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हजारों KM दूर ईरान की जमीनी जंग में कितने मजबूत साबित होंगे अमेरिकी सैनिक? किसकी क्या स्ट्रेंथ

अमेरिका के पास आधुनिक हथियार, बेहतरीन तकनीक, मजबूत एयर फोर्स और फायरपावर है, लेकिन दूर की जंग लड़ना और गुरिल्ला हमलों से बचना कमजोरी है. ईरान के पास बड़ी संख्या में सैनिक, मिसाइलें, ड्रोन और पहाड़ी इलाकों का फायदा है, लेकिन पुरानी एयर फोर्स और आधुनिक तकनीक की कमी उसकी बड़ी कमजोरी है. जमीनी जंग दोनों के लिए लंबी और खतरनाक हो सकती है.

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अमेरिका के सैनिक कुछ इसी तरह से ईरान के तटों और द्वीपों पर समंदर से आएंगे. (Photo: Representative/Getty)
अमेरिका के सैनिक कुछ इसी तरह से ईरान के तटों और द्वीपों पर समंदर से आएंगे. (Photo: Representative/Getty)

अगर अमेरिका और ईरान के बीच जमीन पर सीधी जंग शुरू हो जाए तो दोनों की सेना में बहुत बड़ा अंतर दिखेगा. अमेरिका की कुल एक्टिव सेना करीब 13 लाख सैनिकों की है, जबकि ईरान के पास 6 लाख जवान हैं. ईरान के पास एक्स्ट्रा बसीज नाम की पैरामिलिट्री फोर्स है, जिसमें लाखों सोल्जर शामिल हो सकते हैं. 

अमेरिका के पास दुनिया भर में फैली हुई सेना है, लेकिन मिडिल ईस्ट में फिलहाल 50 हजार से ज्यादा सैनिक हैं. हजारों मरीन्स तथा 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के सैनिक भेजे जा रहे हैं. ईरान की सेना मुख्य रूप से अपनी सरजमीं की रक्षा के लिए तैयार है. 6 लाख के सैनिकों के सामने ये 50 हजार से ज्यादा सैनिक क्या करेंगे?

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अमेरिका की ताकत – आधुनिक हथियार और तकनीक

अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत उसकी बेहतरीन तकनीक और हथियार है. उसके पास हजारों टैंक, चार लाख से ज्यादा आर्मर्ड वाहन, आधुनिक तोपें और बेहद मजबूत लॉजिस्टिक्स सिस्टम है. अमेरिकी सैनिकों के पास नाइट विजन, ड्रोन, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और प्रेसिजन गाइडेड मिसाइलें हैं. 

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US Iran Ground War

अमेरिका हवा से घातक हमला कर सकता है – उसके पास सैकड़ों फाइटर जेट, अटैक हेलिकॉप्टर और एयरक्राफ्ट कैरियर हैं. मरीन्स और स्पेशल फोर्सेस बहुत तेजी से किसी भी जगह पर हमला कर सकते हैं और फिर तेजी से निकल सकते हैं. अमेरिका का डिफेंस बजट बहुत बड़ा है, इसलिए वह लंबे समय तक जंग लड़ सकता है.

अमेरिका की कमजोरी – दूरी और गुरिल्ला हमले

अमेरिका की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि ईरान उसकी अपनी जमीन से बहुत दूर है. सप्लाई लाइन लंबी होने से ईंधन, गोला-बारूद और खाना पहुंचाना मुश्किल हो सकता है. ईरान की पहाड़ी और रेगिस्तानी जगहें अमेरिकी टैंकों और वाहनों के लिए मुश्किल हैं. अगर ईरान गुरिल्ला युद्ध शुरू कर दे तो अमेरिकी सैनिकों को नुकसान हो सकता है. इराक-अफगानिस्तान में भी अमेरिका को इसी तरह की समस्या का सामना करना पड़ा था.

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ईरान की ताकत – संख्या, मिसाइल और एसिमेट्रिक वॉर

ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसकी संख्या और घरेलू मैदान में लड़ने की क्षमता है. ईरान के पास करीब 1700 टैंक, हजारों आर्टिलरी और रॉकेट लॉन्चर हैं. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) बहुत मजबूत है. बसीज फोर्स लाखों लोगों को जल्दी जुटा सकती है. 

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ईरान एसिमेट्रिक जंग में माहिर है – छोटे-छोटे ड्रोन, सस्ते मिसाइल, फ्लोटिंग माइन्स, स्पीड बोट और छिपकर हमला करने की रणनीति. ईरान की मिसाइलें और ड्रोन मुख्य भूमि से आसानी से हमला कर सकते हैं. पहाड़ी इलाके और सुरंगें ईरानी सैनिकों को छिपने में मदद करेंगी.

ईरान की कमजोरी – पुराने हथियार और हवाई कमजोरी

ईरान की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी एयर फोर्स है. उसके ज्यादातर फाइटर जेट पुराने हैं. अमेरिकी हवाई हमलों में काफी नुकसान हो चुका है. ईरान के पास एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं हैं. नेवी लगभग खत्म हो चुकी है. लंबे समय तक जंग लड़ने के लिए पैसे और आधुनिक तकनीक की कमी है. अगर अमेरिका हवाई हमले जारी रखता है तो ईरान की सप्लाई लाइन और कमांड सिस्टम टूट सकता है.

रणनीति में बहुत ज्यादा अंतर

अमेरिका की रणनीति तेज, आधुनिक और हाई-टेक हमले पर आधारित है – हवा से सपोर्ट, स्पेशल फोर्सेस से सर्जिकल स्ट्राइक और तेजी से कब्जा करके निकल जाना. वह टारगेट जैसे द्वीप या महत्वपूर्ण जगह पर फोकस कर सकता है.

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ईरान की रणनीति लंबी और थकाऊ जंग पर है – गुरिल्ला हमले, माइन्स, ड्रोन स्वार्म, सड़कों पर आईईडी और दुश्मन को महंगा पड़ने वाला युद्ध. ईरान का मकसद अमेरिका को लंबे समय तक उलझाकर रखना और आर्थिक नुकसान पहुंचाना है. 

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अगर जमीनी जंग हुई तो अमेरिका के पास तकनीक और फायरपावर की भारी बढ़त है, लेकिन ईरान के पास घरेलू मैदान, बड़ी संख्या और एसिमेट्रिक वॉर की ताकत है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अमेरिका जल्दी जीत सकता है लेकिन लंबे समय तक कब्जा बनाए रखना उसके लिए बहुत मुश्किल और महंगा होगा. ईरान सीधी लड़ाई में कमजोर है लेकिन गुरिल्ला हमलों से अमेरिका को भारी नुकसान पहुंचा सकता है.

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