परीक्षा केंद्रों के लिए एक समान नेशनल स्टैंडर्ड तय करने की मांग की गई है. इसके अलावा किसी केंद्र पर तकनीकी या प्रशासनिक गड़बड़ी होने पर तुरंत री-एग्जाम कराने का स्पष्ट प्रोटोकॉल की भी मांग है. साथ ही उत्तर कुंजी (आंसर-की), नॉर्मलाइजेशन और टाई-ब्रेकिंग प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता के लिए 'केंद्रीय परीक्षा डैशबोर्ड' बनाया जाए.
दीर्घकालिक सुधारों के तहत स्कूल और कॉलेज स्तर की पढ़ाई को इतना मजबूत करने का सुझाव दिया गया है ताकि छात्रों को कोचिंग संस्थानों पर निर्भर न रहना पड़े. इस पर अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि परीक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जिसमें विद्यार्थी की मेहनत और क्षमता का सटीक मूल्यांकन हो, न कि उसे किसी प्रशासनिक या तकनीकी नाकामी की वजह से अनिश्चितता और तनाव झेलना पड़े.