ऑफिस में आगे बढ़ने का मतलब हमेशा ज्यादा घंटे काम करना नहीं होता. जेन जी अब करियर में तरक्की तो चाहती है, लेकिन इसके लिए अपनी पूरी जिंदगी नौकरी के नाम करने के मूड में नहीं है. यही सोच क्विट एम्बिशन को पिक्चर में ला रही है. यानी पैशन है, प्रमोशन भी चाहिए, अच्छी सैलरी भी चाहिए, लेकिन हर दिन देर रात तक ऑफिस में बैठना जरूरी नहीं.
मेहनत कम नहीं, तरीका अलग
जेन जी को काम से परेशानी नहीं है, जेन जी कभी काम से भागना या उससे पीछा नहीं छुड़ाना चाहता बल्कि उसकी सोच ये है कि ज्यादा देर ऑफिस में बैठने को ज्यादा मेहनत नहीं माना जाना चाहिए. अगर कोई अपना काम टाइम पर पूरा कर रहा है, अच्छे रिजल्ट दे रहा है और नई चीजें सीख रहा है, तो उसके लिए रोज 10-12 घंटे ऑफिस में रहना सक्सेस की निशानी नहीं है. उसके लिए प्रोडक्टिविटी ज्यादा मायने रखती है.
इसलिए जेन जी अब 'वर्क स्मार्ट, नॉट जस्ट हार्ड' वाली सोच को ज्यादा महत्व दे रही है. वो चाहती है कि उसकी मेहनत का असर उसके काम में दिखाई दे, सिर्फ ऑफिस में बिताए घंटों में नहीं. उसके लिए ऑफिस में ज्यादा
प्रमोशन चाहिए, लेकिन पर्सनल लाइफ में बैलेंस भी चाहिए
क्विट एम्बिशन का मतलब ये नहीं कि जेन जी करियर को लेकर गंभीर नहीं है. वो अच्छी भूमिका, ज्यादा जिम्मेदारी, बेहतर सैलरी और प्रमोशन चाहती है. फर्क सिर्फ इतना है कि वो इसके लिए अपनी नींद, परिवार, दोस्तों और पर्सनल टाइम को लगातार कुर्बान नहीं करना चाहती.
उसके लिए सफलता का मतलब अब सिर्फ बड़ी कुर्सी या बड़ा पैकेज नहीं है. अच्छा करियर और अच्छी निजी जिंदगी, दोनों साथ चलें, यही नया लक्ष्य है.
‘हमेशा व्यस्त’ दिखना जरूरी नहीं
पहले ऑफिस में देर तक रुकना मेहनती एम्प्लॉय की पहचान माना जाता था. जेन जी इस सोच को बदल रही है. वो मानती है कि किसी एम्प्लॉय की काबिलियत इस बात से तय होनी चाहिए कि वो क्या काम करता है और कितना अच्छा करता है, न कि वो ऑफिस में कितने घंटे दिखाई देता है.
यानी जेन जी की एम्बिशन खत्म नहीं हुई है, बस उसका तरीका बदल गया है. प्रमोशन चाहिए, सफलता चाहिए, लेकिन 12 घंटे ऑफिस में बैठकर नहीं.