इंडीड के नवीनतम त्रैमासिक हायरिंग ट्रैकर के मुताबिक, भारत में करीब 10 में से 6 पेशेवरों का कहना है कि उनके पद और सैलरी के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है. इससे पता चलता है कि कई कार्यस्थलों पर पद या प्रोफेशनल पहचान और मिलने वाली सैलरी के बीच अंतर बढ़ रहा है. सर्वे में करीब 80% पेशेवरों ने माना कि अलग-अलग उद्योगों में पद की जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल आम हो गया है. कई लोगों ने बताया कि उन्होंने अपने सहकर्मियों को बिना सैलरी में समान बढ़ोतरी के सीनियर पोजीशन मिलते हुए देखा है.
पदनाम से ज्यादा सैलरी को महत्व
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले दो साल में जिन पेशेवरों का पदनाम बदला, उनमें से करीब एक तिहाई लोगों ने बताया कि उनकी सैलरी में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई या 5% से कम बढ़ोतरी हुई. वहीं, 52% पेशेवरों ने कहा कि नई नौकरी चुनते समय वे बेहतर पोजीशन के बजाय ज्यादा सैलरी को प्राथमिकता देंगे. इससे पता चलता है कि पोजीशन करियर के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन सैलरी अभी भी करियर में आगे बढ़ने का एक बड़ा पैमाना है.
हालांकि, पेशेवर अपने पदनाम को भी महत्व देते हैं. करीब 70% लोगों ने कहा कि उनका पोजीशन भविष्य में मिलने वाले करियर के अवसरों को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. वहीं, करीब 73% लोगों का मानना है कि अच्छा पोजीशन संभावित नियोक्ताओं की नजर में उनकी छवि बेहतर बनाता है. इसके अलावा, 57% लोगों ने कहा कि उनका पदनाम उनकी कुल नौकरी संतुष्टि पर भी काफी असर डालता है.
कंपनियां कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए बड़े ओहदे दे रहीं
सर्वे में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि कंपनियां अब कर्मचारियों को आकर्षित करने और उन्हें कंपनी में बनाए रखने के लिए बड़े ओहदों का ज्यादा इस्तेमाल कर रही हैं. करीब 57% नियोक्ताओं ने कहा कि उनकी कंपनियां कर्मचारियों को आकर्षित करने या बनाए रखने के लिए कुछ हद तक या काफी हद तक वरिष्ठ ओहदे देती हैं.
नियोक्ताओं के मुताबिक, मार्केट की बदलती जरूरतें और कंपनियों के बदलते ढांचे इस चलन की बड़ी वजह हैं. कुछ कंपनियां कम सैलरी बजट होने के बावजूद कर्मचारियों की तरक्की को पहचानने और अच्छे कर्मचारियों को कंपनी में बनाए रखने के लिए उन्हें बड़ा ओहदा देती हैं.
इंडीड इंडिया के प्रबंध निदेशक शशि कुमार ने कहा कि ओहदा आज भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे किसी व्यक्ति की पेशेवर पहचान, मिलने वाले अवसर और क्षमता का पता चलता है. हालांकि, उन्होंने कहा कि ओहदा तब ज्यादा प्रभावी होता है जब वह वास्तविक करियर तरक्की को दिखाता है, न कि उसकी जगह लेता है.
बड़े ओहदे के साथ जिम्मेदारी और सैलरी भी बढ़ना जरूरी
सर्वे के नतीजों से पता चलता है कि कंपनियां और कर्मचारी पदोन्नति को अलग-अलग नजरिए से देखते हैं. कंपनियां बड़े ओहदे को कर्मचारियों को सम्मान देने के एक तरीके के रूप में देखती हैं, जबकि कर्मचारी वास्तविक करियर तरक्की को बेहतर सैलरी से जोड़कर देखते हैं. सर्वे के मुताबिक, कर्मचारियों के लिए बेहतर ओहदा अभी भी महत्वपूर्ण है, लेकिन वे चाहते हैं कि इसके साथ जिम्मेदारी और सैलरी में भी बढ़ोतरी हो.
यह सर्वे इंडीड की ओर से वैलुवॉक्स ने मई और जून 2026 में किया था. इसमें पूरे भारत से 2,533 कर्मचारी और 1,211 नियोक्ता शामिल हुए. सर्वे में अलग-अलग उद्योगों, कंपनियों के आकार, करियर के अलग-अलग स्तर और अलग-अलग जगहों के लोगों को शामिल किया गया. इनमें टियर-1, टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी शामिल थे.