
कहते हैं कि अगर कुछ नया सीखने और हासिल करने का जुनून हो, तो उम्र महज एक नंबर बनकर रह जाती है. जहां ज्यादातर लोग 60 के पार पहुंचकर आराम की जिंदगी चुनने का मन बना लेते हैं, वहीं उत्तर प्रदेश सरकार के एक 64 वर्षीय पूर्व अधिकारी ने कुछ ऐसा कर दिखाया है, जो एक सक्सेस स्टोरी बनकर युवा पीढ़ी के लिए एक बहुत बड़ी नजीर है.
अपनी व्यस्त नौकरी और हर हफ्ते सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करने के बावजूद, उन्होंने न केवल 64 की उम्र में MTech की डिग्री हासिल की, बल्कि अपनी क्लास के टॉप-10 छात्रों में जगह भी बनाई.
हर हफ्ते 1000 किमी का सफर और हाथ में किताबें
वर्ष 2022 में सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद, वे उत्तर प्रदेश में नगर निगमों की देखरेख करने वाली रेगुलेटरी बॉडी में डिप्टी सीईओ के रूप में सेवाएं दे रहे हैं. इस पद की जिम्मेदारियों के कारण उन्हें ग्राउंड वर्क देखने के लिए अक्सर अलग-अलग जिलों का दौरा करना पड़ता है.
तमाम व्यस्तताओं के बीच उनका हर हफ्ते लगभग 1,000 किलोमीटर का सफर तय होता था. लेकिन गाड़ियों के सफर और थकान के बीच भी उन्होंने पढ़ाई से नाता नहीं तोड़ा. सफर के दौरान मिले खाली वक्त का इस्तेमाल वे नोट्स बनाने, रिवीजन करने और परीक्षा की तैयारी में करते थे.
अपने से आधी उम्र के छात्रों को दी मात
उनके बेटे शशांक श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर अपने पिता के इस प्रेरक सफर को साझा किया. शशांक ने लिखा कि उनके पिता ने अपनी क्लास के उन छात्रों से बेहतर प्रदर्शन कर दिखाया, जिनका जन्म उनके पिता के पहले प्रमोशन के भी बाद हुआ था. अपने से लगभग आधी उम्र के सहपाठियों के बीच पढ़ते हुए उन्होंने पूरे बैच के टॉप-10 स्टूडेंट्स में अपनी जगह पक्की की.

अब अगला निशाना: IIM लखनऊ
MTech जैसी कठिन डिग्री हासिल करने के बाद भी उनका यह सफर यहां थमा नहीं है. 64 की उम्र में जहां लोग नए लक्ष्य तय करना बंद कर देते हैं, वहां वे अब IIM लखनऊ के 'एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम' में दाखिले के लिए आवेदन फॉर्म भर रहे हैं. सोशल मीडिया पर उनकी यह कहानी तेजी से वायरल हो रही है और लोग उनके इस अटूट जज्बे व 'लाइफलॉन्ग लर्निंग' के एटीट्यूड की जमकर तारीफ कर रहे हैं.